महिलाएं भेज रही हैं नरेंद्र मोदी को हज़ारों सेनेटरी नैपकीन..वजह जानकर बीजेपी शर्म से डूब मरेगी

जल्द ही सिनेमाघरों में बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार की नई फिल्म ‘पैडमैन’ रिलीज़ होगी. महिलाओं के सेनेटरी नैपकीन के मुद्दे पर बनी इस फिल्म का असर अब देशभर की औरतों में दिखने लगा है. शायद इसीलिए देश की लाखों महिलाएं हज़ारों सेनेटरी नैपकीन प्रधानमंत्री मोदी को भेजने की तैयारी कर रही हैं. इसमें सबसे ज्यादा खास बात ये है कि इन नैपकिन पर मोदी साहब के लिए एक ख़ास मैसेज भी लिखा गया है. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर महिलाओं द्वारा प्रधानमंत्री को ये अजीबो-गरीब भेट आखिर क्यों दी जा रही हैं तो आइए आपको इस बारे में भी बताते है.

ये है पूरा मामला !

इस पूरी मुहिम के पीछे की वजह है महिलाओं द्वारा मासिक धर्म के दिनों में इस्तेमाल किये जाने वाले सेनेटरी नैपकीन को जीएसटी के दायरे से बाहर लाना क्योंकि केंद्र द्वारा जीएसटी आने के बाद उसकी कीमतें पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई हैं. और अब मोदी सरकार के इसी फैसलें के खिलाफ मध्य प्रदेश के ग्वालियर की सैकड़ों महिलाओं ने सेनेटरी नैपकीन को टेक्स मुक्त करने के लिए एक नायाब अभियान शुरू किया है. जिसके अतर्गत हजारों महिलाएं अपने हस्ताक्षरित करीब एक हजार नैपकीन पोस्टकार्ड के साथ प्रधानमंत्री को भेट करेंगी.

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केंद्र ने सेनेटरी नैपकीन को ‘लग्जरी सामान’ बताकर बढ़ाया है टैक्स

इसी ख़ास मुहिम का हिस्सा बनी ग्वालियर निवासी प्रीति देवेंद्र जोशी ने कहा कि “एक तरफ जहाँ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छता अभियान चला रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर सेनेटरी नैपकीन को ‘लग्जरी सामान’ में शामिल किए हुए हैं. किशोरियों से लेकर 40 वर्ष की उम्र तक की हर महिला को हर महीने चार-पांच दिनों तक इनकी जरूरत पड़ती है, वावजूद इसके इसे ‘लग्जरी सामान’ में शामिल करना बेहद शर्मनाक है.”

प्रीति देवेंद्र जोशी ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए ये भी कहा कि,  “सेनेटरी नैपकीन पहले से ही महंगा था, महंगाई के दौर में हर महिला नैपकीन आसानी से नहीं खरीद पाती थीं. ऐसे में अब नए कर लग जाने से तो वह और भी महंगा हो गया है. ऐसे में सेनेटरी नैपकीन का उपयोग मध्यवर्ग की महिलाएं तक नहीं कर पाएंगी, गरीब परिवार की महिलाएं तो इसे खरीदने की सोच भी नहीं सकतीं.”

नैपकीन की क़ीमत बढ़ने से महिलाएं इस्तेमाल कर रही है फटे-पुराने कपड़े

जानकारी के लिए बता दें कि महिलाओं द्वारा शुरू की गई इस मुहिम का समर्थन करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता हरिमोहन भसनेरिया ने कहा कि “कई महिलाओं ने महंगा होने के बाद से इन नैपकीन का उपयोग ही बंद कर दिया है. वे फटे-पुराने कपड़े के टुकड़े से काम चला लेती हैं. इससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है. जब घर की महिला ही स्वस्थ्य नहीं रहेगी, संक्रमणग्रस्त हो जाएगी, तो परिवार का क्या हाल होगा.”

जब इस ख़ास अभियान से जुड़ीं उषा धाकड़ ने बात कि गई तो उन्होंने भी मोदी सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा, “इस अभियान के जरिए किशोरियों, युवतियों व महिलाओं से नैपकीन पर उनका नाम और संदेश लिखवाया जा रहा है. अभियान का पहला चरण पांच मार्च तक चलेगा. पोस्टकार्ड के साथ हस्ताक्षर युक्त एक हजार पैड प्रधानमंत्री को भेजकर हम मांग करेंगे कि सेनेटरी नैपकीन पर लागू 12 प्रतिशत जीएसटी सहित अन्य करों को खत्म किया जाए.”

मोदी सरकार से देश की महिलाएं अपने हक़ के लिए कर रही हैं दो-दो हाथ

जानकारी के लिए बता दें कि अपने इस अभियान के चलते महिलाओं ने एक ख़ास पोस्टर भी निकाला है जिसमें महिलाओं की इस समस्या का साफ़ तौर पर उल्लेख करते हुए ये दर्शाया गया है कि आज भी देश में महिलाओं की बहुत बड़ी आबादी अपने मासिक दिनों में पैड का उपयोग नहीं कर पाती है. जिनमें से कई तो ऐसी हैं जो इसके बारे में जानती तक नहीं है. जिसके चलते ग्रामीण महिलाओं में संक्रमण फैल रहा है और इसके पीछे उनकी अज्ञानता सबसे बड़ा कारण है.

ऐसे में ये सरकार का दायित्व बनता है कि वो इस समस्या को हल करने के लिए न केवल महिलाओं को जागरूक करे बल्कि ग्रामीण इलाकों में जाकर हर महिला को सेनेटरी नैपकीन नि:शुल्क मुहैया भी कराए, मगर ये सब करने की बजाह मोदी सरकार अपने फ़ायदे के लिए इसे लग्जरी आइटम बनाकर उन्हें स्वच्छ रहने से वंचित तो कर ही रही है बल्कि हर महिला का अपमान भी कर रही हैं.

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पहले एक हजार फिर एक लाख और बाद में 5 लाख नैपकीन प्रधानमंत्री को तोहफें में देंगी महिलाएं

बताते चले कि महिलाओं के इस आंदोलन की रूपरेखा के मुताबिक, आने वाली पांच मार्च को महिलाएं करीब एक हजार नैपकीन प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड के साथ भेजेंगी. दूसरे चरण में एक लाख और तीसरे चरण में पांच लाख नैपकीन प्रधानमंत्री मोदी को भेट किये जाएंगे. जिसका देशव्यापी अभियान शुरू भी हो चुका है.

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