बेंगलुरु चुनाव के परिणाम घोषित, बीजेपी मैदान छोड़ कर भागी

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देश के जाने माने बेगलुरु नगर निगम चुनाव में पार्षदों की ज्यादा संख्या होने के बावजूद भाजपा मेयर के चुनाव से ठीक पहले मैदान छोड़ कर भाग गई और मेयर पद पर कांग्रेस के प्रत्याशी की एकतरफा जीत हो गई.

बताते चलें कि बेगलुरु नगर निगम कर्नाटक का बेहद अहम माना जाता है. आर्थिक तौर पर बेगलुरु नगर निगम राज्य को काफी राजस्व देता रहा है.

 

1. बीजेपी ने भरी थी हुंकार


मेयर पद के लिए मतदान से पहले बीजेपी ने हुंकार भरते हुए जीत का लगातार दावा कर रही थी लेकिन मतदान के दिन बीजेपी मैदान छोड़ कर भाग गई और कांग्रेस को एकतरफा जीत हासिल हो गई जबकि बीजेपी के पास सबसे ज्यादा निगम पार्षद हैं. बीजेपी की ओर से मेयर पद की उम्मीदवार शोभा अंजनप्पा को एक भी वोट नहीं मिला.

2. 152 वोटों से जीत गई कांग्रेस

बीजेपी की ओर से जहां शोभा अंजनप्पा मेयर उम्मीदवार थीं तो जबकि कांग्रेस की ओर से गंगाबिके मल्लिकार्जुन उम्मीदवार थीं. कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर उन्हें जेडीएस के पार्षदों के भी वोट मिल गए और 152 वोटों से वो बेगलुरु की 52वें मेयर के तौर पर निर्वाचित हुई हैं.

बताते चलें कि बीजेपी को यहां लगातार दूसरी बार ऐसी हीं शर्मनाक हार का सामना करना पड़ रहा है. वहीं जेडीएस की पार्षद रमीला उमाशंकर को कांग्रेसी पार्षदों का वोट मिला और डिप्टी मेयर के तौर पर निर्वाचित हो गईं.

3. किसे मिले कितने वोट

बेंगलुरु नगर निगम में कुल 198 सीटें हैं. इनमें सें 100 सीटों पर भाजपा का कब्जा है. जबकि कांग्रेस के पास 75 और जेडीएस के पास 15 सीटें हैं. बात करें निर्दल पार्षदों की तो इनकी संख्या 08 है.

बीजेपी के कई पार्षदों ने भी ऐन मौके पर पाला बदलते हुए कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर दिया, जिसकी वजह से भाजपा ने बौखलाहट में कांग्रेस पर खरीद बिक्री का आरोप लगाते हुए मतदान से वॉक आउट किया.

4. शून्य पर आउट हो सकती है भाजपा

जिस तरह से कर्नाटक में कांग्रेस को जेडीएस का साथ मिला है, उससे भाजपा सकते में हैं.

भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि अगर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और जेडीएस साथ मिल कर लड़ते हैं तो बीजेपी को लेने के देने पड़ सकते हैं. ऐसा भी सभव है कि किसी भी सीट पर भाजपा का खाता भी नहीं खुले.

निष्कर्ष :

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कर्नाटक में भाजपा को यह तीसरा झटका मिला है. यह जहां भाजपा की चिंता बढ़ाने वाली है तो वहीं कांग्रेस के लिए सुखद है.


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