देश के इन महान मुस्लिम मुख्यमंत्रियों के बारे में जानें, जिन्होंने रचा इतिहास

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी चाहे जितनी भी कोशिश कर देश में एक संप्रदाय विशेष के विरुद्ध माहौल बनाने का प्रयास करें लेकिन हकीकत यही है कि भारत के डीएनए में धर्मनिरपेक्षता बसती है.

इस देश में सभी धर्मों का सम्मान होता रहा है और होता रहेगा. संभव है कि आज उनकी कोशिशें थोड़ी सफल होती दिख रही हो परंतु ये स्थायी नहीं हैं. धर्म की आड़ में हो रहे खून खराबे से लोगों का मोहभंग होता जा रहा है और वो पुराने अमनपसंद भारत की वापसी चाहने लगे हैं.

आइए आज हम आपसे चर्चा करते हैं देश के उन 05 महान मुस्लिम मुख्यमंत्रियों की, जिन्होंने हिंदू बहुल राज्यों की कमान संभाल कर देश की गंगा जमुनी तहजीब को मजबूत किया.

अब्दुल रहमान अंतुले


कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता रहें अब्दुल रहमान अंतुले महाराष्ट्र के प्रथम मुस्लिम सीएम थें. इनका जन्म 09 फरवरी 1929 को हुआ था. 09 जून 1980 से 12 जनवरी 1982 तक इन्होंने बतौर सीएम देश एवं प्रदेश की सेवा की. इनकी मृत्यु 02 दिसंबर 2014 को हुई.

 

बरकतुल्लाह खान

बरकतुल्लाह खान राजस्थान के पहले मुस्लिम सीएम थें. कांग्रेस के बड़े नेता के तौर पर जाने जाने वाले खान ने 25 महीनों तक राजस्थान जैसे बड़े प्रदेश की बागडोर संभाली. इनका कार्यकाल 09 जुलाई 1971 से 11 अगस्त 1973 तक था.

अब्दुल गफूर

 

अब्दुल गफूर का जन्म 1918 को बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ था. बिहार के सीएम के तौर पर उनका कार्यकाल 02 जुलाई 1973 से लेकर 11 अप्रैल 1918 था. इन्हीं के कार्यकाल में बिहार में संपूर्ण क्रांति का आंदोलन शुरु हुआ था. अब्दुल गफूर अपने जमाने में बिहार कांग्रेस के बढ़े मुस्लिम चेहरे हुआ करते थें.

सैयद अनवरा तैमूर

06 महीने के अल्प कार्यकाल के लिए असम की सीएम रही सैयद अनवरा तैमूर का जन्म 24 नवंबर 1936 के हुआ था. इन्होंने 06 दिसंबर 1980 से 30 जून 1981 तक सीएम की कुर्सी पर आसीन होकर असम की सेवा की. ये कांग्रेस पार्टी से जुड़ी थीं.

सी एच मोहम्मद कोया

 

मोहम्मद कोया को केरल के प्रथम मुस्लिम मुख्यमंत्री थें. उनका कार्यकाल 12 नवंबर 1979 से 21 दिसंबर 1979 तक यानी की मात्र 54 दिनों का था. उनकी गिनती केरल के गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों में होती है.

निष्कर्ष :

भारत सबका है. सब भारत के है. इसी सूत्रवाक्य पर अमल करने से भारत का गौरव दुनिया भर में छाया है. अगर कोई इस सोच से खिलवाड़ करने की सोच रहा है तो वही असली राष्ट्रदोही है और देश का गद्दार है.


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