भाजपा और अटल ज़ी को बड़ा झटका, राजीव समर्थकों के लिए खुशख़बरी

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देश में जब से बीजेपी सरकार बनी है तब से देश में नाम बदली का दौर चला हुआ है। कभी शहरों का नाम बदला जा रहा है तो कभी रेलवे स्टेशनों का लेकिन वो जो नहीं बदल रहा है वो है देश के हालात।

लेकिन देश में इस नाम बदली का खेल अब खत्म होने वाला है। जिसके संकेत आज कल साफ़ तौर पर दिखने लगे हैं।

1. राजस्थान सरकार ने 9500 राजीव गाँधी सेवा केंद्रों का बदला था नाम

राजस्थान में बीजेपी सरकार बनने के बाद वसुंधरा राजे सरकार ने कांग्रेस सरकार के एक विकास कार्य स्कीम का नाम बदलने का आदेश दे दिया था।

इस आदेश को जारी कर सरकार ने एक ही झटके में 9500 सेवा केंद्रों का नाम बदल दिया गया था। इस तरह नाम बदल कर कांग्रेस सरकार के काम का श्रेय बीजेपी ने लेने की कोशिश की।

2. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा था सेवा केन्द्रों का नाम

राजस्थान में बीजेपी सरकार ने राजीव गाँधी सेवा केंद्र का नाम बदल कर अटल सेवा केंद्र रख दिया। इस बदलाव को लागू करने के लिए करोड़ों रुपयों का खर्च आया था।

सरकार को इस आदेश को लागू करने के लिए सरकार को लाखों टन कागज़ आदि बर्बाद गए।

3. मनरेगा के बजट से बना लिए थे सेवा केंद्र

सरकार ने अपने इस फैसले को लागू करने के लिए गरीब और मजदूर तबके के लोगों के पेट पर लात मारी थी।

इस नाम बदली के तामझाम को अंजाम देने के लिए मनरेगा के बजट में से पैसा खर्च किया गया। देश में विकास को रोक कर नाम बदली की इस बचकानी हरकत को अंजाम दिया गया।

4. हाईकोर्ट ने फैसले पर वापिस लेने का दिया आदेश

हाईकोर्ट में नाम बदली का यह मामला पहुँचने पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए वसुंधरा राजे सरकार को तगड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने सरकार के नाम बदली के इस फैसले को निरस्त कर दिया है।

5. सरकार की पकड़ में नहीं रही अफसरशाही

राजस्थान में चुनाव आने वाले हैं। आज के हालात के मुताबिक सरकार की अफसरशाही पर से पकड़ कमजोर होती जा रही है। सरकारी बाबू बीजेपी की परवाह किये बिना अपने तरीके से काम करने में जुटे हुए हैं।

निष्कर्ष:

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद भाजपा में कोई ढंग का नेता नहीं बचा है। सत्ता में आकर धौंस दिखाकर काम करवाने वाली बीजेपी के दिन लड़ने वाले हैं।


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