नमाज़ पढने के इन वैज्ञानिक फायदों को जानकर हो जायेंगे हैरान

इस वक़्त दुनिया भर में इस्लाम को केवल एक ही चश्मे से देखा जा रहा है जो की जानकारी न होने का आभाव है | इस्लाम धर्म में नमाज़ एक वो जरिया है जिसमे मुस्लिम लोग अल्लाह का सजदा करते है | क्या आप जानते है की नमाज़ के कई वैज्ञानिक फायदे भी है जो आपको उर्जा देते है और सवस्थ रखते है? इस लेख के ज़रिये जानिये की नमाज़ करने के क्या फायदे है!

जो लोग मुस्लिम नही है उन्होंने अपने मुस्लिम दोस्तों को नमाज़ पढ़ते ज़रूर देखा होगा जिसमे वो खड़े होने से लेकर बैठ कर अपनी गर्दन को दाए बाए घुमाते है | इन सभी आसन के दौरान शरीर के अलग अलग भाग को भी लाभ पहुच रहे होते है |

नियत है पहली पोजिशन

नमाज़ आरम्भ होते ही पहला पडाव होता है नियत जिसमे नमाज़ी सीधे खड़ा होता है और दोनों पावो को एक दुसरे से जोड़ कर खड़ा होता है| वह अपने दोनों हाथों को सामने अपनी छाती से कुछ नीचे रखता है। उसके हाथों की हथेलियां एक-दूसरे के ऊपर होती हैं।

इस दौरान आपके दिल को फायदा होता है

इस अवस्था में नमाज़ी के दिल और फेफडो को फायदा पहुचता है | इतना ही नही यह पोजिशन हमारी भावनाओं एवं दिमागी इंद्रियों को संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। दोनों हाथ हृदय चक्र को बनाते हैं जिससे उसका दिल सही सलामत कार्य करता है।

दूसरी पोजिशन को रुकू कहते है

नमाज़ में अगली पोजिशन रुकू है जिसमे नमाज़ी थोड़ा आगे की ओर झुक जाता है और अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर रख देता है। नमाज़ का यह आसन योग के आसन ‘अर्ध उत्तनासन’ से काफी मिलता जुलता है।

कमर दर्द से राहत

जो लोग अक्सर कमर दर्द की शिकायत से जूझ रहे होते है वो इस आसन से राहत पा सकते है | वे इसे एक कसरत के तौर पर भी कर सकते है | इसके अलावा इस आसन में नमाज़ी के पेट एवं पेट से कुछ नीछे के हिस्से पर भी ज़ोर पड़ता है। इससे उसके पेट की कई परेशानियां खत्म हो जाती हैं।

तीसरी पोजिशन सजदा

नमाज़ में सबसे ज्यादा जो अब तक गैर मुस्लिम लोगो ने नोटिस किया होगा वो ये सजदा वाला आसन ही है | यहा तक की फिल्मो में भी यही सीन दर्शाया जाता है | इसमें नमाज़ी ज़मीन पर एक कपड़ा बिछाते हैं और उसपर घुटनों के बल बैठ जाते हैं। इसके बाद वे अपने माथे को ज़मीन पर लगाते हुए अपने शरीर को पूरा मोड़ लेते हैं, ताकि उनका नाक भूमि को छू सके |

क्या फयदा होता है इस दौरान?

इस अवस्था में शरीर को सबसे ज्यादा फयदा होता है क्योकि इसमें व्यक्ति के अधिकतम शारीरिक अंगों पर दवाब पड़ता है | एक शोध में पता चला है कि विश्व के लगभग 1.6 बिलियन मुस्लिम प्रतिदिन 5 बार नमाज अदा करते हैं | जिसमे उनके शारीर के कई पार्ट मूव करते हैं. जैसे गर्दन, कमर, घुटना, अंगुलियाँ आदि |

शरीर को मिलती है गज़ब की ऊर्जा

पेट के बाद नमाज़ी अपनी नाक को ज़मीन पर लगाते है और हाथो को भी चेहरे के आस पास रखते है जिससे उनके शरीर को ज़मीन के सहारे एक प्रकार की मैगनेटिक फील्ड मिलती है। यह शारीरिक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होती है।

शोध के अनुसार प्रतिदिन नमाज पढने से ह्रदय रोग के साथ मोटापा का ख़तरा भी कम हो जाता है| इस शोध में ये बात साफ़ हो गया है कि नमाज के दौरान की जाने वाली क्रियाएं इबादत के साथ-साथ हमारे शारीर की एक्सरसाइज का भी काम हो जाता है |

आखिरी पोजिशन

सजदा के बाद नमाज़ी नमाज़ के आखिरी चरण की ओर बढ़ता है। जहां वह अपने स्थान से उठकर सबसे पहले अपने चेहरे को दाईं ओर घुमाता है और फिर बाईं ओर। फिर अंत में दोनों हाथों को आकाश की ओर बढ़ाकर अपनी नमाज़ की अंतिम प्रार्थना करता है।

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