आइए पढ़ते है वो वाक़या जब 60 मुसलमानो ने 60,000 दुश्मनों को ढेर कर दिया था

ये इस्लामी तारिख की वो जंग है जिसमें मुसलमानों ने बहादुरी की ऐसी मिसाल पेश की कि बड़े-बड़े योद्धा अपने सपने में भी ऐसा करने की नहीं सोच सकते.

जब 60000 हथियारों से लैस दुश्मन भिडे मुट्ठी भर मुजाहिदों से

दरअसल, दशकों पहले जबला बिन ऐहम गस्सानी हथियारों से लैस 60000 सवारों को लेकर जब मैदान में आए तो उसे मुजाहिदों ने देख लिया, जिसके बाद उन्होंने हज़रत अबू उबैदा को इस बात की तुरत जानकारी दी.

मुजाहिदों ने दुश्मनों को मौके से जाने का हुक्म भी दिया

हज़रत अबू उबैदा ने मुजाहिदों से नर्मी से बात करते हुए उन्हें मौके से जाने का हुक्म दिया. लेकिन बावजूद इसके जब वो वहां से नहीं गये. तो तमाम मुजाहिद अपने हथियारों और घोडों की तरफ दौडकर मैदान में पहुंचे.

हज़रत खालिद ने मुजाहिदों को बताई अपनी जीत की रणनीति

लेकिन हज़रत खालिद बिन वलिद रजियल्लाहु अन्हु ने उन्हें वहीं रोका और कहा “ए इस्लाम के जां निसारो ठहर जाओ और तव्वकुफ करो. आज मेैं इनको ऐसा चक्मा दूँगा कि इनमे से कोई भी अपना मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे.”

दुश्मनों का पर्दा फाश करना चाहते थे हज़रत खालिद

हज़रत अबू उबैदा रजियल्लाहु ने हज़रत खालिद को हैरत से देखते हुए पूछा कि “ए अबू सुलेमान! ऐसा तुमने क्या सोचा है ?” जिसके बाद हज़रत ने उनको हँसते हुए उत्तर दिया कि “मैं यह चाहता हूं कि इन सबकी अहमियत का राज फाश कर दूं. लिहाजा उसके लश्कर के मुकाबले हम अपने चंद मुजाहिदों को ही खोए और कसम है रसुल अल्लाह की जब भी हमारे लश्कर के लोगों को इस हाल में देखेगा कि वह सिर्फ अल्लाह की रज़ा मन्दी के लिये ही लडते हैं, तो वो अपने आप मैदान छोड़कर भाग जाएगा.”

“हमारा एक आदमी 2 हजार दूश्मनों से अकेला लड़ेगा”

अबू उबैदा ने इस पर कहा कि “तुम्हारी राय मुनासिब है. तुम हमारे लश्कर से मुनासिब मुजाहिदों को चुन लो.” इसपर हज़रत खालिद बिन वलिद रजियल्लाहु ने फरमाया कि “मैं चाहता हूं अपने लश्कर से 30 आदमी चुनु जो बहादुरी से लड़े. हमारा एक आदमी 2 हजार दूश्मनों से ( यानी एक मुजाहिद के सामने 2 हजार दूश्मन) से लड़े.”

सिर्फ 30 आदमी लेकर 60 हजार से लड़ने की बात सुनकर हज़रत खालिद बिन वलिद रजियल्लाहु अन्हु हैरान रह गई.

हज़रत अबू सुफियान रजियल्लाहु अन्हु ने इसपर पूछा कि “क्या वाक्य आप 30 आदमीयों को लेकर 60 हजार से लड़ने का इरादा रख़ते हैं ?” “हां मेरा यही इरादा है” उन्होंने उत्तर दिया.

हजरत अबू सूफियान, हज़रत खालिद की रणनीति सुनकर हैरत में पड़ गये

उनका हौंसला देखकर हजरत अबू सूफियान ने कहा “अगर तुम यह कहते कि हमारा एक आदमी दुश्मनों के दो आदमियों से लड़ेगा, तो शायद बात ठीक थी. मगर एक आदमी 2 हजार से लडे तो इस का मतलब ये हुआ कि वह अपने हाथों हलाकत में पड़ता है.”

“अगर वह जलती हूई आग पर चलेंगे तो आग भी सर्द हो जाएगी.”

हज़रत खालिद रजियल्लाहु अन्हु ने उनकी चिंता को समझते हुए जवाब दिया कि “मैं इस्लामी लश्कर में से ऐसे बहादुरों को चुनुगा जिन्होंने अपनी जानों को राहे खुदा में वक्फ कर दिय है. इसलिए वह सिर्फ अल्लाह और अल्लाह के रसूल की रज़ा मन्दी के लिये ही जेहाद करते हैं. ऐसे में अगर वह जलती हूई आग पर चलेंगे तो आग भी सर्द हो जाएगी.”

और इस तरह चन्न मुसलमानों ने अपने हौसलों के बल पर 60,000 दुश्मनों पर फतह पाई.

story source: http://reportlook.com/learn-how-60-muslims-defeated-60000-in-the-war-anjali-sharma/

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Leesha Senior Reporter

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