शेयर करें

जैसा सब जानते है कि आज ये विश्व अलग-अलग धर्मों के बट गया हैं. आज हर किसी की अपनी-अपनी मान्याताएं हैं जिनका वो पालन बिना किसी स्वार्थ के करते भी हैं.

इस्लाम में खुदा को याद करना है बेहद जरुरी

अगर इस्लाम धर्म की बात करे तो उसमें खुदा को याद करना और उसकी इबादत करना हर इंसान के लिए बेहद जरूरी बताया गया है. शायद इसलिए ही ये कहा जाता है कि इस्लाम धर्म के लोग दिन में अपना खाना भूल सकते हैं, अन्य जरूरी कार्य भी भूल सकते हैं लेकिन खुदा को याद करना कोई नही भूलता.

जुम्में की नमाज का इस्लाम में होता है विशेष महत्त्व

ये देखा गया है कि शुक्रवार यानी जुम्में की नमाज हर सच्चे मुसलमान के लिए बेहद महत्त्व रखती हैं. आज हम आपको इसी रात के बारे में बताते हुए अवगत कराएंगे कि आखिर मुस्लिम समाज में शुक्रवार के दिन ही नमाज पढ़ना इतना विशेष क्यों है?

इस्लाम में जुम्मे का दिन होता है सबसे ज्यादा पाक दिन

यूं तो इस्लाम में हर दिन अल्लाह का बताया जाता है. हर एक मुस्लिम को नमाज़ अदा करनी आवश्यक बताई जाती है, लोकिन इस्लाम में जुम्मे के दिन को सबसे ज्यादा पाक दिन बताया गया है. आपमें से कई लोग दिल्ली जामा मस्जिद देखने जरुर गये होंगे, लेकिन शायद ही कोई ये जनता होगा कि दिल्ली की जामा मस्जिद का नाम भी ‘जुम्मा’ के नाम पर रखा गया है.

जुम्मे का दिन अल्ला की इबादत और भाईचारे को समर्पित होता है

कहा जाता है कि जुम्मे का दिन रब की इबादत और भाईचारे को समर्पित होता है. इसके साथ ही जानकरी के लिए बता दें कि जुम्मे के दिन नमाज अदा करने से पहले हर मस्जिद में उसके इमाम साहब लोगों को कुरान शरीफ से कुछ उपदेश पढ़कर सुनाते हैं. शुक्रवार को नमाज पढ़ने के अपने कुछ खास नियम भी होते हैं.

जुम्मे के दिन अल्ला माफ़ करते है हफ़्ते भर की गलतियां

दरअसल, इस्लाम में जुम्मे के दिन को अल्लाह के दरबार में रहम का दिन भी कहते हैं. मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति जुम्मे की नमाज पढ़ता है तो उसकी पूरे हफ्ते की गलतियों को खुदा भी माफ कर देता है.

खुदा द्वारा बनाए गये ‘आदम’ का जन्म और मृत्यु शुक्रवार को ही हुआ था

इस्लामिक जानकारों का कहना है कि शुक्रवार के दिन खुदा ने ‘आदम’ को बनाया था और उसी आदम की मृत्यु भी शुक्रवार को ही हुई थी. क्योंकि आदम जन्म के बाद ही धरती पर आए थे, इसलिए दिन के उस एक घंटे को इस्लाम में बेहद अहम माना जाता है.

बताते चले कि, शुक्रवार के दिन नमाज पढ़ने के पीछे का कारण जो आज हमने आपको बताया है वे सभी इस्लामिक मान्यताओं पर आधारित हैं.

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े

शेयर करें