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हाल ही में त्रिपुरा, मेघालय समेत तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद देशभर में चर्चाओं का बाज़ार गर्म है.

भाजपा प्रभारी सुनील देवधर के प्रयासों से मिली बीजेपी को त्रिपुरा में जीत 

त्रिपुरा में बीजेपी को एतिहासिक जीत मिल सकी. बीजेपी ने लेफ्ट के गढ़ में सेंध लगाते हुए अपनी ये चमत्कारिक जीत दर्ज करके हर किसी को हैरत में डाल दिया. राज्य में भाजपा की इस जीत के पीछे त्रिपुरा के भाजपा प्रभारी सुनील देवधर के कमाल के प्रदर्शन को देखा जा रहा है.

मुलरूप से मराठी सुनील देवधर ने जीत हांसिल करने के लिए लांघी हर सीमा

बता दें कि यूँ तो सुनील देवधर मूलरूप से मराठी है लेकिन त्रिपुरा में भाजपा को जीत दिलाने के लिए उन्होंने अपना रहना सहन और खान पान तक बदल लिया था. इसी के चलते उनके लिए ये जीत इस हद तक जरुरी हो गई कि उन्होंने अपने धर्म के विपरीत जाने में भी संकोच नही किया.

इंटरव्यू में बताया जीत हांसिल करने के लिए किया था ये काम

जी हाँ हाल ही में त्रिपुरा में अपनी जीत पर भाजपा नेता सुनील देवधर ने बड़े न्यूज़ चैनल आज तक से बात करते हुए एक ऐसा ख़ुलासा कर दिया जिसके चलते अब बीजेपी की हर जगह आलोचना हो रही है. बता दें कि सुनील देवधर ने इंटरव्यू में बताया कि..

“राज्य में भाजपा का संगठन खड़ा करने के लिए मैंने खुद पर बहुत काम किया. अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए मुझे अपनी फूड हैबिट तक में भी बदलाव करना पड़ा, इसी दौरान राज्य में जीत हांसिल करने के लिए मुझे सूअर का मांस भी खाना पड़ा.”

राज्य में भाजपा के प्रदर्शन पर बोलते हुए सुनील देवधर ने ये भी बताया कि..

“हमने यह करिश्मा कांग्रेस के उन्हीं हथियारों से किया जिसे कभी खुद कांग्रेस नहीं कर पाई. राज्य का मौजूदा भाजपा संगठन 90% कांग्रेस और तृणमूल कार्यकर्ताओं से ही बन पाया है.”

निष्कर्ष

गौरतलब है कि इस बार बीजेपी त्रिपुरा के 25 साल पुराने सीपीएम के गढ़ को हिला पाने में कामियाब रही है. लेकिन अफ़सोस की बात है कि जिस वामपंथी शासन का खात्मा करते हुए बीजेपी ने धमाकेदार जीत दर्ज कराने का दावा किया असल में वो उन्हें सूअर का मांस खाकर मिल पाई है.


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