शेयर करें

2019 में लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा के बीच गठबंधन को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। इस संबंध में जब बसपा सुप्रीमो मायावती से सवाल किया गया तो उन्होंने कुछ भी नहीं कहा।

यहां तक कि ईवीएम के मुद्दे पर सपा के आमंत्रण के बावजूद बैठक में किसी को न भेजने के सवाल पर भी उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। बल्कि ये कहा कि ईवीएम का मुद्दा सबसे पहले मैंने ही उठाया, सुप्रीमकोर्ट तक गई।

कांग्रेस और भाजपा पर बरसी मायावती

मायावती अपने जन्म दिन पर कांग्रेस और भाजपा पर जमकर बरसीं लेकिन सपा का नाम लेने से परहेज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर बसपा को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने अपने समर्थकों को इससे सतर्क रहने की अपील की है।

मायावती अपने 62 वें जन्मदिन पर बसपा प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित प्रेस-वार्ता को संबोधित कर रही थीं। मायावती ने कहा, कि बसपा अंबेडकरवादी पार्टी है। पूर्व की कांग्रेस सरकारों की तरह भाजपा की सरकार में भी बसपा को किस्म-किस्म के हथकंडे अपनाकर कमजोर करने और खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

मायावती ने आरोप लगाया कि गुजरात में दलित समाज के जिग्नेश मेवाणी को कांग्रेस पर्दे के पीछे समर्थन कर रही है। गौरतलब रहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती के निशाने पर इस बार समाजवादी पार्टी नहीं रही है।

गुजरात में जिग्नेश को बनाया मोहरा

उन्होंने कहा कि जिग्नेश ने आजाद उम्मीदवार के रूप में जो ये चुनाव जीता, लेकिन जीत अकेले दलितों के वोटों से न होकर कांग्रेस और हार्दिक पटेल के समर्थन से हुई है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत जिग्नेश की सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा। अब कांग्रेस पर्दे के पीछे रहकर जिग्नेश को देश में जगह-जगह भेजकर फायदा उठाना चाहती है।

उन्होंने कहा कि दलितों को इससे सावधान रहने की जरूरत है। तो वहीं उन्होंने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि 2014 में लोकसभा चुनाव और 2017 में बसपा के प्रभाव वाले यूपी व उत्तराखंड के चुनाव में इसने ईवीएम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कर जबर्दस्त राजनैतिक नुकसान पहुंचाया।

इसके बाद सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर गांव में क्षत्रियों व दलितों के बीच में भयंकर जातीय संघर्ष करवाकर बसपा को खत्म करने की कोशिश की।

फिर राष्ट्रपति पद पर दलित उम्मीदवार उतारकर दलित-कार्ड खेलने की कोशिश की। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि लेकिन मेरे सूझ-बूझ से भाजपा का गेम-प्लान फेल हो गया।

इसका नतीजा ये हुआ कि बाद में उन्हें राज्यसभा में ठीक से बोलने नहीं दिया गया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा एंड कम्पनी के लोग चोर-चोर मौसेरे भाई नजर आते हैं।

जहां मायावती ने भाजपा और कांग्रेस को तो आड़े-हाथ लिया लेकिन सपा के बारे में कहने से बची। तो वहीं इसे मायावती की तरफ से एक इशारा भी समझा जा रहा है कि 2019 में होने वाले चुनाव के लिए दोनों पार्टियां साथ नजर आ सकती है। जो कि भाजपा के लिए एक खतरे किघंटी है।

भाजपा ने चला ये पैंत्रा

अभी हाल ही में हुए निकाय चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत कम होने से भी भाजपा नेतृत्व चिंता में है।

जिसके लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी नेताओं के पेंच कसे हैं।

पार्टी हाईकामान के निर्देश मिलते ही भाजपाई मिशन 2019 के लिए जुट गए हैं और 26 जनवरी को ग्रीनपार्क में सामूहिक वन्देमातरम गायन कार्यक्रम का आयोजन कराए जाने की घोषणा की है।

इसमें महानगर के 63 वार्डो से तीन-तीन सौ लोगों को लाने को कहा गया है, साथ दक्षिण क्षेत्र को 30 हजार का टारगेट किया गया है। गणतंत्र दिवस के दिन करीब पचास भाजपाई यहां आएंगे और लोकसभा चुनाव का शंखदान करेंगे।

भाजपा अगामी 26 जनवरी को ग्रीनपार्क स्टेडियम में 50 हजार कार्यकर्ताओं के साथ वंदेमातरम सामूहिक गायन का कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही है।

हलांकि पार्टी इसे राजनीति के बजाए देशभक्ति के रूप में पेश कर रही है।

भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने बताया कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर संस्कार भारतीय के तत्वाधान में सामूहिक वंदेमातरम गायन का कार्यक्रम रखा है, जिसमें 50 हजार लोगों को लाने का लक्ष्य भाजपा कार्यकर्ताओं को दिया गया है। मैथानी ने बताया कि कानपुर उत्तर के 64 वार्डो से 20 हजार और दक्षिण से तीस हजार लोग ग्रीनपार्क आएंगे और वंदेमातरम गाएंगे।

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े

शेयर करें