लन्दन से माल्या को मिली खुशखबरी, मोदी सरकार अब कभी नहीं माल्या को पकड़ पायेगी - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

लन्दन से माल्या को मिली खुशखबरी, मोदी सरकार अब कभी नहीं माल्या को पकड़ पायेगी

भारत के बैंकों से हजारों करोड़ रूपये लेकर भागा भगोड़ा विजय माल्या को देश में वापिस लाने के लिए सीबीआई अपना काम बिलकुल भी गंभीर रूप से नहीं कर रही है। एबीपी न्यूज में चलाई गई एक खबर के मुताबिक, सीबीआई की लापरवाही की वजह से विजय माल्या के खिलाफ केस को कमजोर कर दिया गया है।

कौन है माल्या?

आपको बता दें कि विजय माल्या किंगफिशर कंपनी के मालिक हैं और उनके ऊपर भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ का कर्ज है। जिसे बिना चुकाए वो 2 मार्च 2016 को देश छोड़कर लंदन भाग गया। विजय माल्या इस तरह आसानी से भाग निकला तो इस पर मोदी सरकार पर सवाल उठ चुके हैं।

मोदी सरकार पर सीबीआई का गलत इस्तेमाल करने के भी कई बार आरोप लग चुके हैं और अब सीबीआई द्वारा माल्या का केस कमजोर होना सरकार पर लगे आरोपों को और भी ज्यादा गंभीर कर देता है।

माल्या को वापिस लाना मुश्किल

अब विजय माल्या को वापस लाना काफी ज्यादा मुश्किल हो सकता है क्योंकि सीबीआई की तरफ से विजय माल्या के खिलाफ जिन गवाहों के बयान कोर्ट के सामने पेश किए गए हैं उनमें कई खामियां बताई जा रही हैं।

लंदन कोर्ट में दावा किया गया है कि माल्या के खिलाफ लगभग 12 गवाहों के बयान ऐसे हैं जो शब्द दर शब्द आपस में मिल रहे हैं। जो बिलकुल एक जैसे हैं।

हर गवाह का एक ही बयान

ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि हर एक गवाह का बयान एक जैसा हो हर एक गवाह की तरफ से एक ही जैसा बयान दिया जाए और एक जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाए। इसके अलावा भी इन बयानों में कई तरह की और भी खामियां बताई जा रही हैं। ये बयान बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के ही बताए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं है मान्य

इसमें सबसे बड़ी बात किसी भी बयान में गवाह के हस्ताक्षर नहीं हैं। ये बयान धारा 161 के तहत यानी पुलिस के सामने दिए गए हैं।

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि धारा 161 के तहत दिए गए बयानों को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता है। जब इस धारा के तहत लिए गए बयानों को सबूत के तौर पर माना ही नहीं जाता है तो फिर इतने महत्वपूर्ण मामलें में ऐसी गलती कैसे कर दी गई है?

सरकार के सूत्रों के मुताबिक लंदन कोर्ट इस मामले में गवाहों और सबूतों को लेकर इसी महीने सुनवाई करने जा रहा है कि सीबीआई ने जो गवाह-सबूत कोर्ट मे पेश किए हैं वो कोर्ट के सामने मान्य हैं या नहीं।

ऐसे में अगर किसी भी जांच एजेंसी की लापरवाही के चलते माल्या का प्रत्यार्पण रूका तो वो केवल जांच एजेंसी की ही नहीं बल्कि पूरी सरकार की नाकामी है जिसके तहत सरकार और सीबीआई भी विपक्ष के सीधे निशाने पर खड़ा कर देगा।

 

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