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जैसा कि गुजरात चुनावों का परिणाम आ चुका है और यहाँ पर कांग्रेस की हार के साथ ही भाजपा सरकार बनाने में सफल हुई है लेकिन अगर हम इस चुनाव का आंकलन पिछले 2012 में हुए गुजरात के विधानसभा के चुनावों से करें तो हम देखते हैं कि पिछली बार की अपेक्षा इस बार कांग्रेस ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है |

पिछली बार यहाँ पर कांग्रेस को 57 सीटें मिली थीं जो इस बार बढ़ी हैं | इस बार पिछली बार की अपेक्षा सीटों में दो दर्जन से अधिक की बढ़ोत्तरी देखी गयी है |

हालाँकि इतने सब के बावजूद सरकार बनाने के सपना जो 22 साल बाद कांग्रेस को पूरा होते हुए दिख रहा था वो पूरा नहीं हो सका लेकिन जब हम गुजरात चुनाव की सरसरी नजर में व्याख्या करते हैं तो देखते हैं कि हार के बाद भी कांग्रेस को फायदा हुआ है और उसे क्या फायदे हुए हैं वो हम आपको आगे विस्तार से बताते हैं |

राहुल गाँधी का नया और अच्छा रूप सामने

इस चुनाव में राहुल गाँधी बहुत ज्यादा सक्रीय दिखे और ये सक्रीय दिखना काम भी किया | भले ही कांग्रेस हार गयी हो लेकिन जहाँ जहाँ पर राहुल ने रैलियां की वहां वहां पर लोग उन्हें सुनने के लिए भारी संख्या में उपस्तिथ हुए और ऐसा पहली बार ही हुआ कि सोशल मीडिया में भी राहुल के समर्थन में इतना अच्छा और गजब का माहौल बनते हुए दिखा |

जैसा कि वो अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं तो उनका नेतृत्व भी सुधरा हुआ लग रहा है और उनकी राजनीती बहुत ही परिपक्व लग रही है जो चमत्कारिक बदलाव राहुल के अंदर दिखाती है | यहाँ गुजरात चुनाव के लिए घोषणा पत्र बनाना हो या हार्दिक,अल्पेश जैसे नेताओ से समर्थन का मामला हो सब में राहुल गाँधी एक प्रभावी नेतृत्व के रूप में सामने आये हैं |

गुजरात चुनाव ने राहुल की स्टीरियोटाइप छवि को खत्म करके एक प्रभावी नेता बनाया है | राहुल की जो सकारात्मक ऊर्जा गुजरात चुनाव में दिखी वो दिखाती है कि उन्हें प्रेसिडेंट बानाने का निर्णय एकदम सही था |

दूसरों की एहमियत का मिला सबक

जैसा की कांग्रेस के बारे में एक टैबू ये भी है कि ये अकेले चलने में विश्वास करती है और इसे भाजपा के जैसा गठबंधन चलाना नहीं आता है और कुछ समय अगर पीछे नजर डालें तो हम देखते हैं कि कितने ही कांग्रेस के करीबी और अच्छे लोग पार्टी छोडकर भाजपा में गये हैं | इसमें रामविलास पासवान और नीतीश की पार्टी का कांग्रेस का साथ छोड़ना बहुत नुकसान रहा |

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने इस गुजरात चुनाव के लिए अपेक्षाकृत कम ताकतवर माने जाने वाले राजनीतिक दलों को साथ में लिया हार्दिक पटेल से मिलकर उनके लोगों को टिकिट दिया गया और वहीँ अल्पेश ठाकुर जो चुनाव लडवाया गया और जैसा कि जिग्नेश निर्दलीय लड़ना चाहते थे तो वहां कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा |

और भी लोगों को साथ रखते हुए कांग्रेस ने समझौता करते हुए साथ चलने की नीति को एक नया आयाम दिया | इस लचीलेपन ने कांग्रेस को बहुत फायदा दिया है |

कार्यकर्ताओ का मनोबल भी बढ़ा और उत्साह दिखा

जैसा कि कांग्रेस का प्रदर्शन जिस प्रकार सुधरा है उससे गुजरात के अंदर ही नहीं बल्कि पूरे देश में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल बाधा है और एक सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिल रही है |

पिछले कई चुनावों में बुझे हुए मन से काम करते हुए कांग्रेस के कार्यकर्ता दिखे लेकिन इस बार प्रधानमंत्री के गढ़ में जाकर राहुल ने अपने कार्यकर्ताओं में जो उत्साह छोड़ा है वो बहुत फायदेमंद भी है और तारीफ के लायक है |

इस उत्साह का फायदा ये हुए कि हर सीट पर गुजरात में कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी है | इसी का असर था कि भाजपा अपने गढ़ में ही जीत को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित भी दिख रही थी |

राहुल का असर इस बात से समझो कि खुद प्रधानमंत्री को यहाँ पर आकर 33 रैलियां करनी पड़ी हैं | भले ही जीत न मिली हो लेकिन कांग्रेस के लोगों में जो नयी ऊर्जा आई है वो आगे के चुनावों में कांग्रेस को अच्छा रिजल्ट देकर जाएगी |

source-https://satyagrah.scroll.in/article/112007/three-gains-of-congress-despite-defeat-in-gujarat

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