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देश में राजनीतिक पार्टी भाजपा के बारे में हम सब जानते हैं। इसकी ओछी हरकतों से भी हम सब वाकिफ हैं। चुनावों में जीत पाने के लिए किसी भी स्तर पर गिर जाने वाली इस पार्टी का कोई दीन-धर्म नहीं है। कभी जुमलों से तो कभी धमकी से तो कभी लोगों की भावनाओं से खेल कर, ये पार्टी सत्ता में आने को बेताब रहती है।

1. स्थानीय पार्टियों के साथ धोखा करती है बीजेपी

चुनावों की तैयारियों के दौरान स्थानीय पार्टियों के आगे वोटों और समर्थन के लिए बीजेपी भिखारी की तरह खड़ी रहती है। लेकिन जब वोट और समर्थन हासिल कर सरकार बना ली जाती है तब क्षेत्रीय पार्टियों को लात मार दी जाती है। क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं को न के बराबर मंत्री पद दिए जाते हैं। उनको पार्टी के बड़े फैसलों में सलाह देने की भी इजाजत नहीं होती और न ही खुल कर काम करने की।

2. मिलने के लिए वक़्त भी नहीं देते हाईकमान नेता

बीजेपी की साथी पार्टी के नेताओं को किसी जरूरी काम के लिए पार्टी दिग्गजों से मिलना भी आसान काम नहीं है। सहयोगी दलों के नेताओं का कहना है कि बीजेपी उनका इस्तेमाल सिर्फ रबर स्टैम्प की तरह करना चाहती है।  विरोध करने या शिकायत करने के लिए यदि वो पार्टी हाईकमान के पास जाते हैं तो उन्हें मिलने का वक़्त नहीं दिया जाता।

3. शिवसेना भी ऐसे ही कारणों की वजह से हुई अलग

बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन बहुत पुराना है। लेकिन मोदी और शाह के नेतृत्व में पार्टी का स्तर बहुत गिर गया है। पार्टी सहयोगी दलों के मूल सिद्धांतों को भी कुचल रही है। इसी वजह से सहयोगी दलों की भी अपने क्षेत्र पर से पकड़ कमजोर हो रही है। शिव सेना ने भी इन्हीं कारणों से बीजेपी का विरोध करना शुरू किया था। बीजेपी द्वारा विरोध की वजह न सुने जाने पर शिवसेना ने अपना रास्ता अलग कर लिया।

4. देश की फ़ौज से भी गद्दारी कर चुकी है बीजेपी

देश में मोदी सरकार के सत्ता से आने से पहले से ही भाजपाइयों ने सेना के नाम पर राजनीति शुरू कर दी थी। बॉर्डर पर सेना के जवानों के सर काटे जाने की घटना को भी बीजेपी ने खूब भुनाया। उस वक़्त मोदी ने कई जगह अपने भाषणों में एक के बदले दस सर लाने की बात भी कही थी।  शिवसेना ने भी हाल ही में मोदी के पाकिस्तान से साथ चल रहे प्रेम प्रसंग को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा है कि मोदी सरकार के 4  साल में जितने जवान शहीद हुए हैं उतने पिछले 50 साल में नहीं हुए।

निष्कर्ष:

भाजपा खुद एक निकम्मी और बेहद गिरी हुई पार्टी है इसकी जीत के पीछे की एक मुख्य वजह क्षेत्रीय पार्टियों से किये गए गठजोड़ हैं। लेकिन आज के वक़्त में क्षेत्रीय पार्टियां भी इस पार्टी से नाता तोड़ रहीं हैं।

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