पढ़िए आखिर क्यों अटल ने कहा-“आज जिंदा हूँ सिर्फ बेटे राजीव की वजह से”

आज देश में जिस प्रकार का राजनीतिक माहौल बनता जा रहा है, वो निराशा की ओर ले जाने वाला है. एक दल विशेष के लोग विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को देशद्रोही करार देने पर तुले हुए है. सत्ताधारी दल ने तो बाकायदा इसके लिए एक अलग से डिपार्टमेंट बना रखा है.

जहां से विरोधी दलों के नेताओं के खिलाफ दुष्प्रचार किया जाता है, लेकिन आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि आज से दो दशक पूर्व राजनीति में ऐसा माहौल भी हुआ करता था जिसमें देश के प्रधानमंत्री ने प्रतिपक्ष के नेता को बेहतर इलाज हेतू विदेश तक भेजा था और साथ गई प्रधानमंत्री कार्यालय की टीम के अधिकारियों को वाजपेयी का खास ख्याल रखने की हिदायत दी गई थी.

1. संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधिमंडल के साथ किया था रवाना


बात 1991 की है. अटल बिहारी वाजपेयी किडनी की बीमारी से ग्रसित थें. भारत में यह बीमारी एक तरह से लाइलाज हुआ करती थी. किसी भी बड़े अस्पताल में इसका समुचित इलाज नहीं था. डॉक्टरों की राय थी कि इसका इलाज अमेरिका के किसी अस्पताल में हो. बीमारी गंभीर रुप धारण करती जा रही थी. वाजपेयी चिंतित थें. किसी तरह यह बात पता तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को पता चल गई.

2. वाजपेयी को बुलाया दफ्तर में


अचानक एक दिन राजीव गांधी ने वाजपेयी को अपने ऑफिस में बुलाया. राजीव गांधी वाजपेयी हो या कोई भी विरोधी दल का नेता, सबका बेहद सम्मान करते थें. वाजपेयी दफ्तर पहुंचें तो राजीव ने उनका अभिवादन किया और कहा कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र संघ का कार्यक्रम है. उसमें भारत से प्रतिनिधिमंडल को शामिल होना है. मेरा आग्रह है कि आप भी उस कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनें.

3. वहां जाकर आप अपनी बीमारी को दूर कराइए


जब वाजपेयी ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल में जाने की बात स्वीकार कर ली तो राजीव गांधी ने तपाक से कहा कि मुझे उम्मीद है कि आप इस अमेरिका यात्रा का लाभ उठाएंगें और किसी अच्छे से अस्पताल में अपनी किडनी का इलाज करा लेंगें. वाजपेयी हतप्रभ थें. वह यह जानकर हैरत में पड़ गए कि राजीव को उनकी बीमारी की भनक कैसे लग गई ? वाजपेयी ने ऐसा हीं किया. कार्यक्रम पूरा होने के बाद उन्होंने वहां अपनी बीमारी का इलाज कराया.

4. राजीव ने किसी को नहीं बताई बात


राजीव गांधी की हत्या के बाद विदेशी पत्रकारों से चर्चा करते हुए वाजपेयी ने इस प्रसंग को सार्वजनिक किया और कहा कि आज अगर मैं जिंदा हूं तो राजीव गांधी की वजह से. उन्होंने मुझे गंभीर बीमारी से मुक्ति दिलाई और कभी किसी से इसका जिक्र भी नहीं किया. मैंने भी यह बात अब तक छिपा कर रखी थी लेकिन आज अंतरात्मा कह रही है कि उस महान व्यक्तित्व की महानता की चर्चा को सार्वजनिक कर दूं.

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े

Close