शेयर करें

आपको बता दें कि जिस कहानी के बारे में अब हम जिक्र करने जा रहे हैं वो आपको किसी फिल्मी कहानी की तरह लगेगी लेकिन ये एक दम सौ प्रतिशत सच है। ये किस्सा केरल का है जहां पर एक 31 दिन की नवजात बच्ची को एक गंभीर दिल की बीमारी हुई थी। और बच्ची को इलाज के लिए तिरुवनंतपुरम के श्री चित्रा अस्पताल में भर्ती करना था। वो भी 8 घंटों के अंदर और ये अस्पताल 514 किलोमीटर दूर था। जिसे आमूमन तय करने में 13 घंटे का वक्त लगता है।

गौरतलब है कि बच्ची का स्वास्थय ठीक न होने की वजह से उसे प्लेन से भी नहीं ले जाया जा सकता था तो विकल्प सिर्फ सड़क के रास्ते जाने का ही बचता था। आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि इस 13 घंटे के रास्ते को एंबुलेंस के ड्राइवर ने मात्र 6 घंटे और 50 मिनट में पूरा कर दिया।

क्या हुआ पूरा किस्सा

दरअसल एक 31 साल की नवजात बच्ची फातिमा लवीना को गंभीर दिल की बीमारी थी। इस बच्ची को पहले तो कन्नूर मेजिकल कॉलेज में भर्ती कराया लेकिन वहां से उसे रेफर किया गया श्री चित्रा इंस्टीट्यूट में। लेकिन ये इंस्टीट्यूट 514 किलोमीटर दूर था और वहां पहुंचने के लिए आम तौर पर 13-14 घंटों का वक्त लगता है। और बच्ची को किसी भी हालत में 8 घंटों के अंदर ही वहां पर पहुंचाना जरूरी था नहीं तो लड़की की जान नहीं बच पाती।

बच्ची की स्थिति की वजह से उसे सड़क के ही रास्ते से ले जाया जा सकता था। गौरतलब है कि सरकार की तरफ से रातों-रात में सोशल मीडिया पर अपील की गई और बच्ची की मदद करने के लिए पूरा केरल एकजुट हो गया।

लोगों ने कैसे किया इसे मुमकिन

इस बच्ची की मदद करने के लिए बहुत से लोग खुद मदद करने के लिए आए और व्हाट्सएप पर एंबुलेंस का नंबर और बाकी की जानकारी बांट दी। एंबुलेंस में बैठे लोग लगातार अपनी लोकेशन शेयर कर रहे थे। जिससे रास्ते पर होने वाला ट्रेफिक पहले से ही साफ होता जा रहा था। इस बच्ची की मदद के लिए लोगों ने अपनी जाति और धर्म को अलग रख सिर्फ इंसानियत का धर्म निभाया।

गौरतलब है कि एंबुलेंस के वहां से गुजरने से पहले ही लोगों ने वहां पर पहुंचकर ट्रेफिक को साफ करवाने लगते और पूरे रास्ते में एंबुलेंस सिर्फ 15 मिनट के लिए ही रुकी। स्थानीय लोगों, अस्पताल प्रशासन और एंबुलेंस के ड्राइवर अब्दुल ने अपनी सुझबुझ से उस बच्ची को समय से पहले अस्पताल पहुंचा दिया और ये ऑपरेश्न सफल रहा।

देखिये वीडियो:-

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े

शेयर करें