आइये मिलते हैं आजाद भारत के पहले वोटर से जिनका चुनाव आयोग करेगा सम्मान

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हमारे देश की सियासत में चुनावों का कितना महत्व है यह तो हम सभी जानते हैं, जिस तरह से भारत एक लोकतांत्रिक देश है उस लिहाज से यहां चुनावों का और चुनावी मौसम में जनता के मताधिकार का काफी महत्व होता है।

लोकतंत्र में मतदाता ही है कर्ता-धर्ता

किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनता के मतदान का कितनी अहमियत होती है यह हम सभी जानते हैं, मताधिकार से ही जुड़ी एक खास व दिलचस्प जानकारी हम आपके लिए लेकर आए हैं।

दोस्तों आज हम आपको जिस शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं वह उस दौर को देखने वाले हैं जब भारतवर्ष में पहली बार मतदान कराया गया था और वे देश के पहले मतदाता थे।

हिमाचल प्रदेश चुनाव के दौरान एक अनोखा इतिहास आया सामने

जिस दौरान हिमाचल प्रदेश की विधानसभा के लिए चुनाव कराए गए थे उन दिनों इस वोटर की काफी चर्चा की गई थी। आज हम आपको इनके बारे में ही खास जानकारी देने जा रहे हैं, जिसे खुद चुनाव आयोग ने भी माना है।

हम बात कर रहे हैं, आजाद भारत के पहले मतदाता श्याम शरण नेगी की, जिन्होंने हिमाचल से ही चुनावों के दौरान वोट डाला था।

आज़ाद हिंदुस्तान के पहले आम चुनाव में पहला वोट डालने वाले किन्नौर के श्याम शरण नेगी आज के दौर के समय में सबसे उम्र दराज वोटर के रुप मे ंम मौजूद है।

1952 में देश की पहली लोकसभा के चयन के लिए देश के पहली बार आम चुनाव हुए थे। बर्फबारी और मौसम के मिजाज को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में सबसे पहले मतदान कराया गया था।

आजाद भारत में सबसे पहले मतदान हुए थे हिमाचल प्रदेश में

इतिहास गवाह है कि देश के बाकी हिस्सों में फरवरी 1952 में वोट डाले गए थे लेकिन हिमाचल के ऊपरी इलाको में अक्टूबर महीने में ही मतदान करा दिया गया था, क्योंकि जनवरी-फरवरी में वहां लोगों का ठंड के मारे बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

इस कारण ही पोलिंग पार्टटियों का भी उन इलाकों में पहुंचना लगभग नामुमकिन था।

पहली लोकसभा के जब मतदान कराए गए थे तो वह समय किसी भी त्यौहार से कम नहीं था। मतदान के दिन किन्नौर जिले के आल्पा गांव के युवा श्याम शरण नेगी सुबह ही सजधज कर वोट डालने पहुंच गए थे।

उस वक्त के सबसे पहले मतदाता आज उम्र है 100 के पार

हालांकि 1951 के बाद से अब का समय देखें तो श्याम नेगी की उम्र 100 साल से ऊपर हो गई है। श्याम दादा 2 जुलाई को अपना जन्मदिन मनाते हैं और जन्म का साल है 1917 है।

1951 के अक्टूबर की वह सर्द की सुबह सबसे पहला वोट डालते समय ये पता भी नहीं था कि ये वोटर देश की सरकार बनाने के साथ ही एक रिकॉर्ड भी अपने नाम बना रहा है।

देश के लोकतांत्रिक इतिहास में पहले वोटर के साथ श्याम सिंह नेगी अब सबसे ज्यादा उम्र के वोटर के तौर पर् हमेशा के लिए याद किए जाएंगे।

1951 से लेकर अब तक के समय में हर चुनाव में वोट डालने वाले श्याम दादा इस बार हुए हिमाचल के चुनाव में भी बड़ी खुशी के साथ वोट डालने पहुंचे थे।

चलने फिर असमर्थ लेकिन दिमाग से आज भी तेज है श्याम दादा

उनकी उम्र का असर है नहीं तो चलने फिरने में असमर्थ होने के बाद भी उनका दिमाग, आंख और कान काफी तेज हैं।

चुनाव आयोग की तरफ से इस खास मतदाता के लिए इंतजाम भी खास किए थे। इनके लिए खास तरह का एक वाहन बनवाया गया था जिससे कि उम्रदराज होने के बाद भी नेगी आसानी से वोट डाल सकें।

हिमाचल प्रदेश चुनाव 2017 में आयोग ने भी दिया सम्मान 

नेगी के घर के पास वाले मतदान केंद्र पर खासतौर से कालीन बिछाया गया। उनका स्वागत जिला मतदान अधिकारी द्वारा किया गया।

श्याम दादा का मतदान डालने के बाद उन्हें इस तरह सम्मान देने के साथ ही यह साबित होता है कि लोकतंत्र है जहां लोक उत्सव बनाया गया जिसमें मतदाता ही देवता है।


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