राजनीति के इस दिग्गज मुस्लिम नेता को बीजेपी व कांग्रेस भी करती है सलाम - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

राजनीति के इस दिग्गज मुस्लिम नेता को बीजेपी व कांग्रेस भी करती है सलाम

बदरुद्दीन असम की राजनीति में ऐसा नाम है जो अपनी पैसों की ताकत के साथ ही अपने धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं।

गरीबों और पिछड़े मुसलमानों के लिए काम करते आए बदरुद्दीन मुसलमान समुदाय में काफी लोकप्रिय हैं। लोग भी अपनी समस्यओं के लिए उनके पास अपनी समाधान लेने के लिए आते हैं और बदरुद्दीन भी अपने तरीके से लोगों की परेशानियों को सुलझाते हैं।

लोगों के लिए मसीहा से कम नहीं है मौलाना बहरुद्दीन अजमल

लोगों की मदद करने के लिए बदरुद्धीन पानी में कुरान की आयतें पढ़कर फूंक देते हैं। अंधविश्वास का आरोप लगाए जाने पर उन्होंने कहा, अगर मेरी दुआओं से किसी को फायदा होता है तो उसमें हर्ज क्या है। अवैध नागरिक ठहराए जाने से आतंकित मुस्लिम उनको एक संरक्षक के तौर पर भी देखते हैं।

असम की राजनीति में है बदरुद्दीन का दबदबा

राजनीति में बदरुद्दी का इतना दबदबा है कि कांग्रेस हो या बीजेपी सभी दलों की नजरें खास मौलाना बदरुद्दीन अजमल पर बनी रहती हैं। बदरुद्दीन वह शख्सियत माने जाते हैं जो जिसके भी हाथ आएंगे चुनाव में उसकी जीत तो निश्चित हैं। इसलिए सभी बदरुद्दीन पर खास ध्यान दे उन्हें खुश करने की कोशिश में लगे रहते हैं।

महज 10 सालों में राजनीति में बनाया बड़ा मुकाम

महज 10 सालों में असम की राजनीति में खुद को साबित करने वाले 65 वर्षीय मौलाना बदरुद्दीन अजमल मुख्य रुप से इत्र का कारोबार करते आएं हैं। पिछले 60 सालों से वह इत्र बना व बेच रहे हैं जो उनका खानदानी कारोबार बन चुका है।

उनके लिए कहा जाता है कि अपने समय में 500 रुपये से काम की शुरुआत करने वाले बदरुद्दीन ने इत्र बनाकर कारोबार को ऐसे फैलाया कि दुबई से लेकर कई विदेशों तक उनका इत्र बेचा जाता है।

विदेशोें में कई जगह फैलाया इत्र का कारोबार

अपने कंधों पर असमिया गमछा लटकाने वाले बदरुद्दीन का कारोबार सिर्फ इत्र तक ही नहीं बल्कि रियल इस्टेट से लेकर चमड़ा व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जगत तक उनकी पहुंच बन गई है। बदरुद्दीन सिर्फ व्यापारी के लिए ही नहीं जाने जाते उन्होंने दारूल उलूम देवबंद से इस्लाम और अरबी में फ़ाज़िल-ए-देवबंद (पोस्ट ग्रेजुएट के समतुल्य) किया हैं। जिससे वे खुद को मुसलमानों के धार्मिक नेता के तौर पर बना सके।

मौलाना बदरुद्दीन अजमल की तीसरी पहचान उनकी समाजसेवा कार्यो से है। अजमल फाउंडेशन की देखरेख में असम में बहुत से शिक्षा संस्थान, मदरसे, अनाथालय और अस्पताल चलाए जाते हैं।

अपने पिता की नसीहत से बदरुद्दीन कर रहे है समाजसेवा

बदरुद्दीन कहते हैं कि वे अपने पिता की नसीहत के मुताबिक अपनी कमाई का 25 फीसदी असम के विकास पर खर्च करते हैं। पिछले एक दशक में इत्र के कारोबार से उन्होंने खुद को एक राजनीति खिलाड़ी के साथ ही लोगों के मसीहा के रूप में स्थापित किया है। वहीं असम में बढ़ती सांप्रदायिकता उनके लिए फायदेमंद साबित हुई है।

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