भारत के पहले प्रधानमन्त्री बरकतुल्ला खान के बारे में कितना जानते हैं आप ? - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

भारत के पहले प्रधानमन्त्री बरकतुल्ला खान के बारे में कितना जानते हैं आप ?

देश के आजाद होने से पहले भी हिन्दुस्तान में अस्थायी सरकारों का गठन किया गया था

भारतवासियों से जब भी ये सवाल किया जाता है की देश के पहले प्रधानमंत्री कौन थे, तो जवाब मिलता है की स्वर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरू।

यूं तो ये जवाब सही है, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि हिंदुस्तान सरकार के पहले प्रधानमंत्री बरकतुल्ला खान थे।

जी हाँ, सही पढ़ा आपने। देश के सबसे पहले देश के आजाद होने से पहले भी हिन्दुस्तान में अस्थायी सरकारों का गठन किया गया था। इसी सरकार में हिन्दुस्तानी सरकार के प्रधानमंत्री बने बरकतुल्ला खान और राष्ट्र्रपति बने महेन्द्र प्रताप।

ये शख्स हुए थे पहली बार प्रधानमंत्री पद पर आसीन

 

7 जुलाई 1854 को मध्यप्रदेश के भोपाल में एक संपन्न खानदान में इनका जन्म हुआ था।

इतिहास से ऐसी जानकारी मिलती है कि इनके पिता मुंशी कुदरतुल्ला भोपाल रियासत में काम करते थे। बरकतुल्ला ने अपनी शुरूआती पढ़ाई भोपाल के ही सुलेमानिया स्कूल से ही हासिल की। यहाँ उन्हें अरबी और फारसी सिखाई गई। जब इनके माँ-बाप का इंतकाल हो गया तो इन्होने भोपाल छोड़ मुंबई की तरफ रुख कर लिया।

मुंबई पहुंचे बरकतुल्लाह खान को जीवन-यापन के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। यहाँ से फिर बाद में ये आगे की तालीम लेने इंग्लैंड चले गये।

अंग्रेज़ों से लिया लोहा, क्रांतिकारियों को दी तालीम

 

वहां उन्होंने द क्रिसेन्ट और पत्रिका द इस्लामिक वर्ल्ड के लिये बतौर सह संपादक काम किया। यहाँ उनकी मुलाकात उन क्रांतिकारियों से हुई जो भारत की स्वतंत्रता में विदेशो में रहकर योगदान दे रहे थे। यहाँ से उनके जीवन का लक्ष्य देश को अंग्रेजों के शासन से मुक्त कराना बन गया।

इसी संकल्प को साथ लेकर वह भारत वापिस लौट आये और उनकी मुलाकात राजा महेंद्र प्रताप से हुई जो उस दौर में भारत की स्वाधीनता की मशाल जलाए हुए थे।

इस आंदोलन को और मजबूती देने के लिए जापान चले गये और वहां क्रांतिकारियों को भारतीय भाषाओं की शिक्षा दी। जब अग्रेजों को इसकी भनक पड़ी तो उन्हें जापान छोड़ना पड़ा।

ग़दर पार्टी के फाउंडर मेंबर थे..

 

बरकतुल्ला ग़दर पार्टी के फाउंडर मेम्बर्स में से एक थे, इस पार्टी का उद्देश्य सशस्त्र क्रांति से आजादी हासिल करना था। इस पार्टी का स्लोगन तनख्वाह- मौत, इनाम – शहादत, पेंशन – देश की आजादी हुआ करता था। इन्होने ‘हिन्दुस्तानी गदर’ नाम के पेपर का संपादन कार्य भी किया।

काबुल में ली थी प्रधानमंत्री की शपथ…

 

बात 1915 की है जब बरकतुल्ला अपने मित्र राजा महेंद्र प्रताप के साथ अफगानिस्तान के काबुल में पहुंच गए। यहीं पर आकर उन्होंने भारत की अंतरिम सरकार का गठन किया और इसमें खुद प्रधानमंत्री बनेऔर राजा महेंद्र प्रताप सिंह को राष्ट्रपति बनाया।

इसके बाद बरकतुल्ला रूस चले गये जहाँ पर क्रेमलिन शहर में उनकी मुलाकात लेनिन से हुई। यहीं से उन्होंने 2 साल तक क्रांति को हवा दी।

Story Source: http://viralinindia.net/motivational/barkatullah-khan-first-pm/20969/

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