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11 जून को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ओबीसी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने बीजेपी पर खूब हमला बोला। उन्होंने कहा की भारत में छोटे रोजगारों के लिए बैंकों के दरवाजे बंद हैं, जबकि विदेशों में छोटे-छोटे रोज़गारों को काफी महत्व दिया जाता है। इस दौरान राहुल गांधी ने दुनिया भर में बहु-प्रसिद्ध कोका-कोला और मक्डोनल्ड का उदारहण दिया।

राहुल गांधी ने सोमवार को यहां दावा किया कि कोका कोला कंपनी का मालिक पहले शिकंजी बेचता था। वहीं, मैकडोनाल्ड की चेन शुरू करने वाला शख्स ढाबा चलाता था। राहुल गाँधी ने दावा किया की कोका-कोला कंपनी का मालिक पहले पानी में चीनी मिलाकर शिकंजी बेचता था, उसके स्किल की पहचान हुई, जिसके बाद उसे बैंक से लोन मिला और उसने कोका-कोला कंपनी बनाई।

सही तथ्यों के साथ काम करते हैं राहुल गाँधी

अपने इस बयान के बाद राहुल सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे। ट्रोल करने वालों ने #AccordingToRahulGandhi के साथ ढेर सारी फोटो और स्टेटस शेयर किए हैं. #AccordingToRahulGandhi काफी देर से ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।

 

लेकिन राहुल गाँधी को ट्रोल करने वालों को ये खबर मंहतोड़ जवाब देने वाली है। आपको बता दें की राहुल गांधी, बीजेपी के नेताओं जैसे बेतुके और बिना सर-पैर के बयान देने से दूर रहते हैं।

वह जब भी अपने भाषणों में कोई बात कहते हैं तो उसका कोई ख़ास महत्व होता है। राहुल गाँधी उन नेताओं में शुमार हैं जो रिसर्च किये बिना अपने भाषण में कुछ नहीं कहते हैं।

कोका-कोला का मालिक सच में बेचता था शिकंजी

राहुल को ट्रोल करने वाले सोशल मीडिया यूज़र्स को बता दें की उन्होंने अपने बयान में कुछ गलत नहीं कहा है इसका सबूत मिल चुका है।
जी हाँ, कोका-कोला का मालिक इससे पहले शिकंजी बेचा करता था।

दरअसल फार्मिस्ट जॉन पेम्बर्टन, जिसने कोका-कोला का आविष्कार किया था, वह अमेरिका के ग्रह युद्ध के दौरान आर्मी में था, जहाँ उसे वॉर के दौरान काफी चोटें आई थी।

मिल चुके हैं इसके सबूत

पेम्बर्टन, अपने दर्द से छुटकारा पाने के लिए नशे का सहारा लेने लगा। लेकिन धीरे-धीरे वह अफीम का आदी बन गया। अफीम मंहगी होने की वजह से उसने अफीम का विकल्प ढूंढ़ना शुरू कर दिया। पेम्बर्टन को इस सब की जानकारी इस तरह थी की उसने आर्मी से पहले फार्मेसी का कोर्स किया हुआ था। लेकिन उसे अफीम का कोई विकल्प नहीं मिला। जिसके बाद वह 1870 में अटलांटा जाने की सोची।जहाँ अपर उनकी मुलाकात एक अमेरिकन से हुई, उनका नाम था फ्रैंक रॉबिनसन।

शिकंजी पीने आये करते थे सोशल मुद्दों पर बातें

इन्होने मिलकर एक कंपनी बनाई, जिसका नाम था पेम्बर्टन केमिकल कंपनी। जहाँ पर उन्होंने अपने अविष्कार करने की कोशिशें की। लेकिन इसमें असफल रहे। जिसके बाद उन्होंने सोडा फाउंटेन का काम शुरू किया और इसमें लेमोनेड, चॉक्लेट और स्ट्रॉबेरी के साथ अन्य फ्लेवर के ड्रिंक बेचने का काम शुरू कर दिया।

सोडा पीने आये लोग यहाँ पर सामाजिक मुद्दों अपर भी बातचीत करते थे। लेकिन साल 1885 में उन्होंने एक नई तरह की ड्रिंक खोजने का काम शुरू कर दिया। जिसे बाद में कोका-कोला का नाम दिया गया।

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