ये है असली विकास, कमलनाथ के ‘विकास मॉडल’ ने बदल दी, छिन्दवाड़ा की बदहाल तस्वीर

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मध्य प्रदेश की छिन्दवाड़ा एक ऐसी लोकसभा सीट है जहाँ से लगभग हर चुनाव कांग्रेस पार्टी ही जीती है. यहाँ से अब तक सिर्फ़ एक बार कांग्रेस हारी है वो भी मुख्य चुनाव नहीं बल्कि आम चुनाव थे. आम चुनाव में जब कांग्रेस ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया था तब कांग्रेस यहाँ से 1997 में हार गयी थी. छिंदवाडा लोकसभा सीट एक ऐसी लोकसभा सीट है जहाँ से भाजपा “राम लहर” में भी नहीं जीती और “मोदी लहर” में भी उसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा.

1.  कमलनाथ के आगे नहीं टिकता बीजेपी का कोई नेता

असल में ये सीट क़द्दावर कांग्रेस नेता कमल नाथ की सीट है. यहाँ से वो 9 बार सांसद चुने गए हैं जबकि एक बार उनकी पत्नी यहाँ से सांसद चुनी गयी हैं. उनकी ये सीट ऐसी है जहाँ से वो हमेशा भारी अंतर से चुनाव जीतते हैं. ये एक ऐसी सीट है जहाँ से भाजपा का कोई नेता चुनाव नहीं लड़ना चाहता क्योंकि उन्हें मालूम है कि कमल नाथ के आगे उनका जीतना मुमकिन नहीं है.

2. छिंदवाड़ा के सुपरस्टार हैं कमल नाथ

 

मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से एक छिंदवाड़ा में यूँ तो कई नेता हैं लेकिन कमल नाथ ही यहाँ के ऐसे नेता हैं जिसका हर तबके में बोलबाला है. कमल नाथ की छवि साफ़ सुथरी है और उन्होंने क्षेत्र का हमेशा ही विशेष ध्यान रखा है. आपको बता दें कि 1997 में कमल नाथ चुनाव हार गए थे

लेकिन ये भी सत्य है कि इस उपचुनाव में कमल नाथ ने कोई विशेष प्रचार नहीं किया था. कमल नाथ ने इस हार का बदला अगले ही साल ले लिया जब 1998 में दोबारा चुनाव हुए.

3. छिंदवाड़ा में किया विकास

छिंदवाडा सीट जीतने के लिए भाजपा ने कई बार बड़ी बड़ी रणनीति बनायी हैं लेकिन सभी योजनायें फ़ेल ही हुई हैं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कोशिश में हैं कि 2019 में इस सीट को जीत पायें लेकिन ऐसा लगता नहीं कि यहाँ भाजपा की कोई रणनीति चलने वाली है. 1977 में जब आपातकाल के बाद चुनाव हुए और कांग्रेस विरोधी लहर चली तब भी यहाँ से कांग्रेस ही जीती. कांग्रेस के क़द्दावर नेता गार्गी प्रसाद मिश्रा ने जनता पार्टी के उमीदवार को हरा दिया था.

4. इतने सालों में मजबूत हो चुका है गढ़

कुल मिलाकर कांग्रेस फिलहाल यहाँ इतनी मज़बूत है कि यहाँ से भाजपा को जीतने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी. दूसरी तरफ़ छिंदवाड़ा कमल नाथ का अब इतना मज़बूत गढ़ हो गया है कि भाजपा का कोई भी नेता यहाँ चुनाव में नहीं उतरना चाहता क्योंकि उसे पता है कि यहाँ से हार तय है.

 मूल रूप से छिंदवाड़ा एक आदिवासी इलाका माना जाता है. कमलनाथ ने यहां लोगों को रोजगार दिया और आदिवासियों के उत्थान के लिए कई काम किए हैं.

5.  बीजेपी के सामने खड़ा किया छिंदवाड़ा मॉडल

राजनीति के अलावा कमलनाथ को बिजनेस टायकून भी कहा जाता है, वो 23 कंपनियों के मालिक हैं, जो उनके दोनों बेटे चलाते हैं। कमलनाथ जनकल्याण कार्यों के लिए जाने जाते हैं. कमलनाथ के छिंदवाड़ा के लिए किए गए कामों के चलते आज छिंदवाड़ा मॉडल की बातें हर तरफ हो रही है.

इसमें कमलनाथ ने जनता को भरपूर नौकरी, कम मंहगाई, ज़्यादा कमाई, तीव्र गति से अर्थव्यवस्था का विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, दुरुस्त सुरक्षा और बेहतरीन जीवन प्रदान किया है.


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