30 साल पुराने मामले में कोर्ट नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर सुनाने जा रहा है फैसला

शेयर करें

बीजेपी से हमेशा पद की उम्मीद में लगे रहने के बाद कांग्रेस पार्टी से उपमुख्यमंत्री पद मिलने से ये नेता अभी पूरी तरह अपनी ख़ुशी का जश्न मना भी नहीं पाया था कि उसे सुप्रीमकोर्ट से अचानक एक मिल सकता है.

नवजोत सिंह सिद्धू के 30 साल पुराने रोड रेज केस की सुनवाई सुप्रीमकोर्ट में शुरू 

जी हाँ हम बात कर रहे हैं कांग्रेस नेता और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की जिनकी मुश्किलें इन दिनों खासी बढ़ती हुई नजर आ रही हैं.

बता दें कि उनके खिलाफ लगभग 30 साल पुराने रोड रेज केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब ऐसे वक्त पर सुनवाई शुरू हो गई है, जिस वक्त वो अभी अपने इस पद का आनंद पूरी तरह उठा भी नहीं पाए थे.

इतना ही नहीं अनुमान तो ये भी लगाया जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का कोई नतीजा उनके खिलाफ सामने भी आ सकता है.

करीब 30 साल पुराना है मामला 

गौरतलब है कि, सिद्धू का रोड रेज मामला अभी का नहीं बल्कि करीब 30 साल पुराना है.

जिसमें अपना फैसला सुनाते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दिसंबर 2006 को उन्हें और उनके दोस्त को दोषी ठहराया था, लेकिन सिद्धू के हाईकोर्ट के फैसले से सहमत नहीं होने के चलते उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.

उस वक्त सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के बाद ही उनकी सजा पर रोक लगा दी गई थी.

लेकिन अब उसी मामले में सुप्रीमकोर्ट में जस्टिस जे चेल्मेश्वर और संजय कौल की एक पीठ ने सिद्धू के इस केस पर सुनवाई शुरू कर दी है.

जानिए आखिर क्या है पूरा मामला..?

दरअसल,  27 दिसंबर 1988 को नवजोत सिंह सिद्धू और गुरनाम सिंह नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति के बीच पंजाब में कार पार्किंग को लेकर कहासुनी हुई जो धीरे-धीरे मारपीट में तब्दील हो गई थी.

इस मारपीट में बुजूर्ग गुरनाम सिंह को कई गंभीर चोट आई थी.

उस दौरान मौके पर मौजूद गुरनाम सिंह के भांजे और चश्मदीद ने बताया कि..

“सिद्धू ने गुरनाम को मारकर सड़क पर गिरा दिया. इसके तुरंत बाद ही गुरनाम को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इससे पहले ही वो दम तोड़ चुके थे. जिस समय यह घटना हुई उस वक्त वहां सिद्धू के साथ उनके एक दोस्त रुपिंदर सिंह सिंधू भी मौजूद थे.”

हाईकोर्ट ने सिद्धू को ठहराया दोषी

बुजुर्ग की कथित तौर पर मारपीट के बाद मौत हो जाने से उस समय दोनों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ, लेकिन साल 1999 में सेशन कोर्ट ने सिद्धू का केस खत्म करते हुए उन्हें राहत दी.

मामले पर कोर्ट का कहना था कि..

“आरोपी के खिलाफ पक्के सबूत नहीं हैं और सिर्फ शक के आधार पर केस नहीं चलाया जा सकता.”

जिसके बाद करीब तीन साल बाद साल 2002 में राज्य सरकार ने एक बार फिर सिद्धू के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की.

जिसकी सुनवाई करते हुए दिसंबर 2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू और उनके दोस्त को दोषी करार देते हुए दोनों को 3-3 साल की सजा सुनाते हुए उनपर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया.

हाईकोर्ट के फैसले को नवजोत ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

हाईकोर्ट में दोषी करार किये जाने के बाद सिद्धू ने फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की.

जिसके तुरंत बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू की सजा पर रोक लगा दी.

और अब इसी 30 साल पुराने मामले में सुनवाई शुरू हो गई है.

जिसकों लेकर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है.

निष्कर्ष

नवजोत सिंह के वकील की ओर से शुरुआत से ये दलीले दी गई है कि मृतक व्यक्ति बुजुर्ग था जिसे नाजुक सी चोट लगने से ये दुर्घटना हुई, जो गैर-इरादतन थी. ऐसे में अब कांग्रेस और नवजोत यही उमीद कर रहे हैं कि सुप्रीमकोर्ट की ओर से फ़ैसला कुछ राहत देने वाला ही हो.


शेयर करें

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े