जन्मदिन स्पेशल:- सीबीआई ने कहा, नरेन्द्र मोदी नहीं बल्कि रेपिस्ट बाबा राम रहीम को जेल भेजने वाले मनमोहन सिंह है - वायरल इन इंडिया - Viral in India - NEWS, POLITICS, NARENDRA MODI

जन्मदिन स्पेशल:- सीबीआई ने कहा, नरेन्द्र मोदी नहीं बल्कि रेपिस्ट बाबा राम रहीम को जेल भेजने वाले मनमोहन सिंह है

डेरा सच्चा सौदा राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई गयी जिस दौरान राम रहीम रो पड़ा था कोर्ट में | इस उपलब्धि के बाद लोगो ने सोशल मीडिया में मोदी के नाम के जयकारे लगाने शुरू कर दिए है जिसके चलते एक सच कही न कही चुप रहा है | और वो सच जुड़ा है मनमोहन सिंह से |

साध्वी की चिट्टी अटल बिहारी वाजपयी के दौर में आई थी जिसे आगे कोर्ट में भेज दिया गया था और कार्यवाही के आदेश दिए लेकिन मनमोहन सिंह ने इस केस मे सीबीआई को बिना किसी दबाव के जांच पड़ताल के आदेश दिए थे | और तब सीबीआई ने इस पर जमकर मेहनत करी |

क्या कहते है सीबीआई के रिटायर डीआईजी एम. नारायणन मनमोहन सिंह के बारे में?

इस मामले की पूरी जांच सीबीआई के रिटायर डीआईजी एम. नारायणन ने की है और अब एम. नारायणन का कहना है कि “तब राम रहीम के खिलाफ जांच नहीं करने को लेकर बहुत दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उस सियासी दबाव को नजरंदाज करते हुए राम रहीम के खिलाफ जाँच करने का आदेश दिया था ।

सीबीआई की निष्पक्ष जांच का ही नतीजा है कि आज डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख राम रहीम सलाखों के पीछे है।”

वे आगे कहते है “तब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीबीआई को फ्री हैंड कर दिया था और वे पूरी तरह से जांच एजेंसी के साथ थे । उन्होंने ये भी कहा था कि हम कानून के अनुसार चलेंगे । उन्होंने दोनों साध्वियों के लिखित बयान पढ़ने के बाद कहा था कि पंजाब और हरियाणा के सांसदों के दबाव में आने की कोई जरूरत नहीं हैं |”

सीबीआई समेत राज्य के 2 सांसदों पर था गहरा दबाव

एम. नारायणन ने यह भी कहा कि दोनों राज्यों के सांसदों के ऊपर इतना दबाव था कि उस वक़्त मनमोहन सिंह ने सीबीआई चीफ विजय शंकर को बुलवाकर, पूरे मामले की जानकारी ली थी । उसके बाद से सीबीआई ने अपना बीना किसी दबाव में रहकर अपना काम करना शुरू कर दिया था |”


एम. नारायणन ने बताया था कि केस में सबसे बड़ी चुनौती आरोपी साध्वी को तलाशना था क्योंकि तब उसका कोई अता-पता नहीं था । कड़ी मश्ककत के बाद उन्होंने 10 साध्वियों का पता लगाया, लेकिन उनमें से दो ही बोलने को राजी हुईं थी बाकियों ने सामने आने से मना कर दिया था । हालांकि ये दो गवाहियां ही केस में सबसे अहम कड़ी साबित हुईं थी |

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