सच ही गया सामने, वजू भाई की पूरी कुंडली खोल दी वायरल इन इंडिया ने

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कर्नाटक विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद से ही राजननीति में पूरी तरह से उथल पुथल मची हुई है। जहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी है वहीं वह बहुमत के आंकड़े से अभी दूर है। इसके साथ ही कांग्रेस और जेडीएस ने अपने गठबंधन के साथ सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है।

कर्नाटक चुनावों के नतीजों के साथ ही गर्मायी सियासत

ऐसी स्थिति में अब सभी की निगाहें कर्नाटक के गवर्नर वजुभाई वाला पर जाकर टिक गई हैं कि वह आखिर इस स्थिति पर किस तरह से फैसला लेते हैं।

कर्नाटक की सरकार बनने से पहले जान लेते हैं कि आखिर वजुभाई के भारतीय जनता पार्टी के साथ रिश्ते किस तरह से हैं जो कि बेहद जरुरी है।

कर्नाटक के गवर्नर वजुभाई वाला के बीजेपी से हैं सालों पुराने रिश्ते

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आपको बता दें कि अपनी अलग छवि को लेकर पहचाने जाने वाले कर्नाटक के गवर्नर वजुभाई वाला पहले से ही बीजेपी के नेता रह चुके हैं।

वहीं वजुभाई को करीब से जानने की कोशिश करें तो वह नेरंद्र मोदी के वफादार लोगों में से एक हैं।

गुजरात में वितमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रह चुके वजुभाई ने नरेंद्र मोदी को विधानसभा पहुंचाने के लिए खुद की सीट छोड़ दी थी।

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इसके साथ ही वजुभाई गुजरात सरकार में 1998 से लेकर 2012 तक कई अहम विभाग संभाल चुके हैं। जिसमें वित मंत्रालय, उर्जा व परिवहन विभाग।

गुजरात में की हैं सक्रिय राजनीति

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साल 2015 में कर्नाटक में गवर्नर बनने से पहले वजुभाई गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष व विधानभा के अध्यक्ष रह चुके हैं।

वजुभाई और मोदी के बीच रिश्ते कितने गहरे हैं इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मोदी के लिए वजुभाई ने अपनी सीट खाली कर दी थी, जिससे जनवरी 2002 में उपचुनाव हो पाए थे।

उस समय मोदी गुजरात से अपना पहला चुनाव लड़ने जा रहे थे। वाला उस समय केशुभाई पटेल की कैबिनेट में मंत्री थे।

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आपको बता दें कि वह बीजेपी के राजकोट में पहले मेयर थे। उन दिनों में वह बीजेपी को फंडिंग करते थे, उस समय गुजरात में कहीं भी सत्ता में नहीं थी।

आरएसएस के साथ ही शुरु की थी राजनीति

वजुभाई के राजनीतिक जीवन की शुरुआत ही स्कूल के दौरान ही आरएसएस में शामिल होने के बाद से शुरु हो गई हुई थी।
इसके बाद उन्होंने बीजेपी का जन संघ कहा जाने वाला दल चुन लिया जिसके बाद पार्टी के बड़े नेताओं के साथ उनका मिलना हुआ, जैसे सीएम केशुभाई पटेल।

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1990 में विधानसभा में आने से पहले तक वजुभाई राजकोट से 1980 के दशक तक मेयर पद पर थे।

इससे कहीं न कहीं तस्वीर साफ होती हैं कि आखिर में कर्नाटक राज्य के गवर्नर के तो बीजेपी के साथ काफी सालों पुराने रिश्तें है।

वजुभाई पर है बीजेपी के लिए पक्षपात् होने का संदेह

जिससे जाहिर होता है कि बीजेपी का पक्ष ले सकते हैं, वहीं कांग्रेस नेताओं ने इस पर विरोध जताते हुए कह दिया है कि गवर्नर को यहां निष्पक्ष होने की जरुरत है।

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आखिरखार अगर वजुभाई बतौर गवर्नर अपना फैसला पक्षपात् होते हुए लेंगे जो यह लोकतंत्र की हत्या जैसा होगा।

 


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