“भारत छोड़ो आन्दोलन” पे सोनिया गाँधी का अब तक का सबसे ऐतिहासिक भाषण, लोक सभा मैं खोली आरएसएस की पोल

कल भारत ने ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ की 75 वर्ष्गांठ मनाई जिस मौके पर संसद में कई नेताओ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए आजादी के शूरवीरो को याद किया | जिसमे से एक कांग्रेस पार्टी की मुखिया सोनिया गाँधी ने भी भाषण दिया और RSS पर हमला बोला | पेश है उनके भाषण के मुख्य अंश!

आज हम यहां 75 साल पहले आज ही के दिन भारत छोड़ो आंदोलन की यादों को ताजा करने के लिए एकत्रित हुए हैं

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“आज हम यहां 75 साल पहले आज ही के दिन भारत छोड़ो आंदोलन की यादों को ताजा करने के लिए एकत्रित हुए हैं मुझे गर्व है कि मैं एक महान सदन में खड़ी होकर इंडियन नेशनल कांग्रेस के अनेक बहादुर महिला पुरुष कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दे रही हूं जिन्होंने इस आंदोलन में भाग लिया और हमारी आजादी के लिए बेमिसाल कुर्बानियां दी 8 अगस्त 1942 को मुंबई में महात्मा गांधी के आवाहन पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तावित और सरदार पटेल द्वारा समर्थित संकल्प को स्वीकार किया जिससे अंग्रेजी हुकूमत से देश छोड़ने को कहा गया था”

मैंने कांग्रेस को प्रतिज्ञा दिलाई है कि कांग्रेस ‘करें या मरे’

भारत छोड़ो कोई इंडिया इस संकल्प के पारित होने के बाद महात्मा गांधी ने अपने भाषण के अंत में जो कहा मैं उसे बाहर आ रही हूं मैंने कांग्रेस को प्रतिज्ञा दिलाई है कि कांग्रेस ‘करें या मरे’ इन शब्दों ने पूरे देश को उत्तेजित कर दिया अंग्रेजी सरकार ने वर्किंग कमेटी के सभी सदस्यों और अनगिनत कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तुरंत गिरफ्तार कर लिया हजारों लोगों को 1945 का दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने तक जेल में बंद रखा गया जवाहरलाल नेहरू ने अपना सबसे लंबा समय बिताया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जेल से बाहर नहीं आ सके |

“उस दौर में ऐसे संगठन (RSS) और व्यक्ति थे जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया”

इस आंदोलन को जारी रखने के लिए महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं को अंडर ग्राउंड कार्यकर्ताओं पर बरसे हर हफ्ते दर हफ्ते दर्जनों लोग मारे गए आदेशों को नहीं मानने वालों पर कोड़े बरसाए |

राष्ट्रवादी पर पाबंदी लगाई गई और उन्हें बंद कराया गया | सत्याग्रहियों को डराने धमकाने की कोशिश में पुलिस द्वारा महिलाओं का उत्पीड़न किया गया | कैदियों की बर्बरता पूर्वक पीटाई की गई थी, मजबूर ही नहीं हवाई फायरिंग भी की गई और भारत छोड़ो आंदोलन हमारी आज़ादी की लड़ाई में क्रांतिकारी परिवर्तन की मिसाल बन गया |

लेकिन उसके पहले हमें अनगिनत कुर्बानियां देनी पड़ीं कुर्बानियां हमें एक मौका देती है जब हम उनके साथ याद करें और उनके प्रति सम्मान दिखाएं | शहीदों को नमन कर रहे हैं जो स्वाधीनता संग्राम में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि उस दौर में ऐसे संगठन और व्यक्ति थे जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया | उनका हमारे देश को आजादी दिलाने में कोई योगदान नहीं रहा |

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