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आज बदलते समय के साथ देश में यातायात के अनेक साधन, जैसे- रेल, सड़क, तटवर्ती नौ संचालन, वायु परिवहन इत्यादि शामिल हो गये हैं.

देशभर में ट्रेन हैं करोड़ों लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा


हमेशा से ही देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में भारतीय रेल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है.

आज भारतीय रेल देशभर में यातायात का मुख्य साधन होने के साथ ही देश के जीवन का भी जरूरी हिस्सा बन चुकी है.

देश भर में रेलगाड़ियों के आवागमन ने जहां एक ओर हमारे देश की कला, इतिहास और साहित्य पर अद्भुत प्रभाव डाला है तो वहीं हमारे देश के विभिन्न प्रांत के लोगों के बीच विविधता में एकता की अहम कड़ी को भी जोड़कर रखा है.

ट्रेनें विभिन्न स्थानों को जोड़ते हुए यात्रियों को देश के एक छोर से दूसरे छोर तक बड़े पैमाने पर तेज गति से और कम लागत पर आने-जाने में मदद करती है.

हम सभी में से हर किसी ने अपने जीवन ने एक बार तो ट्रेन यात्रा जरुर की ही होगी, लेकिन बावजूद इसके हमे ट्रेन से संबंधी कई जानकारियाँ नहीं पता होती है.

ट्रेन में चेन खीचने से रुक जाती हैं चलती ट्रेन

दोस्तों अगर आपने कभी ट्रेन का सफ़र किया होगा तो अक्सर देखा ही होगा कि ट्रेन में चेन पुलिंग होती ही रहती है. जिससे चेन खीचने के बाद ट्रेन रुक जाती है, और कुछ देर बाद पुलिस और टी.टी उस बोगी मे पुछताछ करने आ जाते है.

हम फिल्मों में भी देखते हैं कि कैसे जब भी कोई ट्रेन में लगी चेन खीचता हैं तो चलती ट्रेन तुरंत रुक जाती है. और ट्रेन रोकने का कारण पूछने के लिए पुलिसकर्मी और टी.टी उसी बोगी में खुद पहुँच जाते है.

ऐसे में अक्सर मन में ये सवाल उठता हैं कि आखिर पुलिस और टी.टी को कैसे पता चल जाता है कि इस बोगी मे चेन पुलिंग हुई है.

इसी बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए आज हम आपको बताएँगे कि आखिर चेन पुलिंग से कैसे ट्रेन रुक जाती है और चेन खीचने वाली सही बोगी का पुलिस को कैसे पता चलता है.

आखिर कैसे एक चेन रोक देती हैं चलती ट्रेन

जानकारी के लिए बता दें कि जब भी कोई ट्रेन की चेन खिचता हैं तो ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम पाईप मे प्रवेश करने वाली हवा की ताकत के दवाब के कारण पाईप फुल जाता है.

जिस कारण से हवा की ताकत के दवाब मे काफी गीरावट आ जाती है और इसके चलते ही ट्रेन के नीचे लगे डब्बों के नीचे पिस्टन मे तेज दवाब उत्पन हो जाता है.

जिससे पटरी पर दौड़ती ट्रेन के पहियों मे ब्रेक लगना शुरू हो जाता है.

इस तरह से ट्रेन के गिरते प्रेशर को ट्रेन का ड्राईवर भी देख सकता है जिससे वो खुद भी ट्रेन को रोकने की कोशिश करने लगता है.

बता दें कि गार्ड के कम्पार्टमेंट मे भी एक ख़ास तरह का एयर प्रेशर गोत्च लगा होता है और उसी गोत्च की मदद से ट्रेन के गार्ड को ट्रेन रुकने का पता चल है और वो डाइवर को सिग्नल दे देता है.

इस तरीके से रेल प्रशासन को भी मिलती हैं सही बोगी की जानकारी

जैसे जैसे चेन खीचने के बाद धीरे-धीरे एयर प्रेशर गिरने लगता है तो ट्रेन ड्राईवर तुरंत दो छोटी सीटी और एक बड़ी सीटी बजाकर ट्रेन के गार्ड और टीटी को सिग्नल देता है की ट्रेन चैन पुलिंग की वजह से रोकी जा रही है.

इसके बाद आमतौर पर असिस्टेंट ड्राईवर और गार्ड उस कोच को ढूढ़ते हैं जहाँ से चैन पुलिंग की गयी है.

चेन खीचने वाली बोगी को ढूढना इसलिए भी आसान हो जाता हैं क्योकि उस कोच का वोल्व बंद हो जाता है.

जब दुबारा ट्रेन को शुरू किया जाता है तो गार्ड उस कोच के वोल्व को खोलते हैं और एयर प्रेशर प्रणाली के जरिये फिर से हवा का दबाव बनाता हैं जिससे सभी कोचों के ब्रेक खुल जाते हैं और ट्रेन फिर से चलने के लिए तैयार हो जाती है.

निष्कर्ष

हम अब उम्मीद करते हैं कि अब अगर कोई चेन खीचेगा तो आपको पता होगा कि आखिर चलती ट्रेन एक चेन से कैसे रुक गई.

देखिये वीडियो:-

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