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मोदी सरकार के 56 इंच के सीने को चीन ने किया इस तरह से पूरी तरह फेल

वायरल इन इंडिया संवाददाता -
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पिछले साल सिक्किम-भूटान सीमा पर स्थित डोकलाम के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच 73 दिन तक जारी गतिरोध के बाद भारत की तरफ से बहुत ही जोरशोर से कहा गया था कि भारत की कूटनीतिक जीत रही है कि चीन को अपनी सेना को पीछे हटाना पड़ा है।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले पर जीत सिर्फ भारतीय सेना की हुई थी। लेकिन कुछ आंकड़े सामने आए हैं जिससे अपने 56 इंच का सीना दिखाने वाले प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक जीत कितनी सही थी।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, साल 2017 में चीन ने लाइन ऑफ एक्चुएल कंट्रोल (LAC) पर 415 बार घुसपैठ की थी वहीं जबकि साल 2016 में ये आंकड़ा 271 बार का ही था। इस दौरान साल 2017 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच 216 बार आमना-सामना भी हुआ था जबकि साल 2016 में 146 बार इस तरह की घटनाएं हुई थीं।

सीमा पर 23 संवेदनशील क्षेत्र

भारतीय सेना की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक एलएसी पर 23 ऐसे खास इलाकों की पहचान हुई है जहां दोनों देशों की सेनाओं के बीच विवाद लगातार होता रहता है। इन इलाकों में लद्दाख के डेमचौक, चुमार, पेंगोंग, स्पांगुर गैप, हिमाचल प्रदेश का कौरिक, उत्तराखंड का बाराहोती, अरुणाचल प्रदेश के नमखा चू, सुमदोरोंग चू, असफिला और दिबांग घाटी जैसे क्षेत्र आते हैं।

2016 में रिटायर हुए चीन में भारत के राजदूत रहे अशोक कांथा जो पिछले 3 दशकों से कई मौकों पर सीमा पर बने विवाद के बीच बातचीत का हिस्सा रहे हैं। कांथा ने बताया की घुसपैठ की बढ़ती संख्या ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। हमें घुसपैठ के पैटर्न को समझने के लिए अलग-अलग आकंड़ों की जरूरत है।

हमें ये जानने की जरूरत है कि ये सामान्य तौर पर विवादित क्षेत्रों में हो रहा है या फिर इनमें नए क्षेत्र भी शामिल हैं जहां चीनी सेना घुसपैठ कर रही है। तभी हम घुसपैठ में हो रही बढ़ोतरी के महत्व को समझ पाएंगे।

‘सर्विलांस सिस्टम को बेहतर करना होगा’

सैन्य ऑपरेशन के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया कहते हैं कि अगर ये आंकड़े सही हैं, तो इसका मतलब ये हुआ कि एलएसी पर चीन ने अपनी गश्त बढ़ाई है। घुसपैठ की संख्या बढ़ने से भविष्य में क्षेत्र में अमन और शांति बनाए रखना बड़ी चुनौती बन जाएगी।

भाटिया बताते हैं कि घुसपैठ में लगातार हो रही बढ़ोतरी से पता चलता है कि हमें जमीनी स्तर पर और गश्त बढ़ाना होगा। लंबे समय से लटके पड़े 73 भारत-चीन बॉर्डर रोड को पूरा करना होगा, साथ ही सर्विलांस सिस्टम को और बेहतर करना होगा।

बैठकों के बाद भी नहीं रुका

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि जून, 2016 के बाद से दोनों के बीच 26 फ्लैंग बैठकें हुई हैं जो कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मिसर्स (सीबीएम) का ही एक हिस्सा है। फ्लैग मीटिंग में दोनों देशों की सेनाओं की ओर से ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी एलएसी पर 5 मनोनीत जगहों पर मिलते हैं।

source;https://politicalherald.in/426/hinese-soldiers-into-the-indian-side-of-the-lac/

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