बाबरी मस्जिद को ढहाने वाले बजरंग दल के नेता शिव प्रसाद ने भी अपनाया इस्लाम

कल जो दिन बीता था वो भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन था क्योकि उसी दिन यानी 6 दिसंबर को ही कुछ कारसेवको ने बाबरी मस्जिद को शहीद किया था|  हिन्दू संगठन उस दिन की गाथा आज भी बड़े गर्व से गाते है लेकिन इसके बाद क्या हुआ उसकी कहानी कोई नही जानता| 

दरअसल जिन व्यक्तियों ने अपनी छाती चौड़ी कर यह कार्य किया था बाद में वे सब आत्मग्लानी से भर गये| उन्हें अपने किये पर इस कदर पछतावा हुआ की वे हिन्दू धर्म छोड़ मुसलमान बन गये|

मस्जिद तोड़ने वाले 3 व्यक्तियों ने अपनाया इस्लाम

बाबरी मस्जिद तोड़े आज 25 साल हो गये, कुछ तथाकथित हिन्दूवादी लोगो की फेसबुक टाइमलाइन पे आपको इसकी पोस्ट भी दिख जाएँगी जिसमे वे इसका जश्न भी मना रहे होंगे| लेकिन हकीक़त में वे धर्म की इस लडाई में हारे हुए है| मस्जिद तोड़ने के लिए जो कारसेवक गुम्बज में चढ़े थे उन्हें बाद में पछतावा हुआ| इनमे से तीन ने इस्लाम कबूल कर लिया|

डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, पानीपत के बलबीर सिंह तब शिव सेना के सदस्‍य थे। वह 6 दिसंबर, 1992 को मस्जिद ढहाने चढ़े थे। उनके साथ योगेन्द्र पाल सिंह भी थे| आज उसी बलबीर सिंह को मोहम्‍मद आमिर और योगेंद्र को मोहम्‍मद उमर के नाम से जाना जाता है| योगेंद्र पाल सिंह ने भी बाद में इस्‍लाम अपना लिया।

कैसे आया इतना बड़ा बदलाव?

जिस व्यक्ति को बाबरी मस्जिद तोड़ने के बाद उसके घर पानीपत में ‘हीरो’ जैसा स्वागत मिला था उसने भला क्यों अपनाया इस्लाम? सवाल बहुत महत्वपूर्ण है, हम बात कर रहे है बलबीर उर्फ़ मोहम्मद आमिर की| बाबरी तोड़ने के बाद वो 2 ईंटे भी लेकर गया था जो आज भी शिवसेना कार्यालय में रखी है|

जब यह घटना हो रही थी उस दौरान बलबीर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कलीम सिद्दीकी को मारने के लिए देवबंद पंहुचा लेकिन वो उन्हें नही मार पाया| मौलाना की धार्मिक बातें सुनकर बलबीर का मन बदल गया| उन्होंने इस्‍लाम कबूलने का फैसला किया।

हालांकि यह इतना आसान नहीं था। आमिर को पानीपत छोड़कर हैदराबाद में बसना पड़ा, जहां उन्‍होंने निकाह किया। अब वह इस्‍लाम की शिक्षा देने के लिए स्‍कूल भी चलाते हैं। बलबीर ने ठाना है की वो अब 100 मस्जिदों का निर्माण करवाएंगे जिसमे वो 50 बनवा चुके है|

बजरंग दल के नेता शिव प्रसाद ने भी किया धर्म परिवर्तन, आज है मोहम्‍मद मुस्‍तफा

अयोध्या के में बजरंग दल के नेता भी उन्ही में से एक है जिन्होंने इस्लाम कबूला| शिवप्रसाद ने ही कारसेवको को ये मस्जिद गिराने की ट्रेनिंग दी थी| लेकिन एक साल बाद शिव प्रसाद डिप्रेशन में चले गये थे| उन्होंने मनोचिक्तको, तांत्रिको और संतो को दिखाया लेकिन कोई फायदा नही हुआ|

अगले पांच साल एकांत में बिताने के बाद वह नौकरी के लिए 1999 में शारजाह चले गउ। वहां उन्‍होंने इस्‍लाम कबूल कर लिया और मोहम्‍मद मुस्‍तफा बन गए।

source; http://exposekhabar.com/masjid-girane-wale-in-logo-ne-kiya-islam-kabool/?utm_source=Facebook&utm_medium=UTM1

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