बीजेपी ले सकती है बड़ा फैसला, माल्या से तार जुड़ने के बाद अब 2019 में बदल सकती है पीएम् उमीदवार

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लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस के नेतृत्व में बनने वाले महागठबंधन के आगे भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए पस्त होता दिखाई दे रहा है. कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा का मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब नए रास्ते तलाशने में जुट गया है. आरएसएस कभी भी देश के सामने चौंकाने वाली घोषणा कर सकता है.

1. शाह के हाथ मिल सकती है कमान

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं. भाजपा में उन्हें चाणक्य के तौर पर जाना जाता है. अमित शाह संघ के भी प्रिय भी माने जाते हैं. ऐसे में कभी भी संघ उन्हें 2019 लोकसभा चुनाव के लिए पीएम उम्मीदवार घोषित कर सकता है.

2. हिंदुत्व के मोर्चे पर विफल

यूं तो नरेंद्र मोदी अधिकांश मोर्चे पर विफल साबित हुए है लेकिन संघ और विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर निमार्ण और समान नागरिक संहिता पर मोदी की नीति और नियत से नाखुश है. संघ को लगता है कि नरेंद्र मोदी भी पिछली सरकारों की तरह तुष्टिकरण के रास्ते पर चल रहे हैं.

3. पारंपरिक वोटर नाराज

संघ परिवार यह सोचकर काफी चिंतित है कि कहीं मोदी सरकार का हाल भी कहीं अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की तरह न हो जाए. भाजपा का पारंपरिक हिंदुवादी वोटर राम मंदिर निमार्ण पर मोदी की वादाखिलाफी से काफी क्रोधित है. मोदी की जुमलेबाजी से यह वर्ग इस कदर कुपित है कि वह किसी और विकल्प की तलाश में है.

4. हर कीमत पर चाहिए सरकार

आरएसएस देश से इस भ्रांति को तोड़ना चाहती है कि भाजपा की सरकार दोबारा लौट कर वापस नहीं आती. उन्हें लगता है कि नरेंद्र मोदी की जगह अमित शाह को पीएम उम्मीदवार बनाने से भाजपा का पारंपरिक वोटर पुनः इस उम्मीद के साथ पार्टी के पक्ष में वोटिंग कर सकता है कि जो काम मोदी नहीं कर पाए, वो अमित शाह कर दिखाएंगें.

निष्कर्ष :

काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती. संघ परिवार अगर इस मुगालते में है कि नरेंद्र मोदी की जगह अमित शाह को पीएम उम्मीदवार घोषित किया जाता है तो 2019 में जीत नसीब हो सकती है, तो उन्हें निराशा हाथ लग सकती है.


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