जानकारी – आखिर क्यों हिंदू धर्म में चिता जलाने के बाद मृत के सिर पर मारा जाता है डंडा…?

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आज तकनीक के इस दौर में हम इस कदर आगे निकल गए हैं, कि पीछे मुड़कर देखना थोड़ मुश्किल सा लगता है। वहीं जब बात आती है हमारी सामाजिक संस्कृति की तो अपने समाज को पहचानना संस्कृति के साथ चलना वाकई में एक गर्व की बात होती है।

वहीं जब बात करते हैं, सामाज व संस्कृति की हमारे हिंदू धर्म में ही ऐसी कई चीजें हैं जिनके बारे में लोगों को जानकारी कम होती है, लेकिन इनके बारे में जानना भी बहुत जरुरी होता है।.

 

हम यहा आपको ऐसी ही एक दिलचस्प बात के बारे में बातने जा रहे हैं।

हिंदू धर्म में मानी जाने वाली यह खास प्रथा

कहने को हिंदू धर्म में ऐसे कई रिवाज हैं जिन पर विज्ञान यकीन नहीं करता, लेकिन लोगों का इन पर काफी विश्वास होता है।

आज हिंदू धर्म में की सबसे खास मान्यताओं में से एक पर हम बात करने वाले हैं।

हिंदू धर्म में किसी शख्स की मौत के बाद अंतिम क्रिया के दौरान किया जाने वाला यह रिवाज, जिसका धर्म के अनुसार काफी महत्व होता है।

 

हिंदू धर्म में ऐसा रिवाज है कि शमशान घाट पर महिलाओं को नहीं जाने दिया जाता।

चाहे उस शख्स के साथ महिलाओं का कितना भी खास रिश्ता हो उसे अंतिम विदाई देने कोई भी महिला शमशान घाट तक नहीं जा सकती है।

लेकिन इसके बाद भी आज वक्त क्योंकि इतना बदल गया है कि, कुछ महिलाओं को शमशान घाट जाने दिया जाता है, जहां परिवार वालों को कोई आपत्ति नहीं होती है।

आखिर क्यों नहीं है महिलाओं को शमशान घाट जाने की इजाजत

इस बात का ही जवाब हम आपको बता रहे हैं, कि आखिर क्यों महिलाओं को शमशान घाट जाने की इजाजत नहीं है।

दरअसल कहा जाता है कि, महिलाओं का दिल पुरुषों के मुकाबले बेहद नाजुक होता है।

यदि शमशान घाट पर कोई महिला अंतिम संस्कार के वक्त रोने या डरने लग जाए तो मृतक की आत्मा को शांति नहीं मिल पाती।

ऐसा भी कहा जाता है कि, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है और महिलाओं का कोमल दिल यह सब देख नहीं पाता।

एक मान्यता यह भी है कि शमशान घाट पर आत्माओं का आना-जाना लगा रहता है और ये आत्माएं महिलाओं को अपना शिकार पहले बनाती हैं।

इसके साथ ही महिलाएं घर पर होती हैं ताकि वे बाहर से आने वाले पुरुष को हाथ पैर धुलवाकर उन्हें पवित्र कर सके।

जलती हुई लाश के सिर पर मारा जाता है डंडा

अंतिम संस्कार की एक प्रथा यह भी है कि अंतिम संस्कार के दौरान मरने वाले शख्स के बेटे को शव के सिर पर डंडे से मारने के लिए कहा जाता है।

ऐसा इसलिए होता है ताकि मरने वाले के पास यदि कोई तंत्र विद्या है तो कोई दूसरा तांत्रिक उसकी विद्या को चुराकर उसकी आत्मा को अपने वश में ना कर ले।

आत्मा को वश में कर उससे कोई भी किसी भी तरह का बुरा काम कराया जा सकता है।

सिर का मुंडन करवाना

हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के बाद चिता पर आग देने वाले को खासतौर से अपना सिर मुंडवाना होता है।

सिर मुंडवाने की प्रथा घर के सभी पुरुषों के लिए जरुरी होती है।

हालांकि महिलाओं के लिए ऐसा कोई नियम-कानून नहीं है इसलिए उन्हें अंतिम क्रिया की प्रक्रिया से भी दूर रखा जाता है।

शव को शमशान ले जाते समय क्यों लिया जाता है ये नाम

हिंदू धर्म में भगवान राम को बहुत माना जाता है। कहते हैं कि अगर किसी ने भगवान राम के नाम का 3 बार जप कर लिया तो यह अन्य किसी भगवान के 1000 बार नाम जपने के बराबर होता है।

इसलिए अक्सर आपने देखा होगा कि शव ले जाते समय लोग ‘राम नाम सत्य है’ कहते हुए जाते हैं।

इस मतलब होता है कि ‘सत्य भगवान राम का नाम है। यहां राम ब्रम्हात्म यानी कि सर्वोच्च शक्ति की अभिव्यक्ति करने के लिए निकलता है।

इस दौरान मृतक के शरीर का कोई अस्तित्व नहीं रहता। आत्मा अपना सब कुछ त्याग कर भगवान के शरण में चली जाती है और यही अंतिम सत्य है।


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