जानिये क्यों 13 सालो से इस गाव के लोग मुस्लिमो से ही करवाते है रामलीला

रामलीला हिन्दुओ के परम प्रिय त्योहारों में आता है, 9 दिन लोगो का जमावड़ा लगता है और वो इसका आनंद लेते है | लेकिन कभी सोचा है की मुस्लिम समुदाय रामलीला की अगुवाई कर रहा हो?

जी हां, एकता की एक अनोखी मिसाल उत्तराखंड के शांतिपुरी स्थित एक बेहद पुराना गांव तुर्कागौरी से मिली जहा का जन समुदाय मुस्लिम समुदाय के लोगो से रामलीला करवाने की चाह रखता है |

क्यों चाहते है गाँव के लोग ऐसा?

डेली हंट की खबर के मुताबिक उत्तराखंड स्थित तुर्कागौरी आज पूरे देख में इसलिए जाना जाता है क्योकि यहां एक परम्परा है जिसमे लोग मुस्लिम युवाओ को ही राम और लक्षमण के रूप में देखना चाहते है | लगभग 13 सालो से यहा हिन्दू लोग मुस्लिमो के साथ मिलकर रामलीला का आयोजन करते है |


एकता और सौहार्द का उदाहरण आप इस तरह भी देख सकते हैं कि पिछले कई सालों से तुर्कागौरी के रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भी सिर्फ मुस्लिम समाज से ही बन रहे हैं। गांव का हर कोई सदस्य चाहता है कि रामलीला का मंचन कराने की जिम्मेदारी सिर्फ उन्हें ही मिले।

रामलीला कमेटी का अध्यक्ष भी एक मुस्लिम व्यक्ति ही चुना जाता है

बीते 10 सालो से यहा एक और चीज़ घटित हो रही है और वो है रामलीला कमेटी का अध्यक्ष | पिछले 10 सालो से अशरफ अंसारी ने इस कमेटी का नेत्रत्व किया है लेकिन उसके बाद जब अध्यक्ष बदला तभी एक मुस्लिम व्यक्ति ही चुन कर आया |

लियाकत अंसारी को 2014 में अध्यक्ष बना दिया गया था | देश में आज जिस तरह से मुस्लिम हिन्दुओ में तनाव का माहौल बिखर रहा है वही ये गाँव सिखाता है की आपस में कैसे मिल कर रहा जाता है |

नवरात्रि के शुरू होते ही रामलीला की टीम 8 से 9 दिन तक लगातार रामलीला का मंचन किया जाता है।

इसमें दशरथ पुत्र राम के जन्म होने, 14 वर्ष वनवास, राम-हनुमान मिलाप, लंका दहन आदि का मंचन हिंदू-मुस्लिम युवा मिलकर करते हैं। इस गांव आस-पास के इलाकों से सैकड़ों-हजारों लोग रामलीला का मंचन देखने के लिए एकत्रित होते है।

देखिये वीडियो:-

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