भारत की प्रमुख ख़ुफ़िया एजेंसियों CID और CBI में क्या अंतर होता है? - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

भारत की प्रमुख ख़ुफ़िया एजेंसियों CID और CBI में क्या अंतर होता है?

अक्सर हम फिल्मों या टीवी शो में देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों के बारे में पढ़ते रहते हैं. जिनमे आमतौर पर सबसे ज्यादा चर्चा CID या CBI की होती है.

भारत की प्रमुख ख़ुफ़िया एजेंसी है CID और CBI 

जानकारी के लिए बता दें कि CID और CBI सामान्य तौर पर दो अलग-अलग जांच एजेंसियां होती है.

जिनकी जाँच का क्षेत्र भी एक दुसरे से अलग-अलग होता है.

जहाँ CID एक प्रदेश के अन्दर घटित होने वाली घटनाओं की पूर्ण जाँच करती है और ये केवल राज्य सरकार के आदेश पर ही काम करती है.

तो वहीं पूरे देश में होने वाली विभिन्न घटनाओं की जाँच का जिम्मा CBI के हिस्से में आता है. इसको आदेश देने का अधिकार केवल केंद्र सरकार, उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के पास ही होता है.

दोनों का काम करने का तरीका होता हैं बेहद अलग

ऐसे में अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर जब दोनों ही एजेंसियां जाच करती हैं तो ऐसे में CID और CBI में क्या अंतर होता है.

तो आइये विस्तार में जानते हैं CID और CBI के अंतर के बारे में वो मुख्य बाते जो आपको जानना बेहद जरुरी है.

क्या होती है CID (Crime Investigation Department)..?

बता दें कि CID जिसका फुल फॉर्म Crime Investigation Department होता है, ये किसी भी प्रदेश में अपराध जांच विभाग के रूप में जानी जाती है.

CID का काम एक प्रदेश में पुलिस की जांच और खुफिया विभाग की जांच करना होता है.

इस विभाग को ज्यादातर हत्या, दंगा, अपहरण, चोरी इत्यादि की जाँच के ही काम सौंपे जाते हैं.

इतिहास को उठाकर देखे तो इस संगठन की स्थापना, पुलिस आयोग की सिफारिश पर ब्रिटिश सरकार ने सन 1902 में की थी.

राज्य सरकार और राज्य के उच्च न्यायलय के आदेश पर काम करती है CID

जिसमें केवल पुलिस कर्मचारियों को शामिल किया जाता है, लेकिन नियुक्ति से पहले उन्हें कई तरह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है.

इसके साथ ही इस संस्था को जाँच का जिम्मा सम्बंधित राज्य सरकार और कभी-कभी उस राज्य के उच्च न्यायलय द्वारा सौंपा जाता है.

CBI (Central Bureau of Investigation) क्या है?

CBI जिसे हम केंद्रीय जांच ब्यूरो कहते है, जो भारत में केंद्र सरकार की एक मुख्य एजेंसी है.

ये एजेंसी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले अपराधों जैसे हत्या, घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों और राष्ट्रीय हितों से संबंधित अपराधों के मामलों में भारत सरकार की तरफ से जाँच करती है.

बता दें कि साल 1941 में स्थापित हुई इस एजेंसी को अप्रैल 1963 में “केंद्रीय जांच ब्यूरो” का नाम दिया गया था, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है.

दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम, 1946 ने CBI को प्रमुखतः जांच की शक्तियां दी हैं.

केंद्र सरकार, हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर काम करती हैं CBI

भारत सरकार राज्य सरकार की सहमति के बाद राज्य के मामलों की जांच का आदेश CBI को देती है.

हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय राज्य सरकार की सहमति के बिना देश के किसी भी राज्य में हो रहे अपराधिक मामले की जांच के लिए CBI को आदेश दे सकते हैं.

CID  और CBI के बीच प्रमुख अंतर 

1.  CID  के ऑपरेशन का क्षेत्र छोटा (केवल एक प्रदेश) है, जबकि CBI के ऑपरेशन का क्षेत्र बड़ा (पूरा देश और विदेश) है.

2.  जहाँ CID के पास जो भी मामले आते हैं उन्हें राज्य सरकार और हाई कोर्ट द्वारा ही सौंपा जाता है तो वहीं CBI को मामले केन्द्र सरकार, हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायलय द्वारा सौंपे जाते हैं.

3. CID राज्यों में होने वाले आपराधिक मामलों जैसे दंगा, हत्या, अपहरण, चोरी और हमले के मामलों सहित राज्य में अन्य आपराधिक मामलों की जांच करता है जबकि CBI राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के घोटालों, धोखाधड़ी, हत्या, संस्थागत घोटालों, जैसे मामलों की देश और विदेश में जांच करती है.

4. यदि किसी व्यक्ति को CID में शामिल होना है तो उसे राज्य सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली पुलिस परीक्षा पास करने के बाद अपराध-विज्ञान की परीक्षा पास करनी होती है जबकि CBI  में शामिल होने के लिए SSC बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा को पास करना होगा.

5. CID  की स्थापना ब्रिटिश सरकार द्वारा 1902 में की गयी थी जबकि CBI  की स्थापना 1941 में विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के रूप में की गयी थी.

निष्कर्ष

 

इन जानकारी को पाकर अब हम उम्मीद करते हैं कि सभी लोगों को CBI और CID के कार्यों और इनके कार्य क्षेत्रों के बारे में सारी दुविधा दूर हो गई होगी.

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