नरेंद्र मोदी के बिहार में 8.5 लाख शौचालयों की पोल खोलेगी ये तस्वीर

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सत्ता में आते ही प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छ भारत का सपना लोगों को दिखाते हुए देशभर में शौचालय बनाने को लेकर जैसे एक नया दौर सा ला दिया.

शौचालयों के निर्माणों के लिए बीजेपी सरकार ने लुटाया अरबों रुपया

देश के सैकड़ों गाँवों में शौचालयों के निर्माणों के लिए सरकारी खाजने से अरबो-रुपयाँ हाथ खोलकर नेताओं और प्रशासन को बांटा गया.

लेकिन आज सत्ता में करीब 4 साल से भी ज्यादा का वक्त पूरा होने के बाद भी देश में स्वच्छता और शौचालयों की जो हालत हैं वो किसी से छुपी नही है.

बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री मोदी देश-विदेश के मंचों से चाहे कितने भी दावे कर लें लेकिन असलियत क्या हैं वो देश की जनता भली भाति जानती है.

देश में शौचालयों के निर्माणों में कही अधूरा काम, कही बड़े स्तर पर घोटाला, तो कही प्रशासन की लापरवाही… प्रधानमंत्री के सभी दावों की सच्चाई बताने के लिए काफी है.

मोदी का दावा एक हफ्ते में बने 8 लाख 50 हजार शौचालय

इसी बीचे जब हल ही में लोगों के मन में ये सवाल उठा कि आखिर एक हफ्ते में ज़्यादा से ज़्यादा कितने शौचालयों का निर्माण किया जा सकता है और वो भी जब पूरे हफ़्ते, चौबीसों घंटे, हर लम्हा काम चलता रहे तो….!

‘चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के समापन समारोह’ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते मंगलवार को बिहार के मोतीहारी में इसका जवाब खुद ऐसा दिया कि मानों निर्माण कार्य उनकी बुलेट ट्रेन की गति से पूरा किया जा रहा है.

जी हाँ बता दें कि मोतीहारी में अपने स्वच्छ भारत के अंतर्गत बनने वाले शौचालयों के निर्माण का गुणगान करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,

“पिछले एक हफ्ते में बिहार में 8 लाख 50 हजार से ज़्यादा शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा हुआ है.”

मोदी के दावे की खुली पोल

अब ये तो सोचने वाली बात हैं कि हफ़्ते में सात दिन होते हैं. दिन में 24 घंटे यानी सात दिन में 168 घंटे हुए.

प्रधानमंत्री के दावे पर यकीन किया जाए तो बिहार में हरेक घंटे 5059 टॉयलेट यानी हर मिनट 84 टॉयलेट का निर्माण हुआ.

इन आकड़ों को देखकर तो ऐसा ही लगता हैं कि मोदी का प्रशासन बुलेट की गति से भाग रहा है.

लेकिन आइये अब दावे की हकीकत की पोल भी खोल ही देते है.

हकीकत मोदी की सोच से है विपरीत 

अगर बिहार सरकार की माने तो उनका साफ़ तौर पर कहना है कि इन साढ़े आठ लाख शौचालयों का निर्माण बीते एक सप्ताह नहीं बल्कि चार सप्ताह के दौरान हुआ है.

बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के सीईओ सह मिशन डायरेक्टर बालामुरुगण डी ने मोदी के दावे की पोल खोलते हुए मीडिया से बात की और बताया कि,

“तेरह मार्च से लेकर नौ अप्रैल के बीच 8.50 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया.”

उन्होंने ये भी साफ़ किया कि,

“बीते करीब डेढ़ बर्षों के दौरान की गई तैयारियों से ऐसा संभव हुआ. जिनमें राज-मिस्त्रियो की ट्रेनिंग से लेकर व्यापक जागरूकता अभियान शामिल है.”

वहीं सर्वे के मुताबिक़ बिहार में अभी क़रीब 86 लाख शौचालय हैं. वहीं अब भी आधे से भी कम करीब 43 फीसदी घरों में ही शौचालय उपलब्ध है.

क्योंकि बाकी बचे शौचालय या तो पूरी तरह बन नही पाए हैं या फिर जिस तरह से बनाए गये हैं उन्हें इस्तेमाल किया जाना बेहद मुश्किल है.

मोदी के दावे पर तेजस्वी यादव ने कसा तंज

बीजेपी भले ही कितने भी दावे कर ले लेकिन सच्चाई यही हैं कि बिहार का कोई भी ज़िला अब तक खुले में शौच से मुक्त नहीं घोषित हुआ है.

सरकार के दावों के मुताबिक रोहतास ज़िला बिहार का पहला ऐसा ज़िला बनने के क़रीब है.

ऐसे में जब मोदी के इस दावे की पोल खुली तो बीजेपी के इस गड़बड़झाले पर बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी तंज करने से नहीं चूके.

उन्होंने ट्वीट किया कि,

“ऐसे झूठे दावे से बिहार के मुख्यमंत्री भी सहमत नहीं होंगे.”

निष्कर्ष

प्रधनमंत्री मोदी अपनी सरकार की उपलब्धि गिनवाते हुए हर बार दावों को सही से चेक करना भूल जाते हैं, जिससे उनको जनता के सामने हज़ाक बनना पड़ता है.


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