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जानें, एक नोट की छपाई पर आता है कितना खर्चा और कैसे तय होता है कितने नोटों की होगी छपाई

वायरल इन इंडिया संवाददाता -
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देश में नोटबंदी लागू होने का समय आज भी लोगों को अच्छी तरह याद है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि, ‘आज से पुराने 500 और 1000 के नोट मान्य नहीं होंगे।’ पुराने नोट बंद होने के साथ 2000 रुपये का नया नोट चलन में आना भी जनता के लिए बिल्कुल नया था। जहां इस नए नोट को हाथ में लेने के लिए हर कोई बेताब था वहीं लोगों कई लोगों ने इसे नकली, कलर छोड़ने वाला बताया।

हालांकि देश की करेंसी को लेकर उठाए गए इतने बड़े कदम के बाद आज भी इन नोटों से जुड़ी कई बातें हैं जो केवल सीमित लोगों के अधिकार के दायरे में आती हैं। आखिर ये नोट कौन छापता है कितने छापता है ऐसी कई बहुत जरुरी बातें हैं जो भारतीय करेंसी से जुड़ी हुई हैं, आईये जानें…

केवल इसके अधिकार में आता है नोटों की छपाई का जिम्मा

भारत में नोट छापने का अधिकार केवल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दायरे में आता है। एक रुपए के नोट को छोड़कर बाकी सभी नोट केवल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रेस में ही छापे जाते हैं।

एक रुपये के नोट की छपाई इसके जिम्मे

एक रुपए का नोट और सिक्के बनाने का अधिकार वित्त मंत्रालय के पास होता है। यही वजह है कि एक रुपए के नोट पर गवर्नर की जगह, वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। वित्त मंत्रालय के पास से एक रुपए के नोट और सिक्के बनने के बाद रिजर्व बैंक को भेजें जाते हैं।

कितनी करेंसी की होगी छपाई ऐसा किया जाता है तय

रिजर्व बैंक कितनी करेंसी छापेगा? ये साल 1957 से ही न्यूनतम आरक्षित प्रणाली (Minimum Reserve System) के आधार पर तय किया जाता है। न्यूनतम आरक्षित प्रणाली के तहत R.B.I. 200 करोड़ रुपए की संपत्ति अपने पास रखता है। जिसमें 115 करोड़ रुपए का सोना और 85 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा शामिल होती है। रिजर्व बैंक इस संपत्ति को अपने पास रखकर अर्थव्यवस्था की जरूरत के हिसाब से कितनी भी मात्रा में नोटों की छपाई कर सकता है।

नोटबंदी के बाद से खर्चा हुआ ज्यादा

नोटबंदी के बाद से ही 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद हो गए थे, इसके चलते ही RBI को काफी ज्यादा मात्रा में 200, 500 और 2000 रुपए के नोटों की छपाई करनी पड़ी थी।

एक साल में नोटों की छपाई पर हुआ इतना खर्चा

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2015 से जून 2016 के बीच के दौरान नोटों की छपाई पर 3,420 करोड़ रुपए और जुलाई 2016 से जून 2017 के बीच 7,965 करोड़ रुपए का खर्चा आया है। साल 2017 में इस खर्चे पर 133 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

RBI द्वारा दी गई जानकारी

18 दिसंबर 2017 में RBI ने लोकसभा में नोटों की छपाई में होने वाले खर्चे की जानकारी दी है। जिसे पढ़कर आप भी जान सकते हैं कि किस नोट पर कितना पैसा खर्च हुआ हैं।

500 रुपए के नोट पर खर्चा

वित्त राज्य मंत्री पी.राधाकृष्णन का कहना है, नोटबंदी के बाद से 8 दिसंबर तक 500 रुपए के कुल 1,695.7 करोड़ नए नोट छापे गए हैं। 500 रुपए के 1,695.7 करोड़ नोट छापने में RBI को 1,293.6 करोड़ रुपए का खर्चा आया है। इस हिसाब अंदाजा लगाए जाए तो एक नोट की छपाई में 2.94 रुपए खर्च हुए हैं।

200 रुपए के नोट पर खर्चा

RBI की जानकारी के मुताबिक 8 दिसंबर तक 200 रुपए के कुल 178 करोड़ रकम के नोट छापे गए हैं। जिनकी छपाई में कुल 522.8 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसी तरह से 200 रुपए के एक नोट की छपाई में 2.93 रुपए खर्च हुए हैं।

2000 रुपए के नोट पर खर्चा

नोटबंदी के बाद से अभी तक देखें तो RBI ने 2000 रुपए के कुल 365.4 करोड़ नोट छापे हैं। जिन्हें छापने के लिए कुल 1293.6 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। देखें तो 200 रुपए का एक नोट छापने में 3.54 रुपए का खर्च आया है।

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