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कुछ दिन पहले बीजेपी सरकार के विरोध में उनके ही कुछ नेता इसलिए उतर आये थे क्योंकि वो दलित थे. और इनका विरोध करे भी क्यों ना, क्योंकि सबसे ज्यादा अगर किसी को परेशान किया जाता है वो है दलित. मोदी सरकार ने कहा था की वो सबको साथ लेकर चलेंगे पर यह वो असल में कर नहीं पाए.

हर पार्टी में भेदभाव होता है और बीजेपी में काफी ज्यादा होता है. क्योंकि बीजेपी हर समय अपना रंग बदल लेती है कभी भगवा रंग तो कभी यह बेरंग हो जाते हैं. जी हाँ आपको याद होगा की कुछ दिन पहले जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने एससी/एसटी एक्ट के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी. उनके इस फैंसले पर जनता ने भरपूर विरोध किया पर बीजेपी सरकार टस से मस भी नहीं हुई थी.

1.मोदी सरकार ने दिया जस्टिस को दिया रिवार्ड

आपको यकीन नहीं होगा की जहाँ एक तरफ पूरा देश एक व्यक्ति का विरोध कर रहा है तो दूसरी तरफ मोदी सरकार उसका साथ दे रही है. जी हाँ रिटायर्ड जस्टिस आदर्श गोयल ने एससी/एसटी एक्ट में कुछ बदलाव किये थे.

बदलाव के कुछ दिन बाद वो रिटायर हो गये और अब मोदी सरकार ने उन्हें जो दिया उसे आप रिवार्ड ही समझ सकते हो. लोजपा के सांसद चिराग पासवान का कहना है की मोदी ने गोयल को एनजीटी अध्यक्ष बनाकर रिवार्ड दिया है.

2.चिराग पासवान है केंद्रीय खाद्य मंत्री

लोजपा के सांसद चिराग के पिता केंद्रीय खाद्य मंत्री है जिनका नाम रामविलास पासवान है. रामविलास पासवान ने भी मोदी को पत्र लिखकर एनजीटी अध्यक्ष गोयल को हटाने की मांग की है पर मोदी ने इसका किसी भी तरह का जवाब नहीं दिया है.

पासवान का कहना है की 8 अगस्त तक यदि गोयल को नहीं हटाया जाता है वो पुरे देश में आन्दोलन करेंगे. और आप जानते है की आन्दोलन करने से देश और देश की अर्थव्यवस्था दोनों खतरे में होती है. पर मोदी की कान पर अभी तक मानो जूं भी नहीं रेंगी है.

3.एससी/एसटी एक्ट को कमजोर नहीं करने देंगे

कुछ हद तक यह सही भी है जिस तरह दलितों पर अत्याचार होता है ऐसे में कोई भी जस्टिस ऐसा निर्णय नहीं ले सकता है. क्योंकि आज भी दलितों को क़ानूनी मदद की जरूरत हैं. आप जानते होंगे की पहले दलित की एक रिपोर्ट पर पुलिस आरोपी को उसी वक्त गिरफ्तार करती थी पर अब ऐसा नहीं है.

अब पूरी तरह से छान-बिन करके पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करती है. इस बदलाव के बाद दलित और भारत के अन्य वर्ग के लोग भी नाराज है और मोदी सरकार से अपील कर रहे हैं की इस तरह का निर्णय कभी भी ना लिया जाए.

निष्कर्ष: यदि बीजेपी सरकार दलितों के बारें में इतना भी नहीं सोचती है तो वो कैसे कह सकती है की वो सबको साथ लेकर चल रही है. क्योकि सबको साथ लेकर चलने का मतलब होता है सभी के बारें में समान सोच रखना पर यहाँ मोदी सरकार अपना फायदा ही देख रही है. उम्मीद है की चिराग पासवान मोदी सरकार से जवाब मांगेगी.

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