तीन तलाक पर लोगों ने उठाया जशोदाबेन का मामला और कहा कि……

हर चीज़ दिखाते है वो, सच्चाई छोड़कर
आता उनको कुछ नही, बुराई छोड़कर
आज महिलाओं के सम्मान की बात कर रहे हैं वो,
भागे जो खुद थे अपनी लुगाई छोड़कर

भाजपा सरकार खुद को बड़ा ही नारी हितैषी और नारी का सम्मान करने वाला बताती है ! प्रधानमंत्री मोदी भी मंच से लम्बी लम्बी इस बारे में छोड़ते हैं लेकिन असल स्तिथि नारी की क्या है वो जग जाहिर है ! आज कल ये लोग इस्लाम की  शरियत में दखलन्दाजी कर रहे है और 3 तलाक का मामला उठा रहे हैं !

ये लोग कहते है कि नारी को उसके अधिकार दिलाने है और उसे आजादी दिलानी है उसके ही मजहब से? ये मजहब से आजादी  का क्या तुक  बैठता है? क्या सिर्फ इसलिए कि आपको इस्लाम से दिक्कत है बस इसलिए? आप खुद को इस्लाम  का हितैषी तो बताएं ही न क्योकि आपका इस्लाम प्रेम हम 2002,बाबरी विध्वंस और गौ रक्षा के नाम पर रोज मुस्लिमों के साथ होती घटनाओं में तो देख ही रहे हैं !

एक कहावत है कि शीशे के घरों में रहने वाले दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते ! यही कहावत भाजपा को कहना चाहते हैं हम ! आपके प्रधानमंत्री खुद की पत्नी जशोदाबेन को तो बिना तलाक के ही तलाकशुदा सा रखे हुए हैं ! उनके अधिकार तो आप पहले उन्हें दिला लो तब किसी और को दिलाना !

ये तो जबरदस्ती किसी मजहब की मूलधारा को तोडना हुआ ! अब कल को कोई कहे कि हिन्दू महिलाओ को सिन्दूर,मंगलसूत्र से आजादी दिलाओ तो क्या ये उचित है? दरअसल इन कुंठित लोगों ने इस्लाम को पढ़ा ही नहीं है !

इस्लाम में ऐसा नहीं है कि तलाक तलाक कह दो और  काम ख़त्म ! इन लोगों को पढना चाहिए कुरआन पाक इस संदर्भ में क्या कहती है ! कुरआन में वाकायदा पूरा एक प्रोसेस होता है जिसके अंतर्गत महिला के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाता है ! लेकिन जब तानाशाही मन पर हाबी हो तो ये  सब नहीं दीखता !

वैसे मोदी साहिब कानून बनाते वक़्त जशोदा काकी जैसी महिलाओं का भी ध्यान रखा जाए …..प्लीज … ऐसे ही आपके जैसे लोग बिना तलाक , बिना गुज़ारा भत्ता दिए छोड़ जाते हैं इन महिलाओं को ! पहले खुद की चाक गिरेबां देखो फिर दूसरों पर सवाल उठाओ !

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