रोहिंग्या मुस्लिमों के समर्थन में फुटबाल खिलाडी “रोनाल्डो” ने उठाया ये बड़ा कदम

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बीते कुछ समय में म्यांमार में जो संकट मुसलमानों पर ढाया गया उसके चलते न जाने कितने मुसलमानों को अपनी जान गवानी पड़ी. ये संकट मानव इतिहास के पन्नों में सबसे अनजाना नरसंहार बन गया हैं क्योंकि आज दुनिया का कोई भी देश इस पर बोलने से कतराता है.

डर के साए में जीनों को बच्चें भी हैं मजबूर

इस संकट ने सैकड़ो मुसलमानों को अपना देश, अपना घर, अपने परिवार को छोड़कर दूसरे देशों में पनाह लेने को मजबूर किया. इसी लिए एक बड़ी संख्या में ये मासूम मुस्लिम अपने जीवन को बुद्धियों से बचाने के लिए अपने बच्चो के साथ, शिविरों में डर के साए में रहने को मजबूर हैं.

अपने बच्चों के मूल अधिकारों के लिए रोहिंग्या मुसलमानों ने चलाया एक अनोखा अभियान

आज कई देशों में पनाह ले चुके रोहिंग्या मुसलमानों ने, शरणार्थी शिविर में रहने वाले बच्चों का समर्थन करने के लिए सोशल मीडिया के ट्विटर पर अपने एक अनोखे अभियान के माध्यम से, बच्चों को अपने जीवन का मूल अधिकार देने के लिए दुनिया से आग्रह करते हुए कुछ ऐसा कहा जिसे सुन किसी का भी दिल पसीज जाएगा.

प्रसिद्ध फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो आए  रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में

अपने बच्चों के मूल अधिकारों के लिए लड़ रहे रोहिंग्या मुसलमानों के लिए उस वक्त अच्छी खबर आई जब ट्वीट में क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने यह कहते हुए उन्हें अपना समर्थन दिया कि..

“उनके बच्चों और रोहंग्या मुस्लिम शरणार्थियों के बच्चों एक समान हैं और उनके और उनके बच्चों के बीच कोई अंतर नहीं है. वह सीरिया में मुस्लिम नरसंहार के बारे में अपनी चिंता का भी जवाब दे रहे हैं और अब उन्होंने रोहिंग्या शिविरों में रहने वाले बच्चों की भलाई के लिए अभियान चलाया है.”

इस घटना से 650,000 मुसलमान हुए प्रभावित

आकड़ों की माने तो इस नरसंहार घटना से करीब 650,000 मुसलमान प्रभावित हुए, जिसमें से सकदों मुसलमानों ने तो अपने किसी न किसी प्रियजन को हमेशा के लिए खो दिया. अब, यही बचे हुए मासूम मुसलमान अपने शिविरों में बिना बुनियादी सुविधाओं के साथ डर के साए में रह रहे हैं.

ऐसे में प्रसिद्ध फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो चाहते हैं कि दुनिया के सभी देश उन बच्चों के लिए आगे बढ़कर कोई जरुरी फैसला लें जो लंबे समय से अपने नस्ल और धर्म की वजह से पीड़ित हैं.

निष्कर्ष

गौरतलब है कि, एक लम्बे अरसे से म्यांमार में मुसलमानों के नरसंहार की ये भयावह घटना चल रही हैं जिसे पहले तो कोई स्वीकार नहीं करना चाहता था, लेकिन 2017 में, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने जब इन कार्यों को अपने क्षेत्र से मुसलमानों की सफाई के रूप में घोषित कर दिया तो मानो एक प्रलय सी आ गई.


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