पनामा पेपर्स मामले में नवाज़ शरीफ ने गवाई अपनी कुर्सी लेकिन इन भारतीय हस्तियों में अभी तक कोई आंच नहीं आई!

पकिस्तान की राजनीती में जिस भूचाल ने हाल ही में कदम रखा है वो है पनामा पेपर्स जिसके चंगुल में बड़ी बड़ी मछलिया फसती नज़र रही है और हाल ही में जो जीव इसका शिकार हुआ है वो है पकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ l

पनामा पेपर्स मामले में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ शरीफ को दोषी पाया जिसके चलते उन्हें प्रधान मंत्री के पद के अयोग्य ठहरा दिया गया है l पांच जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नवाज शरीफ के खिलाफ इस मामले में मुकदमा चलाया जाना चाहिए l इस घटना के बाद नवाज़ ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया और केंद्रीय मंत्रिमंडल को बर्खास्‍त कर दिया गया है। अब आते है भारत की शासन व्यवस्था पर!

भारतीय जो पनामा पेपर्स मामले में पाए गये

एक तरफ जहाँ फिल्म जगत के महानायक अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम सामने आया है तो दूसरी तरफ बड़े कॉर्पोरेट घरानों में डीएलएफ के मालिक के.पी सिंह तथा उनके परिवार के 9 सदस्य, अपोलो टायर्स और इंडिया बुल्स के प्रमोटर और गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी का नाम भी इस सूचि में शामिल है। बंगाल के एक नेता शिशिर बजोरिया के अलावा लोकसत्ता पार्टी के नेता अनुराग केजरीवाल का भी नाम सामने आया है।

सरकार का इतना ढीला रवैया क्यों?

पकिस्तान जो क्रिकेट के मैदान से लेकर राजनीति के अन्तराष्ट्रीय मंचो तक भारत से मात खाता रहा है उसने पनामा के अंतर्गत भ्रष्टाचार पर डंडा चलाते हुए भारत को कहीं पीछे छोड़ दिया है l अब ये कहने की ज़रूरत नहीं की जो नाम पनामा में सामने आये है वो सरकार के सगे संबंधियों के है जिस पर अभी तक नोटिस भेजने की प्रक्रिया से मामला से आगे नहीं बढ़ा सका l जब अरुण जेटली से पुछा गया था इस मामले पर तो उन्होंने यह कह कर कर पल्ला झाड लिया था की वो एक समिति का गठन किया है जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

क्या है पनामा पेपर्स लीक?

पिछले साल ब्रिटेन से लीक हुए टैक्स डॉक्युमेंट्स बताते हैं कि कैसे दुनियाभर के 140 नेताओं और सैकड़ों सेलिब्रिटीज ने टैक्स हैवन कंट्रीज में पैसा इन्वेस्ट किया। इनमें नवाज शरीफ का भी नाम शामिल है। इन सेलिब्रिटीज ने शैडो कंपनियां, ट्रस्ट और कॉरपोरेशन बनाए और इनके जरिए टैक्स बचाया। सवालों के घेरे में आए लोगों ने इन देशों में इन्वेस्टमेंट इसलिए किया, क्योंकि यहां टैक्स रूल्स काफी आसान हैं और क्लाइंट की आइडेंडिटी का खुलासा नहीं किया जाता। पनामा में ऐसी 3.50 लाख से ज्यादा सीक्रेट इंटरनेशनल बिजनेस कंपनियां हैं।

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