बेहेतरीन- किन्नर ने दिया बच्चे को जन्म

यक़ीनन आप इस खबर की महज हेडलाइन पढ़कर ही चौंक गए होंगे. चौकना बनता भी हैं क्योंकि ये खबर लिखते हुए हम भी बेहद हैरत में पड़ गये थे.

लेकिन दोस्तों इस खबर को विस्तार में बताते हुए आपको एक बात हम साफ़ करना चाहेंगे कि इस खबर को लिखने से हमारा मतलब अंधविश्वास फैलाना बिल्कुल नहीं है, बल्कि आस्था के करिश्में से आपको रूबरू कराना है.

दरगाह अजमेर शरीफ भारत की प्रसिद्ध दरगाहों में से एक है

जैसा सभी जानते हैं कि दरगाह अजमेर शरीफ आज एक ऐसा पाक नाम है जिसे सुनने भर से ही रूहानी सुकून मिल जाता है.

शायद ही इस दुनिया में कोई ऐसा होगा जिसे अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की मजार पर आने की चाहत किसी भी ख्वाजा के चाहने वाले को न हो.

भारत में लम्बे वक्त से अजमेर शरीफ के दरगाह का बहुत बड़ा महत्व रहा है.

जो आज भी दुनियाभर की तमाम प्रसिद्ध दरगाहों में से एक है.

यहाँ आने से हर धर्म के लोगों की मुराद होती है पूरी

लेकिन दोस्तों इस दरगाह की सबसे खास बात यह है कि ख्वाजा पर हर धर्म के लोगों का विश्वास है.

यहां आने वाले भक्त चाहे वे किसी भी मजहब से क्यों न हों, ख्वाजा के दर पर दस्तक देने के बाद उनके मन में दरगाह को लेकर केवल और केवल श्रद्धा ही रह जाती है.

शायद इसी श्रद्धा और आस्था के चलते यहाँ आए दिन बड़े-बड़े नेता, बॉलीवुड की हस्तियां, और देशभर के कई बड़े लोग अजमेर की दरगाह शरीफ पर अपनी सफलता के लिए चादर चढ़ाने दूर-दूर से आते रहते है.

किन्नरों की आस्था का हमेशा से ही केंद्र रही हैं ये दरगाह

लेकिन शायद ही आप ये जानते होंगे कि ये दरगाह अकेली ऐसी दरगाह हैं जिसमें स्त्री-पुरुषों के अलावा किन्नर समाज की भी बहुत आस्था है.

जी हाँ सुनकर हैरानी होगी लेकिन ये सच है.

आपको यहाँ हर साल खासतौर पर उर्स के मौके पर देश के अलग-अलग भागों से किन्नर सिर झुकाते नज़र आ जाएंगे.

दरगाह शरीफ की ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी आता है भले ही वो किन्नर हो, वो कभी भी खाली हाथ नहीं लौटता.

जब दरगाह का फल खाकर किन्नर हो गई गर्भवती

जानकारी के लिए बता दें कि इस दरगाह के जानकार ये बताते हैं कि ख्वाजा के इस शहर में मीरां सैयद हुसैन खिंहगसवार की भी एक दरगाह मौजूद है.

इस दरगाह के साथ एक करिश्माई लाल बूंदी का पेड़ है.

और कहा जाता हैं कि जो भी मनुष्य इसके फल को खाता है वह बेऔलाद नहीं रहता.

इतिहासकार तो ये भी बताते है कि एक बार एक किन्नर ने इस पेड़ के फल को खा लिया और फिर चमत्कार हो गया.

दरअसल, इस लाल पेड़ के फल को खाकर वो किन्नर गर्भवती हुई और उसने एक लड़के को जन्म दिया.

निष्कर्ष

शायद इसी श्रद्धा को देखते हुए ही ये मान्यता हैं कि यहाँ आने वाले श्रद्धालु ख्वाजा मोईनुद्दीन चिस्ती की दरगाह पर जाते हुए तारागढ़ पहाड़ पर मौजूद इस दरगाह में भी अपना सिर झुकाते हैं.

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Leesha Senior Reporter

यह खबर वायरल इन इंडिया के वरिष्ट पत्रकार के द्वारा लिखी गयी है| खबर में कोई त्रुटी होने पर हमें मेल के द्वारा संपर्क करें- [email protected] आप हमें इस फॉर्म से भी संपर्क कर सकते हैं, 2 घंटे में रिप्लाई दिया जायेगा |
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