आख़िरकार मनमोहन सिंह सही और मोदी हुए गलत साबित, चीनी मीडिया ने किया पर्दाफाश

शेयर करें

भले ही यहाँ पर भाजपा और उनके समर्थक मोदी के विकास में कसीदे पढ़ते हुए कुछ भी कहे कि मोदी के शासन में देश ने ये कर लिया वो कर लिया लेकिन हकीकत ये है कि चीन और जापान के बाद भारत की अर्थव्यवस्था एशिया की तीसरी सबसे कमजोर अर्थवयवस्था है और इसकी चर्चाएँ पूरी दुनिया में हो रही हैं !

मोदी से उम्मीद लगाये थे जनता पर हुआ ये सब

दरअसल जिस तरीके से मोदी ने चुनाव के पहले अपन जुमले वाले भाषण दिए और एक फेक छवि बनाई जो बड़ी बुलंद लगती थी उसकी कलई मोदी के सत्ता में आने के बाद खुल गयी !

2016 में तो भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 7 फीसदी की दर से बढती दिखी लेकिन बर्तमान में ये चार सालों में सबसे नीचे है जो आज तक न हुआ ! अभी 5.7 की दर से अर्थवयवस्था बढती दिख रही है जो बहुत ही चिंता की बात है और मोदी को विपक्ष जमकर खरीखोटी सुना रहा है !

सरकार की बढती चिंता इस बात से भी जाहिर होती है क्योकि सत्ता में आते ही मोदी ने पिछली सरकार की जिस आर्थिक सलाहकार समिति को भंग कर दिया था उसे अब फिर से अर्थशास्त्रि विवेक देबरॉय की अध्यक्षता में लाया गया है ! मोदी सरकार इतना फेल हुई है कि विपक्ष तो छोडो भाजपा के लोग ही मोदी पर ऊँगली उठा रहे हैं !

इससे पहले भी भाजपा के लोगों ने ही भाजपा को लताड़ा

ये कोई पहला मामला नहीं है कि भाजपा के लोगों ने ही पार्टी को ऐसा भला बुरा कहा हो ! मोदी के शासन के पहले जब अटल जी का शासन था  तो उस सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने ही अपने सरकार पर अर्थवयवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाये थे !

अब मोदी के नोट्बंदी के असफल फैसले पर हर तरफ मोदी की आलोचना हो रही जिसमे पार्टी के वही यशवंत सिन्हा भी शामिल हैं तो वहीँ शिवसेना भी पीछे नहीं है ! आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू ने भी कहा कि जीडीपी में गिरावट का कारण नोट्बंदी और gst ही है !

देशी छोडो विदेशी मीडिया भी कर रहा मोदी की आलोचना

भारत में वैसे तो ज्यादातर मीडिया वाले भाजपा के समर्थन में उनके प्रवक्ता के तौर पर काम कर रहे है और जो कुछ ईमानदार बचे हैं वो आलोचना कर रहे हैं लेकिन यहीं पर बात नहीं रूकती !

मोदी सरकार की नीतियों से अर्थवयवस्था में जो मंदी आई है उसको लेकर चीनी मीडिया भी मोदी की आलोचना करने में खड़ा है और ये लाजिम भी है ! चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने मोदी के दोहरे रवैये की जमकर आलोचना की है !

ग्लोबल टाइम्स ने खबर छापते हुए लिखा कि ,”मोदी को बिज़नेस समर्थक माना जाता है लेकिन उनकी कथनी और करनी में काफ़ी फ़र्क़ है!’ वहीँ दूसरी तरफ 24 जून को द इकनॉमिस्ट ने कहा था कि मोदी जितने बड़े सुधारक दिखते हैं उतने बड़े हैं नहीं, और मोदी को एक सुधारक की तुलना में एक प्रशासक ज़्यादा बताया था!

ग्लोबल टाइम्स ने ये भी कहा

अपनी खबर में द इकोनोमिक्स टाइम्स का जिक्र करते हुए ग्लोबल टाइम्स ने भी कहा कि,”भारत और चीन दोनों की अर्थव्यवस्था की यात्रा एक नियंत्रित अर्थव्यवस्था से शुरू हुई थी और आज की तारीख़ में बाज़ार के साथ क़दमताल मिलाकर चलने के मुकाम तक पहुंच चुकी है!

भारत को आर्थिक नीतियों के स्तर पर चीन से सीखना चाहिए! मोदी को छोटे स्तर स्थायी नीतियों को स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए और अचानक से हैरान करने वालों फ़ैसलों से बचने की ज़रूरत है!”

फॉर्चून ने ऐसे की आलोचना

भाजपा की आर्थिक नीतियो की आलोचना करते हुए फॉर्चून ने एक रिपोर्ट देते हुए कहा कि भाजपा के दिमाग में कौनसी नीति चल रही इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है ! रिपोर्ट में यशवंत सिन्हा का जिक्र करते हुए कहा कि ,  ‘2012 में सितंबर का महीना था! तारीख़ थी 27!

जगह थी अमरीका की स्टैन्फोर्ड यूनिवर्सिटी! क़रीब 500 छात्रों और शिक्षकों का जमावड़ा था! वहां मौजूद थे भारत में चार बार आम बजट पेश कर चुके और आर्थिक सुधारों के पैरोकार यशवंत सिन्हा! बाज़ार के साथ दोस्ताना नीतियों के समर्थक यशवंत सिन्हा उस दिन खेद और अफसोस के साथ मौजूद थे!”

आगे रिपोर्ट में फॉर्चून ने लिखा कि ”यशवंत सिन्हा 2004 में बीजेपी की हार का आरोप ख़ुद पर ले रहे थे! उन्होंने कहा था- मैं महसूस करता हूं कि 2004 में पार्टी की हार के लिए केवल में ज़िम्मेदार हूं! उस चुनाव में मैंने जो सबक लिया उसे कभी भूल नहीं सकता हूं”

दरअसल मामला कुछ ऐसा है कि यशवंत को ऐसा लगता होगा कि वो तब लोकसभा के सांसद थे और मोदी सरकार की लहर थी तो उन्हें लगा होगा कि मोदी की सरकार बन जाएगी 2014 में और वो फिर से वित्त मंत्री बन जायेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ !

यशवंत के बयान को दिखाते हुए इस रिपोर्ट ने लिखा कि ”मैंने वित्त मंत्री रहते हुए केरोसीन तेल कीमत ढाई रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 9.50 रुपए प्रति लीटर कर दी थी! ग्रामीण भारत में केरोसीन तेल का इस्तेमाल व्यापक पैमाने पर रोशनी और खाना पकाने के लिए होता है!

जब मैं अपने लोकसभा क्षेत्र में एक हाशिए के गांव में चुनाव प्रचार करने गया तो एक बुज़ुर्ग महिला से वोट देने के लिए कहा और उन्होंने कहा कि ठीक है! लेकिन क्या मैं केरोसीन की कीमत बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार नहीं था? क्या इस वजह से उस बुज़ुर्ग महिला की ज़िंदगी मुश्किल नहीं हुई थी?”

दरअसल सिन्हा ने कहा था कि,”अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने विकास के कई काम किए थे, जिनमें हाइवे का निर्माण सबसे अहम था! हालांकि हमें चुनाव जीतने में मदद नहीं मिली! ‘ 2014 में कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा और बीजेपी को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रचंड जीत मिली !

एक बार मोदी सरकार फिर से घिरी

दरअसल मोदी सरकार अभी चारों तरफ से घिरी हुई है ! जहाँ एक ओर नोट्बंदी और gst भाजपा को खा रही है और वहीँ दूसरी ओर बढती मंहगाई और पेट्रोल-डीजल के दाम ने तो भाजपा के नाक में दम कर रखा है और जनता उन्हें गालियाँ देने में लगी हुई है !

जब नोटबंदी पर संसद में बहस हो रही थी तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश की जीडीपी में कम से कम दो फ़ीसदी की गिरावट आएगी! अभी जो वृद्धि दर है उसमें मनमोहन सिंह का कहा बिल्कुल सही साबित हुआ है! जब जीएसटी को संसद से पास किया गया तो सरकार का मानना था इससे जीडीपी ऊपर जाएगी!

मनमोहन सिंह ने जो कहा था वो अक्षरसः सही साबित हुआ है और सरकार का हर एक दावा फेल हुआ है ! अगर मनमोहन सिंह की बात सुनी होती तो शायद ऐसे हालत देश के न होते !

वहीँ दूसरी ओर ब्लूमबर्ग अपनी रिपोर्ट में लिखता हिया कि , ”भारत के करेंसी और बॉन्ड मार्केट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं! विदेशी शेयर मार्केट से अपना बॉन्ड बेच रहे हैं! भारतीय बाज़ार पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है और इससे अर्थव्यवस्था में और गिरावट की आशंका बढ़ गई है!  आने वाले वक़्त में रुपया डॉलर के मुकाबले और कमज़ोर पड़ सकता है!”

 

https://www.youtube.com/watch?v=fX7vR86Rzmo

Source-http://www.bbc.com/hindi/india-41417909?ocid=socialflow_facebook


शेयर करें

अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में छोड़े