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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को उनके पद पर बहाल किया था और यह आदेश दिया था कि वह कार्यवाही खत्म होने तक किसी भी तरह का नीतिगत फैसला नहीं ले सकते।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर हाई पावर सिलेक्शन कमेटी ने दखलअंदाजी करते हुए आलोक वर्मा को निदेशक पद से हटाने का फैसला सुना दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार ने लिया ये फैसला

आपको बता दें कि जिस हाई पावर सिलेक्शन कमेटी ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाने का फैसला लिया है। उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल है। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मोदी सरकार देश की निष्पक्ष और सबसे बड़ी जांच एजेंसी को किस कदर अपने हाथों में ले चुकी है।

पीएम मोदी के इशारे पर हटाए गए आलोक वर्मा

बताया जा रहा है कि कमेटी की यह बात बैठक भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर हुई है। ढाई घंटे तक चली इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जस्टिस एके सिकरीऔर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल थे।

कांग्रेस नेता ने किया था पीएम मोदी के फैसले का विरोध

इस दौरान कमेटी के फैसले को कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने गलत भी बताया और इसका विरोध भी किया लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और जस्टिस सिकरी आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाने का फैसला ले चुके थे।

इस मामले में देश के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए आलोक वर्मा को निदेशक पद से हटाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

प्रशांत भूषण ने कहा- आलोक वर्मा से डर गई मोदी सरकार

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर यह कहा है कि ब्रेकिंग तो सीबीआई निदेशक के रूप में पदभार ग्रहण करने के 1 दिन बाद ही मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने फिर से आलोक वर्मा को सुने बिना जल्दबाजी में पद से हटा दिया। यह फैसला राफेल घोटाले में मोदी सरकार के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करने की संभावना के डर से किया गया है जांच को रोकने के लिए ऐसी हताशा।


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