सोनिया गांधी: वो नेता जिसका बिना लाइम लाइट मैं रहे भी इक्का चलता है, पढ़िए

By:- Viral in India Team on

सोनिया गाँधी जो लम्बे समय से राजनीतिक हलचलों से दूरी बनायीं हुई थी हाल ही में राष्ट्रपति चुनावो के दौरान सक्रीय नज़र आई जिससे एक बार पुराना दौर याद गया जब ममता बनर्जी, मणि शंकर अय्यर, माधवराव सिंधिया, एस बंगरप्पा, सुरेश कलमाडी, असलम शेर ख़ान, दिलीप सिंह भूरिया और बड़ी संख्या में अन्य कांग्रेसियों ने पार्टी छोड़ दी थी तब सोनिया ने विधिवत राजनीति में प्रवेश लिया और उन्होंने अर्जुन सिंह धड़ा, माधवराव सिंधिया और बाकी पार्टी के बीच एकता स्थापित करने में बहुत धैर्य से काम लिया था l उस समय कांग्रेस सिर्फ़ चार राज्यों में शासन में रह गई थी l सोनिया गांधी इस वक़्त वो शक्सियत है जिसे भारतीय राजनीती अपने से अलग नहीं होने देना चाहती l

जब त्यागना पड़ा सोनिया गाँधी को भारतीय राजनीती से संन्यास लेने का ख्याल

साल 2016 से ही सोनिया गाँधी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से कहती रही हैं कि वो सक्रिय राजनीति से संन्यास लेना चाहती हैं, खासकर जब वो नौ दिसम्बर 2016 को 70 साल की हुई थीं l लेकिन हाल ही के घटना कर्मो जैसे नितीश का बीजेपी के साथ हाथ मिलाना और अन्य पार्टियों का अपने में ही उलझ के रह जाना ने सोनिया गाँधी को एक बार फिर से इसमें एक्टिव कर दिया है l

मोदी लहर पर सोनिया गांधी की पैनी नजर

ऐसा नहीं है की सोनिया राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ही एकजुटता की कमान सँभालते नज़र आई बल्कि परदे के पीछे से ही वो मोदी लहर पर अपनी पैनी नज़र रखे हुई थी l जिसका उदहारण कई दफे नज़र आया l संसद भवन में सोनिया द्वारा आयोजित लंच बैठक एनडीए के खिलाफ सभी राजनीतिक दलों को एकजुट करने के लिए थी l सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी में कई संगठनात्मक परिवर्तन किए हैं और कई बड़े फैसले भी खुद लिए हैं l उसके बाद एक बैठक उहोने करुणानिधि के जन्मदिन पर भी विपक्षियो की बैठक बुलाई थी l

सोनिया गाँधी जो एक बार फिर सकंटमोचन के तौर पर उभरी

सोनिया गाँधी को अगर इस वक़्त विपक्ष का सबसे बड़ा सकंटमोचन कहा जाये तो गलत नहीं होगा क्योंकि एक वही है जो अपनी सूझ बूझ से विपक्ष को साथ लेकर चल सकती है l बीते एक साल से बतौर कांग्रेस उपाध्यक्ष पार्टी का पूरा कामकाज देखते रहे राहुल गांधी राष्ट्रपति चुनाव में दूसरे विपक्षी नेताओं से सोनिया के शुरू हुए संवाद के सिलसिले में फिलहाल सहयोगी की भूमिका में ही दिखाई दे रहे हैं।  राजद सुप्रीमो के सोनिया गांधी से उन्हें राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा का निमंत्रण मिलने के बयान से साफ है कि लगातार चुनावी हारों से पार्टी के बढ़ते संकट की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने फिर से अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है।

स्वास्थ्य वजहों से सोनिया पिछले साल अगस्त से ही राजनीतिक सक्रियता से दूरी बना रहीं थी। वाराणसी में रोड शो के दौरान गंभीर हुई बीमारी के बाद सोनिया ने कांग्रेस का संचालन लगभग छोड़ दिया था और राहुल पार्टी की कमान संभालने के साथ-साथ दूसरे विपक्षी नेताओं से अहम मसलों पर संवाद को वे ही आगे बढ़ा रहे थे।

नोटबंदी के दौर में जब कांग्रेस कार्यसमिति ने प्रस्ताव पारित कर सोनिया को राजनीति में आने का आग्रह किया

नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी गोलबंदी में ममता बनर्जी से लेकर वामपंथी दलों को एक मंच पर लाने की सियासत में भी राहुल मुखर रहे थे। यहां तक की कांग्रेस कार्यसमिति ने प्रस्ताव पारित कर नवंबर में सोनिया से राहुल को पार्टी अध्यक्ष पद सौंपने का आग्रह तक कर दिया। पार्टी को उम्मीद है कि सोनिया के राजनीतिक कद की वजह से विपक्षी एकजुटता एक ओर जहां अधिक धारदार दिखेगी। वहीं दूसरी ओर लगातार हार के मनोबल से झुके कांग्रेसियों को इससे उम्मीदों की नई ऊर्जा मिलेगी। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सोनिया की दूसरे विपक्षी नेताओं से शुरू हुई चर्चा के बावजूद सरकार से इस मसले पर संवाद का रास्ता अभी खुला रखा गया है। विपक्षी नेताओं से भी कांग्रेस नेतृत्व की इस पर चर्चा हुई है।

सोनिया गाँधी जी की उम्र आज 70 हो चुकी है, वो चाहती तोह आराम से अपनी ज़िन्दगी जी सकती थी बिना राजनीत मैं दखल दिए, लेकिन वो आज भी लगी है, ये दर्शाता है की वो देश से कितना प्यार करती है |

--- ये खबर वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गयी है वायरल इन इंडिया न्यूज़ पोर्टल के लिए

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