भारतीय मीडिया के फैलाए झूठ पर भड़का सऊदी अरब, दी यह चेतावनी

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अरब देशों के दौरे का एक मामला भारतीय मीडिया में वायरल किया गया जिसमे एक वीडियो फर्जी साबित होने के बाद अरब अमीरात ने इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। साथ ही उसने एक चेतावनी भी हैं।

बता दे यह खबर प्रसारित करने के लिए खाड़ी की मीडिया ने भारतीय मीडिया की कड़ी आलोचना और निंदा की है। बता दे यह वीडियो जो कि फर्जी पाया गया उसमे दिखाया गया था कि एक कार्यक्रम में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस अपना संबोधन ‘जय सियाराम’ के साथ शुरू कर रहे हैं। जो कभी हो नही सकता है।

वहीं इस पर खाड़ी देशों के प्रमुख अखबार गल्फ न्यूज का कहना है कि- भारत की मीडिया के एक हिस्से और कुछ समूहों ने राजनीतिक फायदा उठाने के लिहाज से यह दुष्प्रचार किया है।

हम बताते हैं आपको उस वीडिओ का पूरा सच-

आज हम आपको उस वीडियो का पूरा सच बता दें कि वायरल किया गया वीडियो पुराना है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान साल 2016 में मुरारी बापू के एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए ‘जय सियाराम’ के साथ अपनी बात शुरू करते हैं।


वहीँ इस पुराने वीडियो को भारत के कई अहम चैनलों द्वारा ट्वीट किया गया था। वहीं वीडियो कुछ समय के बाद ही इटंरनेट पर वायरल होने लगा और बहुत सारे लोगों ने इस फेक न्यूज को रीट्वीट भी करने लगे। बस यही से शुरू हुआ फेक वीडियो का खेल जिसने सऊदी अरब का माजक उड़ा दिया।

अरब न्यूज ने दी फेक वीडियो कि सफाई शेख शामिल ही नही हुए ऐसे किसी कार्यक्रम में

गल्फ न्यूज के मुताबिक शेख मोहम्मद बिन जायद कभी भी ऐसे किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए हैं। कार्यक्रम में शामिल जिस व्यक्ति को दिखाया गया है वे यूएई के अखबारों के कॉलमिस्ट और अरब मामलों के जानकार सुल्तान सऊद अल कासमी हैं।

वहीं इस फेक खबर को प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ते असर के रूप में दिखाया गया था। वीडियो रीट्वीट करने वाली एक महिला ने लिखा है, ‘आप यदि भू-राजनीति को समझते हों, तो आप जानते होंगे कि इसका मतलब क्या है और पीएम मोदी आज कहां खड़े हैं।

 

गल्फ न्यूज का कहना है कि-

यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारतीय मीडिया शेख मोहम्मद बिन जायेद को नहीं पहचानती है जो कि 2017 में ही गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि रहे थे और साल 2016 में तो उन्होंने राजकीय अतिथि के रूप में भारत का दौरा किया था। हमें भारतीय मीडिया से ऐसी उम्मीद नहीं थी, बहुत ही रद्दी है भारतीय मीडिया

निष्कर्ष- 

इस फेक खबर को प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ते असर के रूप में दिखाया गया है। क्या इस तरह से राजनीति होती हैं। अपनी छबि बनाने के लिए देश कि छबि ख़राब करना क्या ये सही है


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