शेयर करें
  • 15.8K
    Shares

राहुल गांधी इन दिनों रौद्र अवतार में हैं. राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान संभालने के बाद से ही अपनी नई टीम बनानी शुरु कर दी थी.

पार्टी ने अलग अलग मोर्चे पर काबिलियत वाले नेताओं को मौका देना शुरु कर दिया था. इसी का परिणाम था कि कांग्रेस ने भाजपा के 15 साल पुराने दुर्ग मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को ध्वस्त करके रख दिया और राजस्थान में भाजपा की तीन चौथाई बहुमत की सरकार को भी राहुल गांधी ने रौंद डाला.

राहुल गांधी के निशाने पर अब दिल्ली है जो कभी कांग्रेस का अपराजेय किला हुआ करता था.

शीला दीक्षित बनीं कांग्रेस अध्यक्ष

अपने दुबई दौर से पूर्व राहुल गांधी ने दिल्ली की पूर्व सीएम और विकास की प्रतीक मानी जाने वाली शीला दीक्षित को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है.

राहुल गांधी के इस फैसले से बड़े बड़े चुनावी पंडित भी चक्कर खा गए हैं. एक पंजाबी परिवार की बेटी और ब्राह्मण परिवार की बहु शीला दीक्षित के अध्यक्ष बनने से सत्ताधारी भाजपा और भाजपा की बी टीम आम आदमी पार्टी दोनों में दहशत का माहौल है.

शीला ने चमकाया दिल्ली को

दिल्ली में केजरीवाल सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य को अपना बड़ा काम बताती है लेकिन यह दिल्ली की जनता को लॉलीपॉप से ज्यादा कुछ नहीं क्यांकि शीला ने अपने कार्यकाल में दिल्ली को बड़े बड़े मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की सौगात दी तो कई स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी का निमार्ण भी कराया, जो केजरीवाल से होना फिलहाल असंभव सा दिख रहा है.

क्या आप केंद्र में सरकार बनाएगी

दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का वोटर वर्ग लगभग एक ही है. विधानसभा चुनाव में इस वर्ग ने भले ही आम आदमी पार्टी को वोट दे दिया लेकिन उन्हें लगता है कि जब केंद्र में भाजपा को हराना है तो वोट कांग्रेस को ही देना चाहिए. अरविंद केजरीवाल की पार्टी का केंद्र में कोई काम नहीं. भाजपा का विकल्प कांग्रेस है न कि आम आदमी पार्टी.

शीला ने कभी केंद्र पर आरोप नहीं लगाया

दिल्ली की जनता के इसी मूड को भांपते हुए राहुल गांधी ने शीला दीक्षित के हाथ में कमान सौंपी है जिससे की लोगों को एक बेहतर विकल्प मिल सके. वैसे भी दिल्ली की जनता आप और भाजपा की रोजाना के झगड़े से तंग आ चुकी है. उन्हें एक बार फिर शीला दीक्षित जैसी मुख्यमंत्री की तलाश है जो केंद्र में विरोधी दल की सरकार होने के बावजूद तेजी से विकास कार्यों को अंजाम दे सके.

भाजपा और कांग्रेस में सीधा संघर्ष

राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने पिछले 04 सालों में खुद को दिल्ली में काफी मजबूत बनाया है. अपने वोट शेयर को 09 प्रतिशत से 22 प्रतिशत तक पहुंचाया है. अब शीला दीक्षित इस दाल में घी का काम करेगी और कांग्रेस को 22 से 32 तक पहुंचाने में कामयाब हो गई तो एक बार फिर दिल्ली की सात में से कम से कम 04 सीट पर कांग्रेस आसानी से कब्जा कर लेगी.


शेयर करें
  • 15.8K
    Shares