देशभक्ति के ठेकेदार मोदी को सेना ने दिया नोटिस,कोर्ट भी जा सकते हैं मोदी

मोदी सरकार ने देश में देशप्रेमी होने का झंडा उठा रखा है ! ये पार्टी देशहित के काम से ज्यादा इस काम में व्यस्त रहती कि फलाना देशभक्त है, इसे पाकिस्तान भेजो, इसे ये करो ब्ला ब्ला !

लेकिन मजेदार किस्सा तो ये हुआ कि सेना ने मोदी को ही लपेट दिया ! मामला कुछ ऐसा है कि मोदी सरकार ने जुलाई से सेना के जवानों को फ्री राशन के जगह 96 रूपए रोज के हिसाब से पैसा देने की बात कही थी ! ऐसा करने में अभी तक ये नाकारा सरकार हर काम की तरह निकम्मी रही है और इसे भी जुमला बना दिया !

लेकिन सेना के अधिकारीयों ने मोदी सरकार को सबक सिखाने का सोच लिया और मोदी सरकार के खिलाफ सीधा हल्ला बोल कर दिया जिसके तहत राजस्थान में सेना की लीगल विंग में डिप्टी जज कर्नल मुकुल देव ने मोदी सरकार को एक नोटिस थमाकर चेतावनी और धमकी दी है !

कर्नल देव ने 1 जुलाई को मोदी सरकार को भेजे नोटिस में कहा, ‘राशन के बदले नकदी देने का प्रावधान कानून में नहीं है। यह अवैध आदेश है जो मेरी सेवा के बुनियादी नियमों और शर्तों का उल्लंघन करता है।’

मुकुल ने मोदी सरकार को धमकी देते हुए कहा है कि सरकार ने अपने इस फैसले को वापस न लिया तो वो कोर्ट भी चले जायेंगे ! ये नोटिस रक्षा सचिव संजय मिश्र के हाथों से मोदी सरकार तक देव ने भिजवाया  ! इस फैसले को वापस लेने के लिए देव ने सरकार को 60 दिन का अल्टीमेटम दिया है !

इसके अलावा कर्नल का कहना है कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के अनुसार, वह संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा आयोग के विज्ञापन/अधिसूचना की संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा पास कर के 1988 में सेना में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि अधिसूचना में स्पष्ट रूप से सेवा की अन्य शर्तों के अलावा, मुफ्त राशन का प्रावधान था। मुफ्त राशन के बदले में नकदी के प्रावधान का कोई जिक्र नहीं था।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शांतिपूर्ण और मैदानी इलाकों में तैनात सेना के जवानों को मुफ्त राशन पहुंचाया जाता है। वहीं केंद्र की मोदी सरकार ने इसी जुलाई महीने से मुफ्त राशन के बजाए 96 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से नकदी देने का फैसला लिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक सेना के कई अधिकारी इस फैसले का विरोध कर चुके हैं।

अधिकारियों का कहना है कि मुफ्त राशन से एक छोटे परिवार के खाने की लगभग सभी जरूरतें पूरी हो जाती हैं लेकिन कैश देने से बात नहीं बनेगी। अधिकारियों का कहना है कि 96 रुपए एक छोटी राशि है।

वहीं हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में ल्यूटिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एसपीएस कटेवा ने भी बताया कि 96 रुपये एक छोटी राशि है। कटेवा ने आगे कहा कि तय की गई राशि की तुलना बाजार के दाम से करें तो यह बहुत कम है। मेरे हिसाब से 250 रुपये के करीब रेट तय करना ज्यादा बेहतर होता।

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