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मोदी की वजह से छोड़ रही हूं देश, “अब नहीं रह पाऊँगी”, क्योंकि…!

वायरल इन इंडिया संवाददाता -
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बीजेपी और मोदी सरकार भले ही अपने 4 सालों के कामकाज़ को लेकर चाहे कितना भी अपनी पीठ थप-थपा ले लेकिन जमीनी हकीकत किसी से नहीं छुप पाई है.

मोदी राज में देश में हिंसा और असहिष्णुता किस कदर अपनी जड़े मजबूत करती जा रही है इसी बात को बताते हुए देश की एक नागरिक, एक माँ और एक परेशान पत्नी ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक ख़त लिखा.

महिला ने देश छोड़ने के पीछे मोदी सरकार पर किया हमला

प्रधानमंत्री को लिखे अपने इस खत में महिला ने देश छोड़ने की बात की है. महिला ने प्रधानमंत्री मोदी को इसके पीछे की दिल दहला देने वाली वजह भी बताई जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. महिला का ये पत्र अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

जिसमें महिला ने लिखा…

ख़त यहाँ से शुरू होता है…

“श्री प्रधानमंत्री,

मुझे यकीन है कि आप मजा मा हैं. मैं ये सोच रहा हूं कि शायद आप शर्म के चलते ही प्रधानमंत्री का पद छोड़ सकते हैं और किसी और को अधिक सम्मानित, शिक्षित, गैर-विवादास्पद और मानवीय तरीके से आगे बढ़ने दें सकते है.

काश हमारे देश के संविधान ने नागरिकों को अपनी उस सरकार को तोड़ने के लिए कोई अधिकार दिया होता. जो केवल अपने फ़ायदे के लिए देश में असहिष्णुता, हत्या, उदासीनता और नफ़रत फ़ैलाने का काम करती हैं.

ये बात मुझे अक्सर परेशान कर देती हैं कि किस तरह देश की जब तमाम सुर्खियाँ खून से भरी पड़ी होती हैं तब भी आप एक शब्द नहीं बोलते है. आप मेरे देश भारत को अंधेरे में ले जा रहे हैं.

मैने हिंदू धर्म अपनाया हुआ है, लेकिन अपने आप को सच्ची हिंदू साबित करने के लिए मुझे गौमूत्र पीने की आवश्यकता नहीं है. मुझे दिक्कत नही है अगर कोई सब्जियों और दाल नहीं खाता बल्कि गौमांस खाता है तो. ohh! भूल गए दाल गौमांस से ज्यादा महंगा है. आप अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो देश का नेतृत्व कर रहे हैं. आपके किसी भी कार्य से लोकतंत्र में विश्वास नहीं दिखता.

आपके पास काफ़ी समय है और समय आपको एक बार फिर दिखाएगा कि आप कितनी ओछी सोच वाले हैं जो देश में खराब स्तिथि में भी चुप रहना पसंद करते हैं.

कश्मीर में फैलती अशांति, अलगाववादी नेता की मजबूत होती पकड़, हत्या, भ्रष्टाचार और अडानी और अंबानी जैसे कई लोग आज देश में मौजूद है जिसका रक्षक बनकर आपका हाथ हमेशा उनके सिर पर रहता है. हर नागरिक की तरह हमे भी कांग्रेसराज में एक नई उससे बेहतर सरकार की उमीद थी, लेकिन अफ़सोस कई पहलुओं को देखते हुए हमने इस भारत की उमीद कभी नहीं की थी जिसे आज अपने बना दिया है.

हमारा देश UPA राज में ही बेहतर था क्योंकि उसे कोई आरएसएस की विचारधारा पर नहीं चला रहा था. उस सरकार ने भी अपने शासन में हमे दाल दी लेकिन 200 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर नहीं. उस सरकार ने हमे भ्रष्ट अधिकारी दिए न कि आपकी पार्टी और उसके लोगों की तरह भ्रष्ट नेता.

सौभाग्यवश आज मैं आपकी आँखों से दूर जिस जगह पर हूँ वहां से मैं खुद को बहुत सुरक्षित महसूस कर रही हूँ, लेकिन मुझे अपने भारतवासी दोस्तों के लिए बेहद दुख होता है जिन्हें हर रोज एक और काले दिन के साथ उठाना पड़ता है. मेरे पति वास्तव में सही थे जब उन्होंने मुझसे करीब एक साल पहले भारत में खुद को असुरक्षित महसूस करने की बात कही थी, लेकिन मैंने उसे उनका वहम बताकर उन्हें चिंता नहीं करने की सलाह दी थी.

एक दिन उन्होंने मुझे बोला कि यह समय है कि हमें देश छोड़ देना चाहिए और उन्होंने मुझे इस बारे में चुप रहने को कहा. मैं उन्हें समझाती रही कि अच्छा होगा अगर वो कोई फ़ैसला लेने से पहले शान्ति के साथ एक बार फिर सोचे.  

लेकिन समय बीतने के साथ-साथ मेरा देश और अधिक असहिष्णु होता चला गया. वो भी इसलिए क्योंकि ऐसा आपने और आपके लोगों ने होने दिया. 

हालांकि मैंने स्वीकार किया कि हर कोई आपकी तरह नहीं है और वो आपकी तरह धर्म, राष्ट्रीयता या जाति के आधार पर अपनी राय नहीं बनाते हैं.

इसलिए आखिरकार मुझे अपने पति की बात मननी पड़ी. जैसे ही हमारे जहाज ने दूसरे देश की धरती पर अपना कदम रखा जिसे मेरे पति अपना घर बोल सकते थे, तब उन्होंने राहत की सांस थी.

मैंने अपने पति को इतना चिंतामुक्त कभी नहीं देखा था. आज हम स्वतंत्रता को असल में जानते है जिसकी हम सराहना भी करते हैं. हम यहाँ किसी से भी डरे बिना कुछ भी खा सकते हैं. हमारी बेटी अपने देश की सुन्दर यादों, दोस्तों और स्कूल को छोड़ने से खुश नहीं है, लेकिन हम उसे एक बेहतर भारत में जाने की उमीद दिखाते हैं जिसे वो एक दिन फिर अपना घर कहेगी और वहां रहेगी. 

अशांति, नफ़रत और बुरे लोगों से मुक्त उसका वो घर जहाँ कोई और भारत को अधिक प्रतिष्ठित, मानवीय तरीके से शांतिपूर्वक ढंग से रहने लायक बनाएगा. जो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है. मैं कभी भी अपना भारत छोड़ना नहीं चाहती थी, लेकिन आपने मुझे ऐसा करने पर मजबूर किया.

मैं उस दिन का उत्सुकता से इन्तेजार करूँगा जब आप 201 9 में पराजित हो जाएंगे और प्रधानमंत्री जी मैं आपको वायदा करती हूँ कि आप या आपके आरएसएस के गुंडों को सरकार बनाने के लिए जिस दिन जीत हासिल नहीं होगी वो दिन मेरा घर वापसी का दिन होगा.”

निवेदन:  कृपया इस पत्र को छापा जाए ताकि हर भारतीय इसे पड़ सके. इसे पढ़कर मुझ जैसे बहुत लोगों को आशा नज़र आएगी ,जो शांति के साथ रहने के लिए अपने परिवारों के साथ अपने देश अपने घर लौटेंगे. उसे वो अपना लोकतान्त्रिक देश कह सकेंगे. 

(जिस लेखक ने हमसे संपर्क किया है, भारत में अपने परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसने अपना नाम नहीं बताने का आग्रह किया है. यहां व्यक्त किए गए विचार उनके स्वयं हैं और किसी भी अन्य व्यक्ति सा संस्था का इससे कोई लेना देना नहीं है.)

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