बीजेपी से खफा है इस मुस्लिम देश की मीडिया.. वजह हैरान कर देगी - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

बीजेपी से खफा है इस मुस्लिम देश की मीडिया.. वजह हैरान कर देगी

हाल ही में बांग्लादेशी मीडिया ने भारत पर छपी अपनी एक रिपोर्ट में असम में वैध नागरिकों की सूची बनाए जाने को लेकर गहरी चिंता जताई है. बता दें कि असम सरकार वैध नागरिकों की पहचान के लिए यह सूची तैयार कर रही है.

असम में बांग्लादेशी प्रवासियों को रोकने के लिए बीजेपी बना रही है वैध नागरिकों की सूची 

कई दशकों से बांग्लादेश और भारतीय के बीच खुली सरहद के कारण पलायन होता रहा है और बीते सालों में इसमें खासी बढ़त भी देखी गई है. सीमा पार से आने वालों में अधिकतर बांग्लादेशी भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में ही रह रहे हैं. जिसके चलते इस अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए असम ने 1951 में सभी वैध नागरिकों की सूची तैयार करने का निर्णय लिया था. लेकिन 2016 में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा असम में सरकार बनाए जाने के बाद इस सूची में तेज गति पर काम शुरू हुआ.

“बीजेपी को असल दिक्कत मुसलमानों से है”

अगर याद हो तो बीजेपी ने असम में सत्ता में आने से पहले अपने चुनावी अभियान में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की समस्या खत्म करने का वादा किया था, लेकिन लोग बीजेपी पर ये आरोप लगते रहे है कि बीजेपी को अवैध बांग्लादेशी नागरिकों से नहीं बल्कि असल समस्या मुसलमानों से है.

असम की तरह पश्चिम बंगाल की सीमा भी बांग्लादेश से मिलती है

असम की आबादी पर गौर करे तो वहां मुसलमानों की जनसंख्या करीब एक तिहाई हैं जो कि राष्ट्रीय स्तर की आबादी से बहुत ज्यादा है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री भी अपने बुलंद तेवरों के लिए जानी जाती हैं. पश्चिम बंगाल की सीमा भी असम की तरह बांग्लादेश से मिलती है, जिसके चलते ही दोनों इलाकों के बीच भले ही सरहद खिंची हुई है, लेकिन दोनों मुलकों के बीच सांस्कृतिक समानताएं देखने को मिलती हैं.

बांग्लादेशी मीडिया की तरह ममता बनर्जी भी बीजेपी को बताती है मुस्लिम विरोधी 

एक ओर जहाँ बांग्लादेशी मीडिया ही इस बात को कई दफ़ा उठाते आए हैं कि भारत सरकार बंगालियों को अपने देश में पनाह नहीं देना चाहती, तो वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही असम में बीजेपी सरकार पर साफ़ शब्दों में आरोप लगाती दिखती है कि वो असम से बंगालियों को निकाल बाहर करने में लगी है.

वैध नागरिक की सूची को लेकर 1 जनवरी को आया पहला अपडेट ड्राफ्ट 

इस पूरे मुद्दे के बीच एक जनवरी को असम में वैध नागरिक की सूची को लेकर एनआरसी का पहला अपडेट ड्राफ्ट सामने आया, जिसमें 1।9 करोड़ लोगों को वैध नागरिक बताया गया है. बताया जा रहा है कि इस सूची में शामिल होने के लिए कुल 3।3 करोड़ लोगों ने अपना आवेदन किया था. और अभी भी बाकी बचे आवेदकों के दस्तावेजों की जांच चल रही है.

बीजेपी के इस अभियान से मुसलमान है परेशान

असम की इस पूरी प्रक्रिया पर बांग्लादेशी मीडिया ने भी अपनी नज़र बनाई हुई है. बांग्लादेश मीडिया को अध्यन करते हुए इस विवाद पर दो बड़ी चीजें नज़र आई. जिसके बाद ही इंटरनेशनल स्तर पर बांग्लादेशी मीडिया ने इस बात पर ज़ोर डाला है कि “भारतीय राज्य में मुसलमानों को गुजर-बसर में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. यहां का मीडिया कह रहा है कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ भारत के अभियान से मुसलमानों को दिक़्कत हो रही है.”

असम में हिन्दुओं की तुलना में मुसलमानों में है ज्यादा भय 

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक बड़े अंग्रेजी वेबसाइट द इंडिपेंडेंट ने भी एक दिसबंर 2017 की अपनी एक रिपोर्ट में इस विवाद पर लिखा, ‘‘प्रमाणीकरण की प्रक्रिया में असम में हिन्दुओं की तुलना में मुसलमान ज्यादा डरे हुए हैं.”

भारतीय नागरिकता के लिए पूर्व मोनोवर हुसैन से भी मांगी गई सत्यता 

इसी रिपोर्ट में राज्य के पूर्व मनोवर हुसैन की भी एक खबर को प्रकाशित करते हुए लिखा कि “उन्हें भारतीय नागरिकता के लिए सत्यापन कराने को कहा गया था.” जिसके बाद उन्होंने मुसलमानों की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “जब उनके साथ ऐसी शर्त रखी जा सकती है तो राज्य में रह रहे अनपढ़ अल्पसंख्यकों के साथ क्या हो सकता है, इस बात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.”

बीजेपी के मुस्लिम विरोधी अभियान की भारत में भी हुई आलोचना

बीजेपी के इस मुस्लिम विरोधी अभियान पर बंगाली अखबार दैनिक इंकलाब ने भी दिसंबर 2017 में अपने संपादकीय में बीजेपी सरकार की तीखी आलोचना करते हुए लिखा था कि “इसमें कोई संदेह नहीं है कि भाजपा मुस्लिमों को असम से बाहर निकालने के लिए एनआरसी को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है. यह भाजपा के मुस्लिम विरोधी रवैये को ही दर्शाता है.”

अवैध प्रवासियों के नाम पर मुसलमानों को देश से निकाल रही है बीजेपी

इस अखबार ने इस विवाद पर ये भी कहा कि “अवैध प्रवासियों की समस्या के नाम पर मुसलमानों को निकालने के लिए बीजेपी का ये उपक्रम है. इस अखबार ने इसकी तुलना म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर होने वाली कार्रवाई से की की थी.”

म्यांमार की राह पर बढ़ रहा है भारत 

हालांकि बाद में इसी अखबार ने अपनी संपादकीय में लिखा कि, ”इसे कहने का कोई मतलब नहीं है कि अगर सरकार असम में मुसलमानों की नागरिकता रद्द कर देती है तो वे सड़क पर आ जाएंगे और उनके पास बांग्लादेश आने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. यह ठीक उसी तरह से है जैसे म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर जुल्म ढाया गया और उन्हें बांग्लादेश आने पर मजबूर कर दिया गया. भारत भी म्यांमार की राह पर ही आगे बढ़ रहा है.”

ग़लत तरीके से असम से मुसलमानों को निकालने पर भड़क सकती है हिंसा

ठीक दैनिक इंकलाब की तरह ही 9 जनवरी 2018 को एक जाने माने मुस्लिम पत्रकार अनीस आलमगिर ने अपने लेख में असम में रह रहे बंगालियों को सचेत करते हुए लिखा था कि “असम के बंगाली मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है. असम से ग़लत तरीके से मुसलमानों को निकालने से भारत और बांग्लादेश के बीच सांप्रदायिक हिंसा भड़क सकती है.”

निष्कर्ष: 

गौरतलब है कि मुस्लिम पत्रकार अनीस आलमगिर अकेले ऐसे नहीं है जो बंगाली मुसलमानों पर भारत में हो रहे अत्याचारों पर सीधा-सीधा मोदी सरकार को जिम्मेवार मान रहे हो बल्कि बांग्लादेशी मीडिया भी साफ़ शब्दों में भारत की बीजेपी सरकार से इस मुद्दे को लेकर खफ़ा नज़र आ रहा है.

Story Source: http://www.bbc.com/hindi/international-42869140

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