क्या आप जानते हैं कि हर पेन की कैप में क्यों बनाया जाता है यह छेद?

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पेन का इस्तेमाल आज हमारी बेसिक जरुरतों में से एक हैं यह तो आप सभी जानते हैं, वहीं हम में से कई ऐसे भी लोग होते हैं जिन्हें पेन का काफी शौक होता है अपने इसी शौक को पूरा करने के लिए लोग कई अलग अलग तरह के पेन का इस्तेमाल करते हैं और उनके पास पेन का कलेक्शन भी होता है।

रोज इस्तेमाल करने वाले पेन के बारे में यह नहीं जानते होंगे आप

हालांकि हम यहां अलग अलग पेन के बारे में तो नहीं लेकिन पेन को लेकर ही एक दिलचस्प जानकारी आपके साथ साझा करने जा रहे हैं। दोस्तों पेन तो हम सभी इस्तेमाल करते हैं लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि पेन के ढक्कन के ऊपर अक्सर एक छेद बना होता है।

अब पेन चाहे BIC का बॉल प्वाइंट पेन हो या फिर रेनॉल्ड्स का, इन सभी पेनों की कैप में यह छोटा सा छेद होता है।

आज विज्ञान ने हर क्षेत्र में काफी तरक्की कर ली है, कई दिलचस्प चीजें हमारे सामने आ गई हैं और वक्त के साथ ही  हम और आगे की ओर ही बढ़ रह हैं।

ठीक इसी तरह पेन की कैप पर यह छेद बना होना एक तरह से नई अवधारणा है जिसपर हम लोगों ने कभी ध्यान नहीं दिया। आइये अपनी इस खबर में हम आपको पेन की कैप पर बने इस छिद्र के बारे में बताएं कि आखिर यह क्यों बना होता है?

बॉल पॉइंट पेन की कैप में क्यों बनाया जाता है यह छिद्र

आपको बता दें कि अगर कोई गलती से पेन की कैप को निगल लेता है, तो उससे होने वाली घुटन से बचने के लिए पेन कैप में यह छेद दिया जाता है।

लोग ज्यादातर पेन इस्तेमाल करते समय उसे अपने मुंह में डालते रहते हैं और  ऐसे में पेन के निगलने का डर बना रहता है। इसलिए निगलने के बाद उनको किसी तरह की गले में घुटन या कोई घातक परेशानी न हो इससे बचने के लिए पेन कैप में छिद्र किया जाता है।

इसके अलावा पेन की स्याही या इंक जल्दी से सूख सके इसलिए भी पेन की कैप में छिद्र बनाया जाता है, आपने गौर किया होगा जब आप लिखना शुरू करते है तो इंक को निब तक आने में टाइम लग जाता है वह इसी कारण होता है।

इसकी एक दूसरी वजह है, जब कोई पेन को खोलता है या बंद करता है, तो पेन में दबाव बराबर बना रहे इसलिए भी पेन में खासतौर से छेद बनाया जाता है।

साथ ही जान लें बॉल पॉइंट दिलचस्प इतिहास

बालपॉइंट पेन के इतिहास को 1880 के दशक में देखा जा सकता है, जब जॉन लॉड ने पहला पेटेंट बॉल पेन जारी किया गया था। उन्होंने दरअसल एक लेखन वस्तु बनाने की कोशिश की थी, जिससे वह चमड़े पर लिख सकते थे।

जिस पेन को उन्होंने बनाया था, उसके सॉकेट में टिप के तौर पर घूमती हुई  एक बॉल बनाई गई थी। इससे चमड़े पर लिखा जा सकता था जैसा कि जॉन चाहते थे। लेकिन इससे अक्षर सही तरीके से लिखने में काफी परेशानी आई और व्यावसायिक रूप से इसको अपनाने से इनकार कर दिया गया।

इस तरह फाउंटेन पेन का हुआ था अविष्कार

पहला और सबसे मशहूर फाउंटेन पेन को क्रॉस द्वारा आविष्कृत किया गया था, जिसे सभी पेनों का पिता कहा जाता है। बुधापेस्ट के रहने वाले लास्ज़लो जोज़ेफ बिरो (Laszlo Jozsef Biro) ने ऐसा बालपॉइंट पेन बनाया था जिसमें उन्होंने फाउंटेन पेन में जल्दी सूखने वाले अखबारी स्याही इस्तेमाल की थी।

लेकिन उनका यह प्रयोग कामयाब नहीं हो पाया क्योंकि यह स्याही बहुत मोटी थी जिसे निब की नोक तक आने में काफी समय लग रहा था। आखिर में उन्होंने एक ऐसे बालपॉइंट निब बनाया जिसमें स्याही की एक पतली फिल्म डाली गयी थी और जब निब कागज पर पड़ती है तो इसकी गेंद (ball of nib) घूमने लगती थी और कार्टेज से स्याही मिलते ही लिखावट कागज पर आती थी।


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