बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री के हाथों में लाल बैग में क्या होता है, जानिए

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बजट से जुड़े ऐसे तथ्य जो आपको आईएएस बना सकते हैं। किसी देश के विकास की रफ्तार का सही मूल्यांकन करने के लिए उस देश के वित्त बजट का अध्ययन करना सबसे सटीक तरीका समझा जाता है। देश किस तरफ जा रहा है, सरकार क्या सोचती है, आने वाले वक़्त में क्या संभावनाएं हैं ये सब वित्त बजट और पास किये गए बजट में से खर्च हुई असल रकम जानकार पता लगाया जा सकता है।

देश के वित्त बजट पर देश के हर नागरिक की नजर होती है, और हो भी क्यों न !  यही बजट रोजमर्रा की ज़िन्दगी में काम आने वाली हर चीज़ के भाव पर असर डालता है और आपकी जेब पर भी।

कहाँ से आया ‘बजट’ शब्द??

तो आइये बात करते हैं ऐसी ही कुछ रोचक जानकारियों के बारे में जो आपको आईएएस इंटरव्यू तक में भी पूछे जा सकते हैं। बजट से जुडी यह जानकारी आम तौर पर आपको आसानी से मिल जायेगी लेकिन बजट से जुडी कुछ और जानकारियां भी हैं जो बहुत काम लोग जानते हैं।

बजट किसे कहते हैं इस बारे में हम सब लोग जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘बजट’ शब्द कहाँ आया? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह शब्द हिंदी, उर्दू या देश की किसी भी और भाषा से नहीं लिया गया है। इस शब्द का संबंध है फ्रेंच भाषा से। बजट शब्द फ्रेंच भाषा के शब्द बोजेट से लिया गया है।

बजट के दौरान हर बार लाल सूटकेस ही क्यों ??

क्या आपने कभी नोटिस किया है कि देश की संसद में जब कभी भी बजट पेश किया जाता है तो वित्त मंत्री के हाथ में लाल रंग का ही सूटकेस क्यों होता है? ऐसा तो बिलकुल भी नहीं है कि देश के पास सूटकेस खरीदने का बजट नहीं है,

असल में ये प्रथा शुरू हुई थी 1733 में जब ब्रिटिश वित्तमंत्री रॉबर्ट वॉलपोल ने बजट पेश करने के दौरान देश के आर्थिक लेखे-जोखे से जुड़े कागजात एक चमड़े के थैले में लेकर आये थे।

प. नेहरू के वक़्त में भी हुआ था ऐसा

तब से ब्रिटिश सरकार में यह एक प्रथा बन गयी जो हमारे देश में भी ब्रिटिश राज के साथ ही आयी और यहीं की होकर रह गई। तब से लेकर अब तक देश के वित्तमंत्री तो बदलते रहे लेकिन बैग का रंग नहीं बदला।

1947 में जब हमारा देश आजाद हुआ तो नेहरु मंत्रीमंडल के पहले वित्त मंत्री आर.के. षणमुखम शेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को आजाद भारत का पहला बजट पेश किया था। उस वक्त देश का वित्त बजट महज 197 करोड़ का था।


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