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भाजपा वालों के हाथ सरकार आना ठीक वैसा ही है जैसे अंधे के हाथ मक्खन लग जाए । जी हाँ, ये लोग सत्ता चलाने के काबिल नहीं है। आप सब मिलकर प्रधानमंत्री जी का , जो इतनी बड़ी बड़ी बातें करते हैं, उनका ढेरों शुक्रिया अदा करें । क्यों ? उनकी नोट्बंदी की बदौलत है कि भारत को ‘सबसे तेज विकास करने वाला देश’ का ख़िताब भी गवाना पड़ा और शायद इसका देश पर बहुत बड़ा असर भी हो सकता है ।

बहुत से भाजपा के मंत्रियों ने कोशिश की देश को तेजी से आगे ले जाए । लेकिन वो सब नाकाम रहे क्योकि ये उनके बस का है ही नहीं । वो सिर्फ दंगे करा सकते हैं, लोगों में मजहब के नाम पर फूट डाल सकते हैं और ऐसा करने वाले अब कहाँ विकास के चक्कर में पड़ें?

श्रीलंका का रैंक 73 है

‘इंटरनेशनल मोनेटरी’ ने अनुमान लगाकर बताया कि पिछले 1 साल में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का ख़िताब भारत ने खो दिया है । अब भक्त आकर इसमें शायद मोदी की कोई दूरगामी सोच बता दें जो खुद मोदी तक ने न सोची हो । देश में नोटबंधी लागू करके मोदी ने भारत से उसका ये ख़िताब भी छीन लिया ।

भारत का रैंक 131 हो गया

‘फाइनेंसियल एक्सप्रेस’ के अनुसार भारत लगातार HDI (ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स) में गिरता जा रहा है । भारत की ग्रोथ रेट पिछले साल से 6.6 % हो गयी जो 2015 में 7.6 % थी । वहीँ चाइना की ग्रोथ 2016 में 6.7% बढ़ी है । IMF के अनुसार ये सब पिछले नवम्बर महीने में हुई नोट्बंदी का असर है । ये सब कुछ 8 नवम्बर के बाद से हुआ और तब से लगातार गिरावट देखी जा रही है ।

इंटरनेशनल न्यूज़ पेपर के पत्रकार खुद  कहते हैं कि भारत फास्टेस्ट इकॉनमी में अब नहीं है

भारत के ‘सेंट्रल स्टेटिस्टिक्स’ अधिकारी के अनुसार उन्होंने जितनो ग्रोथ सोची थी उस मुकाम तक भारत नहीं पहुँच पाया । अब आप ही बताएं, लोग मोदी और मोदी के भक्त नोट्बंदी को एक चमत्कार सिद्ध करने पर तुले रहते हैं। क्या चमत्कार ऐसा होता है? हाँ ये हो सकता है की ये लोग 3 इडियट्स से प्रेरित हो चमत्कार कुछ और ही समझ रहे हों ।

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