अटल को पिता मानने वाला भाजपा विधायक अब कांग्रेस के चरणों में

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भारतीय जनता पार्टी में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के बाद जसवंत सिंह को सबसे बड़ा नेता माना जाता है.

जसवंत सिंह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पहले विदेश और उसे बाद वित्त मंत्री के तौर पर कार्यरत रहें. जसवंत फिलहाल स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करते हुए कोमा में चले गए हैं.

भाजपा को अपने नेता की परवाह तक नहीं

जसवंत सिंह ने एक जमाने में भाजपा के बड़े राजपूत चेहरे के तौर पर जाने जाते थें. राजस्थान की पृष्ठभूमि से आने वाले जसवंत पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग सीट से भी एक बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं.

काफी दिनों से अस्पताल के बेड पर दिन काट रहे जसवंत सिंह से मिलने भाजपा का कोई नेता नहीं जाता. न अमित शाह, न नरेंद्र मोदी, न वसुंधरा राजे और न कोई और.

इस उपेक्षा से दुखी है परिवार

जसवंत सिंह का परिवार भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की इस उपेक्षा से बेहद दुखी है. जसवंत सिंह की भाजपा को बनाने में अहम भूमिका थी. राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे प्रदेशों के राजपूत जसवंत सिंह के चेहरे और प्रभाव के तहत आकर भाजपा के साथ गए थें.

अपने ऐसे मजबूत और कद्दावर नेता के साथ इस तरह के सलूक को दुर्व्यवहार न कहें तो क्या कहा जाए.

शामिल हो सकते हैं कांग्रेस में

जसवंत सिंह के एक पुत्र हैं मानवेंद्र सिंह. मानवेंद्र सिंह भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं. उनकी इच्छा राज्य की वसुंधरा सरकार में मंत्री बनने की थी जो पूरी नहीं हुई, अधूरी रह गई.

मानवेंद्र पिता की उपेक्षा और खुद के प्रति पार्टी के असहयोगात्मक रवैये को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी से नाराज चल रहे हैं. परिवार भी चाहता है कि मानवेंद्र भारतीय जनता पार्टी से अपने सारे रिश्ते तोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो जाएं.

22 सितंबर को खोल सकते हैं अपने पत्ते

मानवेंद्र राजस्थान की राजनीति में खुद के वजूद को कमजोर होने नहीं देना चाहते हैं. वे खुद तो अपने लिए बडी भूमिका चाहते हैं वहीं अपने समर्थकों के लिए भी पार्टी में अहम पद और टिकट चाहते हैं जो वसुंधरा राजे के सीएम रहते संभव नहीं है.

भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत मानवेंद्र आगामी 22 सितंबर को राजस्थान में एक रैली कर रहे हैं. राज्य की राजनीति पर पकड़ रखने वाले पत्रकारों का मानना है कि यह दिन भाजपा के लिए बेहद बुरा साबित होने वाला है.

निष्कर्ष :

भारतीय जनता पार्टी अपने बीमार, बुजुर्ग, कमजोर और लाचार नेताओं का सम्मान नहीं करती बस उनके मरने का इंतजार करती है ताकी गली गली में उनकी अस्थियों के लोटे घूमा कर वोट की दलाली की जाए.


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