सीएम बनकर भी खुश नही हैं योगी क्योंकि भाजपा दे रही हैं ऐसा झटका की उड़ जाएगी नींद

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आज भले ही यूपी के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर योगी आदित्यनाथ बैठे हो लेकिन इस बात को कौन नही जानता कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ भाजपा की पहली पसंद नही थे.

हालांकि परिस्थितियों के चलते वो मुख्यमंत्री बनने में बखूबी कामयाब रहे. जिसकी पुष्टि भाजपा शीर्ष नेतृत्व के उनके सीएम बनने के बाद लिए गये वो दो फैसले करते हैं जिससे पार्टी के अंदर चल रही घमासान का पता चलता है.

योगी के मुख्यमंत्री बनाने से बीजेपी नही हैं खुश

पहला झटका योगी आदित्यनाथ को उस वक्त लगा जब पार्टी में उनके कट्टर विरोधी माने जाने वाले शिवप्रताप शुक्ला को मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार में मंत्री बनाया गया.

इसी के साथ उन्हें बीजेपी ने दूसरा झटका उस वक्त दिया जब गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में मठ से उम्मदीवार नही बनाते हुए उपेंद्रदत्त शुक्ला को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया.

बताया जाता हैं कि शुक्ला और योगी आदित्यनाथ चुनावी राजनीति में एक दशक से भी अधिक समय से हाशिये पर है.

जानिए आखिर कौन हैं शिवप्रताप शुक्ला?

योगी बीजेपी से इसलिए भी खफ़ा है क्योंकि जिस शिवप्रताप शुक्ला को योगी आदित्यनाथ विधायक व सांसद नहीं बनने देना चाहते थे, अब वहीं शुक्ला दिल्ली में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री बन गया हैं.

शिवप्रताप शुक्ला भी योगी के गड गोरखपुर से ही आते हैं.

बीजेपी में शुक्ला को ब्राह्मणों के एक प्रभावी चेहरे को तौर पर देखा जाता है जबकि गोरखपुर से ही आने वाले योगी को राजपूतों का बड़ा नेता माना जाता है.

दोनों के मध्य लड़ाई साल 1996 में तब शुरू हुई, जब लगातार चार बार गोरखपुर से विधायक रहे शिवप्रताप शुक्ला को टिकट देने का योगी ने विरोध किया.

योगी शुक्ला की जगह राधामोहन अग्रवाल को टिकट दिलाना चाहते थे.

योगी के चलते शुक्ला की सियासत ऐसे हुई खत्म

बीजेपी ने जब योगी की बात नहीं मानी तो योगी ने राधामोहन अग्रवाल को हिंदू महासभा से चुनाव लड़वा कर जितवा भी दिया.

दोनों के बीच यहीं से राजनीतिक अदावत शुरू हुई थी. आलम यह हो गया था कि योगी ने शिवप्रताप शुक्ला की पूरी सियासत ही खत्म कर दी.

हरने के बाद शिवप्रताप शुक्ला को बीजेपी में साइड लाइन कर दिया. लेकिन शुक्ला का धैर्य और पार्टी के प्रति उनकी वफादारी खत्म नहीं हुई और इसी के दम पर राजनीति में उन्होंने दोबारा वापसी की.

साल 2016 में राज्यसभा का टिकट दिया लेकर योगी के विरोध के बावजूद शुक्ला फिर से सांसद बने और अब केंद्र में कलराज मिश्र व महेन्द्रनाथ पांडे की जगह उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण चेहरा भी बन गए हैं.

निष्कर्ष

 

हाल ही में गोरखपुर और फूलपुर सीट से हुए लोकसभा उपचुनावों में भी जिस तरह बीजेपी ने योगी के उम्मीदवारों को टिकट न देकर शुक्ला के उम्मीदवारों को टिकट दिया उससे ये साफ़ होता हैं कि बीजेपी अब हर तरीके से योगी को साइड लाइन करने की तैयारी में लग गई है.


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